Home कविता पहाड़

…औ लाटा ऐजा तू…

जिकुडि खुदांई
त्वे बिना ससांई
 वौडा पछांण लगो,
पुश्ता पैरा सळयो
नै-नै उपज फसल उपजौ
      —— औ लाटा  ऐजा तू—–
अथाह धरती यख त्वे जागणी
बीज सीजणू माटा मगो
रोजगार की पौध डाल
हुण्त्यलू छंद यख पुर्यो।
      ——– औ लाटा  ऐजा तू —–
नाज का क्वन्का सिर्यो
साग अर भुज्जी लगो
टूटदि मकान्यूं चूं उगो
पाणी टूटी नैर सळयो।
       ——– औ लाटा  ऐजा तू —–
सूखदि यख फसल पण्यो
बगदू पाणी रोक लाटा
पुश्ता पैरा थामी धौर
अजकालु सळ्यो गौं का बाट्टा।
         ———औ लाटा  ऐजा तू ——–
माना त्वेमा डिग्री भौत
पढैलिखै कु फर्जंट तू
तकनीकी यख छ्वीं लगौं
बिजनेस कुछ यन खुलो।
            ——-औ लाटा  ऐजा तू ——–
बगत ऐगि जब त्वे कुछ कनै पडलू
पहाड़ तै नयु सृजन गढ़ण पडलू
धिकार्या पहाड़े तरफा कूल खटै
माधो सिंग जन बण्ण पडलू।
              ——-औ लाटा  ऐजा तू ——–
अश्विनी गौड़  दानकोट अगस्त्यमुनि रूद्रप्रयाग ।

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