Home कविता पहाड़

खडु उठाऽ— अग्वाडि बढ़ा

स्वरोजगार की राह मा
जळमभूमि कि छांव मा
पहाड़ों की खुचळि मा
रीति रिवाज निभौण चला
        खडु उठाऽ—- अग्वाडि बढ़ा
  
गढकुमौं का मान मा
उत्तराखंड सम्मान मा
गढभाषा स्वाभिमान मा
हिमाळै अभिमान मा
               खडु उठाऽ — अग्वाडि बढ़ा
हैरिभैरि सार मा
छैल पाखों धार मा
गौडी भैस्यूं गुठ्यार मा
द्यवतौं का मंडाण मा
           खडु उठाऽ —  अग्वाडि बढ़ा
घौर सुन्न पड़ी डंडयाळी मा
छज्जा की पठ्ठाली मा
सेरा रोपण्यूं सार मा
नौ नाजै की बार मा।
           खडु उठाऽ— अग्वाडि बढ़ा
घुघति का त्येवार मा
ईगास बग्वाळ मा
कोदे झंगोरे धांण मा
पहाड़ की पछांण मा।
             खडु उठाऽ —  अग्वाडि बढ़ा
ह्यूंद की लंबी रात मा
देवी द्यवतौं जात मा
भौज लैन भात मा
तिमला माळा पात मा।
               खडु उठाऽ —  अग्वाडि बढ़ा
पुरांणा दगड्यौं गैल मा
घुघती बसूति का खेल मा
उदस्यां मनै सास मा
दाना स्यांणौ की आश मा।
                खडु उठाऽ —-  अग्वाडि बढ़ा
बौंण पुंग्ण्यूं मोळयार मा
हैंसदा बुरांश धार मा

गौं मुलुक बर्यात मा
भेना-स्याळि का मजाक मा
मांगळों की भौंण मा
लौकदि कुयेडि सौंण मा।
                  खडु उठाऽ —-  अग्वाडि बढ़ा

अशोक जोशी, नारायबगड चमोली।

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