Home कविता

देखा गढभाषा मा नै छवाळि लिखणीं च

उदय दिनमान डेस्कः मन का भाव गंठयोंणी च, ईं कड़ी मा आज देखा मयाली (जखोली) बटि एक बालिका- ‘रिंकी काला’ की रचना—
बालिका एमएससी सी की होनहार छात्रा च अर हिंदी बटि लिखण शुरु करीतै अब गढवाली भाषा की तरफ प्रेरित ह्वोणी च।
“मेरू बचपन कु घर “
तिबारी मा बैठयू छाे में
सौचणूं छाे एक बात,
का गैन हाेला सी दिन !
बैठयू छाे उदास,
खौळा-चौक मा, खेल्या दिन ,
का गे हाेला आज,
आंखी मेरी भरी गैनी
देखी तिबार!
बालापन का दिन बीत्यां जख
आज ह्येगि स्या खंद्वार
दै-दादा न खवांया जख,
जख भै बैंण्यूं कि याद।
दग्ड्याें दगडी हँसी-खुशी खेळया कै त्याैहार
छाजा सज्यां रन्दा जख
कनु राैत्याळू चाैमास
खुद लगणी मैतै ताें दिनाें की
कख हर्ची हाेलु मेरू सु मुलुक आज ।
कातिक कु मैनु लगदू
बग्वाळ की च बार
भैलु खेलेदूं यख
आैजी बजाेंदा ढाेल की ताल।
झुमैलाें आैर गीताें की लगी बार
हंसी खुशी फैली रन्दी छे,
ये चाैक तिबार!
आज घास का बोटळा जम्या
ये चौक तिबार ।
बेटी-ब्वारी घास कु बणु- बणु जान्दा
बुड्या भग्यान अपरी छ्वीं बथ लांदा
मिली बांटी खान्दा सभी पल्याे आैर भात
काैदे की राेटी की त अलग ही छै बात ।
मन मेरी खुद्यैणू च
साेची-साेची बात
आंखी भरी गेनी मेरी
देख्यी आज का हाल |
———-@रिंकी काला, मयाली रूद्रप्रयाग ।
देखा गढभाषा मा नै छवाळि लिखणीं च,
मन का भाव गंठयोंणी च, ईं कड़ी मा आज देखा मयाली (जखोली) बटि एक बालिका- ‘रिंकी काला’ की रचना—
बालिका एमएससी सी की होनहार छात्रा च अर हिंदी बटि लिखण शुरु करीतै अब गढवाली भाषा की तरफ प्रेरित ह्वोणी च।
“मेरू बचपन कु घर “
तिबारी मा बैठयू छाे में
सोचने वाली एक बात,
दिन क्या होगा?
बैठयू छाे उदास,
खौला-चौक पर, खेल का दिन,
आज क्या होगा,
आंखी मेरी भरी गैनी
देखी तिबार!
बालापन का दिन बीत्यां जख
आज ह्येगि स्या खंद्वार
जीजा जी मत खाओ,
जख भै बैंण्यूं कि याद।
दगड्यं दगडी, खुशी की खुशी खेली गई है ।
छाजा सज्यां रन्दा जख
दुनिया का चौथा
मैं खुद को दिन में डालता था ।
आज मैंने अपना देश खो दिया है ।
कातिक कु मैनु लगदू
बगीचे में बार
भैलु खेलेदूं यख
आज बाजार में नदी की झील ।
कई बार झूठ और गाने
हंसी खुशी फैली रन्दी छे,
ये चाैक तिबार!
आज घास की घास है ।
ये चौक तिबार ।
बेटी-ब्वारी घास कु बणु- बणु जान्दा
बुड्या भग्यान अपरी छ्वीं बथ लांदा
मिली बांटी खान्दा सभी पल्याे आैर भात
काैदे की राेटी की त अलग ही छै बात ।
मेरा मन मेरे दिल में है ।
एक सच्ची बात ।
आंखी भरी गेनी मेरी
देख्यी आज का हाल |
———-@रिंकी काला, मयाली रूद्रप्रयाग ।

Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail
Facebooktwitterlinkedinrssyoutube

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *