कविता

लौकडौन ह्वय्यूं छूं भितर ग्वड्यूं छूं

—-लौकडौन—

लौकडौन ह्वय्यूं छूं भितर ग्वड्यूं छूं,
औंणा दिन बै क्वारेंटाइन ह्वयूं छूं।
हडग्यूं चचड़ाट, मुखडि मुज्जा पडया
पौड़-पौड़ी भी कमर कुसेगी,
दिन भर कै दौ गद्दा सुखौणू
यका हौड़ बै, हका हौड़ तचौणू।
कपडू ध्वे-ध्वे रंग उतिरिग्ये,
मुखड़ि की चळक्वांस चलीग्ये।
चौदह दिनों तक बंद ह्वयूं छूं
औंणा दिन बै क्वारेंटाइन ह्वयूं छूं।

लत्ता-कपड़ा बैग ट्वपळा
घौर जाणौ छिन उकतांणा
कबारि-कबारि मैं तौं थप्थ्यौंणूं
थप्थ्ये-थप्थ्ये चित्त बुझौणू
नियम कानून मा लेट्यूं छूं
खदरा परे सि पकोड़ी धर्यूं छूं
चौदह दिनों तक बंद हवयूं छूं
औंणा दिन बै क्वारेंटाइन ह्वयूं छूं।

गौं-मुळक अर अपड़्वा खातिर
मर्जी से मैं यख रयूं छू
कोरोना की अग्नि परिक्षा
सती-सावित्री ही बैठ्यूं छूं।
गौं का भै बंद दगड्या मेरा
दूर बटि छूं तौं सनकोंणू
लछमण रेखा भितर मा रेक
सुदि रंदू मै मौंण हलौंणू
चौदह दिनों तक बंद ह्वयूं छूं
औंणा दिन बै क्वारेंटाइन ह्वयूं छूं।
——-@अश्विनी गौड़ दानकोट अगस्त्यमुनि रूद्रप्रयाग —

—-औ लाटा  ऐजा तू—–

जिकुडि खुदांई त्वे बिना ससांई
  वौडा पछांण लोग,
पुश्ता पैरा सळयो
नै-नै उपज फसल उपजौ
      —— औ लाटा  ऐजा तू—–
अथाह धरती यख त्वे जागणी
बीज सीजणू माटा मगो
रोजगार की पौध डाल
हुण्त्यलू छंद यख पुर्यो।
      ——– औ लाटा  ऐजा तू —–
नाज का क्वन्का सिर्यो
साग अर भुज्जी लगो
टूटदि मकान्यूं चूं उगो
पाणी टूटी नैर सळयो।
       ——– औ लाटा  ऐजा तू —–
सूखदि यख फसल पण्यो
बगदू पाणी रोक लाटा
पुश्ता पैरा थामी धौर
अजकालु सळ्यो गौं का बाट्टा।
         ———औ लाटा  ऐजा तू ——–
माना त्वेमा डिग्री भौत
पढैलिखै कु फर्जंट तू
तकनीकी यख छ्वीं लगौं
बिजनेस कुछ यन खुलो।
            ——-औ लाटा  ऐजा तू ——–
बगत ऐगि जब त्वे पडलू
पहाड़ तै नयु सृजन गढण पडलू
धिकार्या पहाड़े तरफा कूल खटै
माधो सिग जन बण्ण पडलू।
              ——-औ लाटा  ऐजा तू ——–
——-@अश्विनी गौड़  दानकोट अगस्त्यमुनि रूद्रप्रयाग ।

बोड़ि आवा,बोड़ि आवा
अपडा पहाड़ बोडि आवा,
सालौ बै छोडी घौर कूड़ी!
तुमतै बुलांणी, धै लगांणी!

गौं की माटी तुमुतै भट्यांणी
बौड़ी आवा बौड़ी आवा धै लगांणी।

देश परदेस विदेश द्यौखा
आज कन बिपदा आंई च
कामकाज छोड़ी सबुकि टक्क
गौं-मुल्के तरफ लगीं च।

गौं की माटी तुमुतै भट्यांणी
बौड़ी आवा बौड़ी आवा धै लगांणी।

मनखि भी द्यौखा,
कन जंजाळ मा फसिग्ये
न घौर, न बण !
कन अधबाटे मा रेग्ये।

गौं की माटी तुमुतै भट्यांणी
बौड़ी आवा बौड़ी आवा धै लगांणी।

काम काज भी छट्ट  छूटी
द्यौ द्यबता  भी रूठि गैन
मनख्या ज्वोन पर भारी,
सगत दुख-विपदा ऐग्ये।

