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अभी भी पांच हजार से अधिक नर कंकाल

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रुद्रप्रयाग । केदारनाथ की पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री शैलारानी रावत ने केदारघाटी के जंगलों में आज भी पांच हजार से अधिक मानव कंकाल पड़े होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद सरकार ने रेस्क्यू को लेकर बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन उसकी हकीकत आज जनता के सामने है। आपदा में मारे गए हजारों लोगों के शव आज तक उनके परिजनों को नहीं मिल पाए हैं और सरकार केदारनाथ में महोत्सव का आयोजन कर मनोरंजन कर रही है। आपदों पीडि़तों के साथ किया गया यह छलावा कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि आपदा के दौरान हुए रेस्क्यू में भारी चूक हुई है। उस दौरान विधायक के तौर पर उन्होंने त्रियुगीनायण से केदारनाथ समेत कई आस-पास के जंगलों में रेस्क्यू अभियान चलाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और अब आपदा के तीन साल बाद मानव कंकाल दिखाई दे रहे हंै। श्रीमती रावत ने कहा कि यदि आज भी इन जंगलों में रेस्क्यू किया जाय तो पांच हजार से भी अधिक मानव कंकाल बरामद हो सकते हैं। केदारनाथ की पूर्व विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत केदारनाथ में करोड़ों रूपए पानी की तरह बहाकर महोत्सव और भजन संध्याएं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात को लेकर कोई चिंता नहीं कि आपदा में मरे लोगों के शव उनके परिजनों को नसीब नहीं हुए हैं। कहा कि ऊखीमठ आपदा पीडितों को अभी तक एक-एक लाख रूपए सरकार नहीं दे पाई है और केदारनाथ में करोड़ों रूपये मनोरंजन पर उड़ाये जा रहे हैं।
श्रीमती रावत ने कहा कि 2013 की आपदा के बाद विजयनगर, चन्द्रापुरी समेत कई जगह ऐसे है, जहां पर मंदाकिनी नदी में स्थाई पुल बनने थे, लेकिन पुलों का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है। यदि सरकार डाक्यूमेंट्री बनाना चाहती है तो अपनी नाकामी की बनाए, ना कि चारधाम यात्रा के नाम पर राजनीति चमकाने के लिए। आपदा के बाद जहां अरबों रूपये केदारनाथ में खर्च किये गये, वहीं केदारघाटी में एक भी विकास कार्य न होने से जनता परेशान है। यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव सोनप्रयाग और गौरीकुंड की स्थिति आज भी जस की तस है। कहा कि कांग्रेस का साथ छोडऩे का यही कारण था कि मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी मनमर्जी कर रहे थे। केदारघाटी के विकास पर कोई ध्यान दिया जा रहा था। आपदा के दौरान स्थानीय ठेकेदारों ने पीआईयू के तहत कईं कार्य किये, उनका भुगतान नहीं किया गया है। ठेकेदारों के सामने रोजी रोटी का संकट बना हुआ है और सरकार को इससे कोई लेना-देना ही नहीं है। उन्होंने पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की जमकर तारिफ करते हुए कहा कि तत्कालीन बहुगुणा की सरकार में आपदा के कार्यों को लेकर शासनादेष जारी हुआ, उसके बाद कोई भी शासनादेश जारी नहीं हुआ है। सीएम रावत का ध्यान विकास कार्यों में नहीं, बल्कि बाहरी लोगों को फायदा पहुंचाने में लगा है। उन्होंने केदारनाथ में रावत का पुतला दहन किये जाने पर इसे देवभूमि की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया। कहा कि लंकापति रावण भगवान शिव के परम भक्त थे और उनकी धरती पर उनके भक्त का पुतला दहन किया जाना, शर्मनाक घटना है। रावत सरकार केदारघाटी की जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने मद्महेश्वर धाम में आपदा में मारे गये लोगों की याद में बनाये जा रहे स्मारक को तोडऩे की घटना को निंदनीय बताया। कहा कि रावत सरकार में विभागीय अधिकारी अपनी मनमर्जी करने में उतर आये हैं। आपदा में मृत लोगों के परिजनों की भावनाओं के साथ खेला जा रहा है। पूर्व विधायक श्रीमती रावत ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि सीएम रावत में दम है तो वे केदारनाथ सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं। केदारघाटी की जनता उनको चुनाव में ही सबक सिखाएगी। इस अवसर पर भाजपा जिला महामंत्री अजय सेमवाल, जिला मीडिया प्रभारी अमित रतूड़ी, भाजपा नेता विनोद कप्रवाण, अनूप सेमवाल मौजूद थे।

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