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लौकडौन ह्वय्यूं छूं भितर ग्वड्यूं छूं

लौकडौन ह्वय्यूं छूं भितर ग्वड्यूं छूं,औंणा दिन बै क्वारेंटाइन ह्वयूं छूं।हडग्यूं चचड़ाट, मुखडि मुज्जा पडयापौड़-पौड़ी भी कमर कुसेगी,दिन भर कै दौ गद्दा सुखौणूयका हौड़ बै, हका हौड़ तचौणू।कपडू ध्वे-ध्वे रंग उतिरिग्ये,मुखड़ि की चळक्वांस चलीग्ये।चौदह दिनों तक बंद ह्वयूं छूंऔंणा दिन बै क्वारेंटाइन ह्वयूं छूं। लत्ता-कपड़ा बैग ट्वपळाघौर जाणौ छिन उकतांणाकबारि-कबारि मैं तौं थप्थ्यौंणूंथप्थ्ये-थप्थ्ये चित्त बुझौणूनियम […]

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…औ लाटा ऐजा तू…

जिकुडि खुदांईत्वे बिना ससांई वौडा पछांण लगो,पुश्ता पैरा सळयोनै-नै उपज फसल उपजौ      —— औ लाटा  ऐजा तू—–अथाह धरती यख त्वे जागणीबीज सीजणू माटा मगोरोजगार की पौध डालहुण्त्यलू छंद यख पुर्यो।      ——– औ लाटा  ऐजा तू —–नाज का क्वन्का सिर्योसाग अर भुज्जी लगोटूटदि मकान्यूं चूं उगोपाणी टूटी नैर सळयो।       ——– औ लाटा  ऐजा तू —–सूखदि यख फसल […]

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कुमाऊंनी दंत काथ: एक पौंण एक जांठ

उदय दिनमान डेस्कः पुराण दिननैकि बात् भै कोंछा।यक् गों में यक् जमींदार भै वीकि द्वि च्याल भै। यक् चेलि भै चेलिक ब्या करि भै। चेलि आपण् सौरास् बटिक रिसै बेर आपणै म्यैते रौंणेर भै। किसानाक् जमैं यक् दिन आपणि दुल्हैंणि कें बुलौंणैक लिजी पछा सांस पडिनि बख्त ऐ चुप चाप भतर यक् क्वाड में भैगै। […]

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औ लाटा ऐजा

औ लाटा ऐजाकुछ नयु करि जा,जिकुडि खुदांईत्वे बिना ससांई—–औ लाटा ऐजा——साग भुजि उगोवौडा पछांण लगो,पुश्ता पैरा सळयोनै-नै उपज फसल उपजो।—— औ लाटा ऐजा —–अथाह धरती यख त्वे जागणीबीज सीजणूं माटा मगो,रोजगार की पौध डालहुण्त्यलू छंद यख पुर्यो।——– औ लाटा ऐजा —–नाज का क्वन्का सिर्योसाग अर भुज्जी लगो,टूटदि मकान्यूं चूं उगोपाणी टूटी नैर सळयो।——– औ लाटा […]

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मैं पहाड़ छौं ….

मैं पहाड़ छौं ….एक पूर्ण भागवत छौं ,साक्यूं से शाश्वत छौं,कै खड़यन्त्रों का बीच घिर्यूं ,फिर भी मि जड़वत छौं ,हौं मैं पहाड़ छौं ..उपासना सेमवाल उपासना पर्वत प्रिया

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तुलसी पुज्यन्दी जख घर मा पीपळ तैं सेवा लगौन्दा..

उपासना सेमवाल काव्य संहिता तुलसी पुज्यन्दी जख घर मा पीपळ तैं सेवा लगौन्दा.. बट सावत्री की ह्वोन्दी पूजाबट वृक्ष तैं अर्ग चढ़ौन्दाप्रकृति ह्वन्दी आराध्य देबी .विश्व तैं हम यु सिखौन्दा …हम हर रोज प्रकृति पूजी तैं ..पर्यावरण बचौन्दा …पर्यावरण बचौन्दा …पैली रोपणी मा पूजा लगदी जख ..बीज की मुट्ठ भी धुप्योन्दापैली अन्न कु लगदु हर्यळकू […]

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मिन भी लाइव औण

उदय दिनमान डेस्कः सब्बि धाणी देरादूण जैसे गीत के रचनाकार भाई वीरेन्द्र पंवार की कोरोनाकाल की ये रचना पोस्ट करने से खुद को रोक नहीं पा रहा। वीरेन्द्र पंवारजै दिन अंधेरी का यु काळा दिन चौळ जाला,जै दिन यु खुट्टौ का छाळा मौळ जाला,मिन भी लाइव औण—!जै दिन गफ्फा तक पौंछ जाली भूक,अर पाणी तक […]

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दगड्या पहाड़ पर गीत कविता लिखणा

उदय दिनमान डेस्कः पहाड़ अर पहाड़ का रैबासी पर गीत कविता लिखण आसान नी च पर अजय राणा जन नौजवान दगड्या पहाड़ पर गीत कविता लिखणा,ये से बड़ी बात क्या ह्वे सकदि कि नै छवाळि अपडि जलड्यों तरफ जुडदि जांणा छिन।भौत बढ़िया कविता गीत लिखणा छिन अजय राणा जी पालाकुराली बटि।तन त पालाकुराली की माटी […]

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अशोक जोशी स्नातक की पढै करदू एक ज्वान भुला

उदय दिनमान डेस्कः  अशोक गुरुकुल कांगडी हरिद्वार मा स्नातक कु छात्र च अर भौत ही लगनशील मैनती अर नेक सोच कु यु युवा गढवाली भाषा मा लिखण पढण की तरफ भी देखणू च।    अशोक तै मैं ब्यक्तिगत मिळयूं नी छूं, पर गढभाषा का परति तेकू पिरेम इथ्ग्या कि बेबाक मैसे गढवाली लिखणै अपडि कोसिस की […]