Home कविता दिल से

सोचणू छूं एक गीत लिखि द्यो

सोचणू छूं एक गीत लिखि द्यो
पहाड़ की खौर्यू पर
सुन्न पड्या ड्येर्यूं पर
बूड़ दादा दादी सांखी पर
तौंकी कमजोर ह्वोंदि आंखि पर
सोचणू छूं एक गीत लिखि द्यो
दादा का धुंवाण्यां ह्वक्का पर
अर दादी का क्वीला सजौंदा साज पर

सोचणू छूं एक गीत लिखि द्यो

ढोल दमौं की ताल पर
बीत्यां पुरांणा साल पर
द्यो-द्यवतौं शक्ति पर
आस्था विश्वास अर भक्ति पर

सोचणू छूं एक गीत लिखि द्यो

उंद जांदा बट्टों पर
जु बौडी उब नि ओंदु क्वे
टूटयां छोड्या घौर पर
जख अब नि रौंदू क्वे।

सोचणू छूं एक गीत लिखि द्यो

अजय शंकर राणा पालाकुराली

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