Home कविता पहाड़ मेरू उत्तराखंड

बदळ्दू जमानू:जब नौना रंदा छा हम छोटा – छोटा सि

जब नौना रंदा छा हम छोटा – छोटा सि,त नाक पर हमारा सिंगाणु रंदु छो,टाळा लगायां  पेंट पर और घौर्या नौं, ग्वांणु रंदु छो।
आजा छोरा बबली – बंटीजास्मिन, गुड़िया नौं धर्यां छिन।  कोंगळि उमर  पांच सालअर हाथ  तौंका फोन सज्यां छन।
बदळदा जमाना छोरो पर भीडिजिटल  ऐब ह्वयां छनसक्या – सामर्थ फुस्स पटाका,अर पडि-पडी म्वोळा जन मादेव ह्वयां छन।।
पिठ्ठू ,गुत्थी,लुका- खोजी बचपन मा कति खेल खेळदा छा।बांज लाछी क बैट बणौंदा छा, थय्गळा म्येटी ढिंढू बणै हम,दिन मा कै-दौ बौल बणौंदा छा।
अर आजा छौरा, भितरे  बेठ्या, लग्या दिनभर मोबैल गेम मा,कोदू झंगोरू चबै नी घुट्येणू,खांणो मा मैगी अर र्वोटि जैम मा।
मोळे – कंडी पुंगड्यूं डाळीस्कूल तलक हम कै रेस लगौंदा छाहाफटैम मा पेज फाड़ीकागज का हम जहाज बणौंदा छा।
हौळ – जौळ अर घौरा काम दडिहम स्कूलों मा भी अव्वल औंदा छा,मौ-मदद मा  काम निपटोणौयका-हक्के पडयाळ करदा छा।
पर आज सब भितर कैद ह्वयांदूर-दूर सभी ह्वोणा छिनहवा-पांणी दडि  लोग बदन्नाबस ऑनलाइन फ्रेंड जुडणा छिन।।
जे भी देखा सु औनलैन दिखेंणूमुख समणि मुख फरकौणाएक ही जगा पर अमणि-समणि परयका-हैका तै क्वे नी गनौणा।
बदन्ना लोग, बदन्नू समाजआजकला यख डिजिटल रिवाजबुलण बत्यण बै लाचार ह्वय्यां सबमाया पिरेम कखि नि रे आज।

नई चाल मा ढळी गैन सबिडिजिटल जमाना सबि तेज ह्वयांखपचांदि चौं का खपचांदा ढुंगाअपडि भाषा संस्कृति बिसरे अंग्रेज बण्यां।
   —#सचिन बजीरा जखोली रूद्रप्रयाग 

Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail
Facebooktwitterlinkedinrssyoutube

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *