Home दिल से मेरू उत्तराखंड

आज का पहाड़: मेरी जन्मभूमि, मेरी मातृभाषा, मेरु पहाड़

अशोक जोशी,नारायबगड, चमोली: साथियों कुछ सालों से उत्तराखंड विषय का गहन अध्ययन कर रहा हूं, और जब भी पढ़ता हूं अपने पहाड़ों के विषय में, पढ़ता हूं जब अपने गढ़वाल कुमाऊं के त्योहारों, मेलों, मंदिरों, जनजातियों, घाटियों, बुग्यालो , वेशभूषाओं , मातृभाषाओं, लोकगीतों , लोकनृत्यों, धार्मिक यात्राओं, चोटियों, पहाड़ी फलों, खाद्यान्नों, रीति-रिवाजों के विषय में […]

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देखा गढभाषा मा नै छवाळि लिखणीं च

उदय दिनमान डेस्कः मन का भाव गंठयोंणी च, ईं कड़ी मा आज देखा मयाली (जखोली) बटि एक बालिका- ‘रिंकी काला’ की रचना—बालिका एमएससी सी की होनहार छात्रा च अर हिंदी बटि लिखण शुरु करीतै अब गढवाली भाषा की तरफ प्रेरित ह्वोणी च।“मेरू बचपन कु घर “तिबारी मा बैठयू छाे मेंसौचणूं छाे एक बात,का गैन हाेला […]