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कुमाऊंनी दंत काथ: एक पौंण एक जांठ

उदय दिनमान डेस्कः पुराण दिननैकि बात् भै कोंछा।यक् गों में यक् जमींदार भै वीकि द्वि च्याल भै। यक् चेलि भै चेलिक ब्या करि भै। चेलि आपण् सौरास् बटिक रिसै बेर आपणै म्यैते रौंणेर भै।

किसानाक् जमैं यक् दिन आपणि दुल्हैंणि कें बुलौंणैक लिजी पछा सांस पडिनि बख्त ऐ चुप चाप भतर यक् क्वाड में भैगै। नराज जस हई भै स्यात न वीलि के बात करि नें कैलि जांणि कि घर पौंण ऐरौ। घरवाल् आपण आपण काम में लागि भै।

उनार द्वि बल्द भै यक् नाम पौंण भै दुसारौक् नाम जांठ भै कौंछा। अब जो च्यल बण बै घर आयत् वीलि दुसार कें धात् लगै कौंछा, “”.हला सुण छे पौंण घर ऐ गो जांठ च्यै ला रात हुनारै जल्दी आ। “जमैं रिसांणि भो वीलि समझि आब् मैं कें मारनि स्यात् तबै कोंण लागि रई पौंण ए गो जांठ च्यै लाओ। ऊ कोंछा जमैं घर बटिक भाजत् ताल् गाडनाक् निसौणन कहीं लुकि गै।


घराक् सबै घर पुजि गै। रातौक् खाणें पीणें लै है गै। खाणि खाई बाद् यक् जांणि भ्यार् बै ऐ बेर आपण कुकुर कें धध्योंनारै देखिया देखिया देखिया। ऊ तौ कुकुर क् नाम ल्हीनारै जमैलि समझि मैंकें देखि हाल्यों। ऊ वां बटिलै भाजि पड। रातों रात आपण घर पुज।


जमैक् म्या बापुनि पुछ् बुला लाछे आपणि स्यांणि कें। वीलि कै कोंछा जसै उनार घर गयों उननि मैंके देखि बेर कै, “पौंण एगो जांठ च्या लाओ। जांन बचैबेर ताल् गाडनाक् निसौणन कहिं भै रैंछींत उननि देखिया देखिया आवाज लागै दे फिरि वां बै लै भाजण पडो़। बडि मुश्किललि जांन बचै बेर घर पुजि रयूं तम कौंनार छा दुल्हाणि बुला लाछे।”


जमैक् बाप् चुप चाप सुंणि भै। पछा वीलि कै उनार बल्दनाक् नाम् छ पौंण जांठ हौर कुकुरक् नाम भै देखि। ऊं आपण काम में लागि भई तू समझै मैं कें मांरनी। थ्वाड दिन बाद् जमै फिरि गै तब जैबेर दुल्हैंणि कें ल्यै।

दुर्गा दत्त जोशी

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