गौं की माटी तुमुतै भट्यांणी
बौड़ी आवा बौड़ी आवा धै लगांणी।

बोड़ि आवा,बोड़ि आवा
अपडा पहाड़ बोडि आवा,
अंग्वाळ चम्म मारी धौरा
गौं मुल्क भ्येट्ये जावा।

गौं की माटी तुमुतै भट्यांणी
बौड़ी आवा बौड़ी आवा धै लगांणी।

———@कविता कैंतुरा खल्वा लुटियाग चिरबटिया रूद्रप्रयाग




डाळा लगा
बट्टा बणां
सुंदर सुंदर गीत लगावा
चला सबि मिलि
गौं कु विकास करा ।

कांडा काटी डाळा लगौला
बेकार हवा पाणी शुद्ध बणौला

अच्छा अच्छा सौड़ बणोला
गौं तलक रोड़ पौछोला।

बिजली पाणी बचोला
गाड़ी छोड़ी सैकिल मा जोला।

खांणो चुळा वुन पकोला
रीति रिवाज अपणोला।

टूट्यां नळखा टौंटी लगौला
गौं कु पाणी बचौला।

जब गौं मा सुख सुविधा मा रोला
त गौं छोड़ी भैर किले जोला।

 —–रतन राणा  कक्षा-6
राउमावि पालाकुराली जखोली रूद्रप्रयाग

पाणी पाणी सबसे बड़ी चीज
पाणी से छिन  मनखी सबि जीव
पाणी बचौण त टैंक बणा दूं
बगदा पाणी तखुन खल्या दूं।

जख पांणी च, तखि मनखि बस्यूं
जख पांणी नी, तख मनखि भी नी

बरखो पांणी सुदि बौगणू
सर सर समांणू
पाणी बचौणौ
सबि जागी जा
खत्येंदा पाणी तै थामी द्या

—राधिका राणा   कक्षा 8  राउमावि पालाकुराली जखोली रूद्रप्रयाग



आवा आज मिली-जुली,
 ये महामारी का
अन्ध्यरा तै दूर कोला,
आज दुख-विपदा
 मा च, देस,
सबि सजग-सतर्क रेतै,
 भौळ सुख पौला।

कैकी टूटदि कांध्यूं तै,
कैकि भूखै आग तै,
कैकी निरासीं आस तै,
सारू भरोसू दयोला,
आवा आज मिली-जुलि,
ये अन्ध्येरा छंट्योला।
——@कविता कैंतुरा लुटियाग खल्वा चिरबटिया रूद्रप्रयाग ।।।।


इटली जन देस तैं
 त्वीन हराई,
पूरा विश्व मा कन,
 महामारी फैलाई!
कति लोखूं तै त्वीन,
 मौत का घाट उतारी।
अपुड़ौ से त्वीन,
 दूर भगाई।

इक्कीस दिन कु ‘लाॅक डाउन’
मोदी जी न कर्यांई,
अब देखदा कोरोना
 कतिग्या कम हवे ग्याई।

बोर्ड की परिक्षा तक,
  त्वीन रुकाई
टाॅपरै की लिस्ट मा त्वीन,
 अपड़ु नौ चढ़ाई।

मोदी जी का आदेश कु तुम
 पालन कर्या,
काम कना बाद तुम,
 हाथ जरूर ध्वाय्यां।

हे कोरोना त्वीन के पर,
 दया नि दिखाई,
ज्वान,बुड्या,बच्चा तु,
अफु दगड़ि लि ग्याई।

घर रखा तुम साफ,
डिटोल न पौंच्चा मारा,
बीस इक्कीस दिन तक,
 भैर,कतै सुदि ना आवा!

कोरोना की दवे, अजु
कैन नी बणांई,
हे भद्वाणों वीर नरसिंह
अब बाटु त्वी दिखाई।

हे कोरोना त्वीन
कतिग्ता ब्यो रुकैन,
 कतिग्ता लोग,
 सडक मा स्यवैन।

हे कोरोना त्वीन त,
 पूरा विश्व कु करि खारु!
देस की पूरी अर्थव्यवस्था,
 मिनटों मा करि माटू।
    —– @ प्रीति राणा कक्षा 10, राउमावि पालाकुराली जखोली रूद्रप्रयाग

प्रस्तुति -अश्विनी गौड अध्यापक विज्ञान राउमावि पालाकुराली जखोली रूद्रप्रयाग ।।।।

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