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तुलसी पुज्यन्दी जख घर मा पीपळ तैं सेवा लगौन्दा..

उपासना सेमवाल काव्य संहिता

तुलसी पुज्यन्दी जख घर मा पीपळ तैं सेवा लगौन्दा..

बट सावत्री की ह्वोन्दी पूजा
बट वृक्ष तैं अर्ग चढ़ौन्दा
प्रकृति ह्वन्दी आराध्य देबी .
विश्व तैं हम यु सिखौन्दा …
हम हर रोज प्रकृति पूजी तैं ..
पर्यावरण बचौन्दा …पर्यावरण बचौन्दा …
पैली रोपणी मा पूजा लगदी जख ..
बीज की मुट्ठ भी धुप्योन्दा
पैली अन्न कु लगदु हर्यळकू ..
भूमी भुम्याळ पुज्यौन्दा ..
हम सत्य सनातन युग से ही ..
पृथ्वी तैं कुल देबी बतौन्दा छा ..
हम हर रोज प्रकृति तैं पूजी
पर्यावरण बचौन्दा पर्यावरण बचौन्दा ..
जख स्वयं हिमालय अपरा हाथ्योंन .
औषधियों तैं लगौन्दा …
शिव अपरि जटा की जल धारा न .
संजीवनी त्ववा लगौन्दा …
तीन जुगों बटी सृष्टि बचै तैं ..
हम ही साख सरौन्दा
हम हर रोज प्रकृति तैं पूजी तैं ..
पर्यावरण बचौन्दा पर्यावरण बचौन्दा
जख भारत माँ का सभी पुत्रों मा
उत्तराखण्ड च ज्येष्ठ पुत्र ..
भारत माँ कु मणि मुकुट सजौन्दु ..
सभी भ्रातों मा श्रेष्ठ पुत्र ..
पंच प्रयाग अर बण बुग्याळ यख
विश्व शान्ति दरसौन्दा ..
हम हर रोज प्रकृति तैं पूजी ..
पर्यावरण बचौन्दा ..पर्यावरण बचौन्दा
उपासना पर्वत प्रिया

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