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बेटी किले ना? जन विषय पर देखा लक्ष्मी कन लिखणीं च।

बेटी किले ना?                                जन विषय पर  देखा   लक्ष्मी कन              लिखणीं च।       कविता कैंतुरा दगडि लक्ष्मी भी पालाकुराली बटि चार सालों बै, बरौबर कलम चलौणी च अर मेरी गढभाषा कु पैलु प्रयोग भी यूँ द्वी […]

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अपड़ु बाळा पन त्याग करी जैन, पन्द्र बरस कि आयु मा।

तीलू रौंतेली—   अपड़ु बाळा पन    त्याग करी जैन,   पन्द्र बरस कि       आयु मा।    लाड़े लाड़ि      वीरोंखाळ         कि         प्यारी     तीलू रौंतेली ——  दुश्मनों तै, मारी जैंन   तब जे-तै अपणा भैयूं,           अर    बाबा जी कु, बदलो       पूरु करि त्वेन,   […]

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बदळ्दू जमानू:जब नौना रंदा छा हम छोटा – छोटा सि

जब नौना रंदा छा हम छोटा – छोटा सि,त नाक पर हमारा सिंगाणु रंदु छो,टाळा लगायां  पेंट पर और घौर्या नौं, ग्वांणु रंदु छो।आजा छोरा बबली – बंटीजास्मिन, गुड़िया नौं धर्यां छिन।  कोंगळि उमर  पांच सालअर हाथ  तौंका फोन सज्यां छन।बदळदा जमाना छोरो पर भीडिजिटल  ऐब ह्वयां छनसक्या – सामर्थ फुस्स पटाका,अर पडि-पडी म्वोळा जन मादेव ह्वयां छन।।पिठ्ठू ,गुत्थी,लुका- खोजी बचपन […]

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सिमरन :शारिरिक अस्वस्थ ह्वोण का बाद भी कलम किताब से भौत गैरी दगडि कर्दि

नौं -सिमरन पिताजी- वीर सिंह रावतमाताजी -सुनीता देवीगौं -रिंगेड, बैनोली जनपद रूद्रप्रयाग उमर-चौबीस बसंतपढै- हाइस्कूल अर अगने भी जारीसमाज तै रैबार – नशा मुक्त रा स्वस्थ रा।सिमरन एक यन बालिका जु शारिरिक अस्वस्थ  ह्वोण का बाद भी कलम किताब से भौत गैरी दगडि कर्दि।तमाम कोशिश कना बाद भी शरीर स्वास्थ्य मा खास सुधार नी च  सामान्य बच्चों चार […]

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नै छ्वाळि- नै प्रयोग

 ठेठ  नैनीडांडा पौडी गढवाल बटि—रविंद्र सिंह रावत@ रविन्द्र सिंह रावत चौबीस साल कु उळार्या ज्वान दगड्या—‘स्नातक गणित-विज्ञान दगडि, स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान कु छात्र, जु अबि बीएड की पढ़ै, पैठाणी पौडी गढवाल बटि कनू च। औपचारिक पढ़ै-लिखै दगडि अनौपचारिक रूप से सोशल साइट पर गढवाली भाषा-साहित्य तै, लोकधुनों तै, खूब फैलास द्यौणू च।    मूल नैनीडांडा पौडी […]

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उन्नीस सौ सैंतालिस का प्रभात का पर्व बटि आज द्वी हजार बीस

उन्नीस सौ सैंतालिस का प्रभात का पर्व बटि आज द्वी हजार बीस  अर अगने भी उमरभर सदानि यु देस यनि स्वतंत्र खुला बथौ मा, स्वतंत्र रौजणू पौजणू रोलू।    यी देश की माटी मा, गौं मुल्क, स्कूल, दफ्तर हर जगा कोणा-कोणों पंद्र अगस्त, स्वतंत्रत ह्वोण कु त्योहार खूब धूमधाम से मनाये जांदू। अंग्रेजुन बड़ी पिड़ा दीनी यी माटी […]

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‘ब्यो’- कंडाळि तै ब्यौ कि स्यांणि लगिन

–‘ब्यो’—-कंडाळि तै ब्यौ कि स्यांणि लगिनकंडाळि न बोलि मैन ब्यो कनइसकोस दगड़ि!समझ नि आई इसकोस तै!टोपलि उतारि खजाळिकनै मुंडमा,ब्योकु न्योतू द्योण बैठी सबुमा,छुंई लगणी पुंग्ण्यूं सार्यू मा,अमर्योत आई,  भट्टा ऐन,चचैंडा गोदड़ी भी।आलू पिंडाळु तैडुमौंण गाड़ी भैर,इसकोस भैजी की बुलाई मीटिंग मा,गोदड़ी ब्वनू किलै बुलाईहमुतै आज सारी मा,इसकोस ब्वन्नू भोल स्वयंबर चऐ जाया तुम सबि ब्यो […]

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दगड्यों: निर्भागी जमानु बि कनु गजब च

दगड्यों  निर्भागी जमानु बि कनु गजब च,नोना-नौनी सबुमा देखा, चाल ढाल सब अलग च। निर्भागी यनु जमानु क्या आईजु! लाज सरम कुछ नि राई  कंडुदी मा लीड़ तौंकीमोबैल धर्यूं  हात चदिन-भर फोन मा ब्यस्त,फेसबुक मा जान च। निर्भागी यनु जमानु क्या आईजु! लाज सरम कुछ नि राई। बाळू कटिंग छोरौं की,देखा कन करी च,जींस’पैंट देखा दूं, सफा फुन […]

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ओ पंछी बौड़ी औ, तिबारी-डंडयाळि

औ पंछी बौडी औ’ ओ पंछी बौड़ी औ, तिबारी-डंडयाळि सुन्न पड़यां छन,दै-दादा की रगर्यंदी आंखी,नाती – नतेणौं तै ख्वजण लगी छन। सोच!जरा अफसोस त्वै होलु!कर्ज चुकै नी! त्वीन बे – बाबा कु!पहाड़ी ह्णोंण पर त्वै शर्म च औंणीनौं डुबेलि  त्वीन दै – दादों कु। घौर बै लसपस्या घ्यूं छोड़ीडालडा मखन खांण लगयुं च,क्या लगी होली यन बिमारी,सब […]

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मि कनकै बिसरी जौं ?

मि कनकै बिसरी जौं ? ते चौक अर वा डिन्डयाळिजख सीखि मिन ग्वय्या लगाणूं,ब्वे की खुचिली माकभी दणमण रौंणू,त कभि खिलपत हैंसणु वा चुली खांदी गवै द्येलिदादी की कथा बातों की,बाड़ी-कंडाली अर चेंसु- फ़ाणू,कनि भली रस्याण रसिला हात की घुघुति -बसूती अर बाळापन का दगड्यालुका-छिपी, चोर-सिपै अर पिट्ठू-पंचगाराकाफल, बेडु, किनगोडा, हिसरचैत-बैसाख का मैना, ग्यों जौं […]