Home कविता दिल से

मि कनकै बिसरी जौं ?

मि कनकै बिसरी जौं ?

ते चौक अर वा डिन्डयाळि
जख सीखि मिन ग्वय्या लगाणूं,
ब्वे की खुचिली मा
कभी दणमण रौंणू,
त कभि खिलपत हैंसणु

वा चुली खांदी गवै द्येलि
दादी की कथा बातों की,
बाड़ी-कंडाली अर चेंसु- फ़ाणू,
कनि भली रस्याण रसिला हात की

घुघुति -बसूती अर बाळापन का दगड्या
लुका-छिपी, चोर-सिपै अर पिट्ठू-पंचगारा
काफल, बेडु, किनगोडा, हिसर
चैत-बैसाख का मैना, ग्यों जौं का भारा।

घुगति-घिंदुड़ी अर कफ्फु-हिलांस,
रूडी का कौथिग अर द्यबतों का थान
चौमासा का दिनों मा, डाँड़यों की गोठ,
खैरी का दिनों कि वा, तड़तडी उकाळ।

खाजा-बुखणा अर रोट- अरसा,
गौं खोलौं मा बेटी ब्वार्यों का पैंणा,
गाड़-गदरा अर ह्युंचुला डांडा,
घनघोर औंसी बाद, जुन्याली राता गैंणा,
मि कनकै बिसरी जौं ?

रविन्द्र रावत   नैनीडांडा पौडी।

Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail
Facebooktwitterlinkedinrssyoutube

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *