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 उजबेकिस्तान के राष्ट्रपति करिमोव का निधन

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लंदन। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति इस्लाम करीमोव के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। 78 वर्षीय करीमोव मस्तिकाघात के कारण पिछले शनिवार से अस्पताल में भर्ती थे जहां शु्क्रवार को उनका देहांत हो गया। एशिया के सबसे सत्तावादी नेताओं में से एक करीमोव ने उज्बेकिस्तान पर 27 साल तक शासन किया। उनका अंतिम संस्कार आज उनके गृह नगर समरकंद में किया जाएगा। रूसी प्रधानमंत्री दमित्री मेदवेदेव अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते हैं। पुतिन ने अपने शोक संदेश में कहा,Ó करीमोव का जाना उज्बेकिस्तान के लिये बहुत बड़ी क्षति है। वह देश के सच्चे नेता थे। उज्बेकिस्तान के इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उनके नेतृत्व में उज्बेकिस्तान ने मध्य एशिया में स्थिरता, शांतिपूर्वक विदेश नीति और विकास के लिये क्षेत्रीय सहयोग जैसे लक्ष्यों को प्राप्त किया।Ó राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जिन्होंने मध्य एशिया की स्थिरता में योगदान दिया। सरकारी टेलीविजन के प्रस्तोता ने बताया अत्यंत दुख के साथ हम आपके समक्ष हमारे प्रिय राष्ट्रपति के निधन की घोषणा करते हैं। अधिकारियों ने बताया कि करिमोव को स्थानीय समयानुसार रात आठ बजकर 55 मिनट पर मृत घोषित किया गया। कई दिनों तक अटकलें चली थीं कि अधिकारी उनके निधन की पुष्टि में देरी कर रहे हैं जबकि उन्हें सप्ताहांत को ही कथित रूप से आघात हुआ था। देश में तीन दिन के शोक की घोषणा की गयी है। उजबेकिस्तान सोवियत पश्चात काल में अब सबसे बड़ी अनिश्चितता के समय से गुजर रहा है। समर्थक प्रधानमंत्री शवकात मिर्जियोयेव अंतिम संस्कार से संबंधित समिति की अगुवाई कर रहे हैं जो इस बात का संकेत है कि वह दीर्घकाल में करिमोव का स्थान ले सकते हैं। वैसे आधिकारिक रूप से सीनेट प्रमुख निगमातुल्ल युल्दाशेव को चुनाव होने तक कार्यकारी राष्ट्रपति बनना चाहिए। करिमोव की छोटी बेटी लोला ने फेसबुक पर लिखा, वह हमें छोड़कर चले गए। मैं इसे बयां करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे, मैं अपने आप पर यकीन नहीं कर सकती। तीस जनवरी, 1938 में पैदा हुए करिमोव समरकंद में अनाथालय में पले बढ़े थे। उन्होंने मेकिनिकल इंजीनियरिंग और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और कम्युनिस्ट पार्टी में आगे बढ़े। वह 1989 से उज्बेकिस्तान पर शासन कर रहे थे। पहले वह कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख और 1991 में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति बने। मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर पश्चिमी देश उनकी आलोचना करते रहते थे। पूर्व सोवियत नेता मिखाइल गोर्वाचोव ने कहा कि करिमोव मजबूत चरित्र वाले सक्षम व्यक्ति थे। गोर्वाचोव ने ही 1989 में करिमोव को उजबेकिस्तान के इस पूर्व सोशलिस्ट रिपब्लिक की अगुवाई के लिए नियुक्त किया था।

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