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शत्रु सैना मा त्राही मचोन्दा…

शत्रु सैना मा त्राही मचोन्दा ,
हर योद्धा हनुमन्त च यख..
वीर भड़ों से भर्यूं हिमालय ,
हर सैनिक जसवन्त च यख ।।
आर्यव्रत की सीमा पर ..
याद रौखी तू नजर गढ़े ना
यौ ड्येली-ड्येऴी मा भीम छन
एक कदम भी अग्वड़ी बढे़ ना।
नल नीलों से देश भर्यूं च ,
राम सेतु तैयार ह्वयां छन ..
तुमरा चर्यूं तितर्याल नी छां,
दृड़ अंगद आधार जन्यां छन।।
भारत मां का पुत्र भरत छन ,
शेरों का हम वरदहस्त छन ..
देश का खातिर मर मिटि जान्दा ,
सीमा पर हमरा वीर भगत छन।।
दलपीसु करी जब चीन वलों,
एक अकेलु सिंह छयो..
सन बासठ कु महाराणा छो ,
रणबांकरु जसवन्त सिंह छयो ।।
सतयुग द्वापर त्रेता से ही ,
युद्ध कला मा ज्येष्ट छां हम ..
धीर बीर गंभीर सेना च,
शस्त्र विद्या मा श्रेष्ठ छां हम ।।
उपासना पर्वत प्रिया

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