udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news गैरसैंण को लेकर कांग्रेस-भाजपा में अब फिर से आपसी नूराकुश्ती शुरु

गैरसैंण को लेकर कांग्रेस-भाजपा में अब फिर से आपसी नूराकुश्ती शुरु

Spread the love

गैरसैंण के नाम पर छल रही भाजपा और कांगे्रस: निर्मला बिष्ट
p-6

देहरादून। उत्तराखंड महिला मंच संयोजक निर्मला बिष्ट का कहना कि विधानसभा सत्र के नाम पर गैरसैंण को लेकर कांग्रेस-भाजपा में अब फिर से आपसी नूराकुश्ती शुरु हो चुकी है। सच्चाई तो यही है कि प्रदेश सरकार और विपक्षी दल दोनों ही एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और कहीं न कहीं दोनों ने देहरादून को स्थायी राजधानी मन ही मन स्वीकार कर लिया है। बस प्रदेश की बहुसंख्य जनता जो गैरसंैण को अपनी स्थायी राजधानी मानती है, के विरोध के डर से वे इसे सार्वजनिक करने की हिम्मत नहीं करती हैं।

निर्मला बिष्ट ने कहा कि हालिया एक इंटव्र्यू में हरीश रावत ने कहा कि भाजपा गैरसैंण पर राजनीति कर रही है। उनके इस कथन पर कोई दो राय नहीं हो सकती। यह सच है कि भाजपा तो निश्चय ही राजनीति कर रही है परंतु पाँच साल सत्ता में रहने के बाद गैरसैंण को अफसरों-नेताओं की सैरगाह बनाने के लिए करोड़ों रुपया खर्च कर ,गैरसैंण मुद्दे पर अपनी राजनीति चमकाने के बाद अब मुख्यमंत्री हरीश रावत का यह कहना कि राजधानी के लिए दो विकल्प है गैरसैंण और देहरादून तथा जनता को ही तय करना है कि वह क्या चाहती है, क्या शर्मनाक व जनता का अपमान नहीं। पच्चीस वर्ष पूर्व ही कौशिक समिति ने उत्तराखंडी जनता किसे राजधनी चाहती है यह बता दिया था।

निर्मला बिष्ट ने कहा कि राज्य बना तो वर्षों तक दीक्षित आयोग की नौटंकी चलायी गई। फिर जब रिपोर्ट आ गई तो उसको भी फिर वर्षों तक ठंडे बस्ते में डालने की कारगुजारी दोनों ही पार्टियों की सरकारों ने की। यह रिपोर्ट दबाने के पीछे भी कारण यही था कि इस आयोग को भी इस बात को मानना ही पड़ा कि जनता का भारी बहुमत गैरसैंण को ही राजधानी के रूप में देखना चाहता है। क्या कौशिक आयोग रिपोर्ट व दीक्षित आयोग की रिपोर्ट में इन पार्टियों का कोई विश्वास नहीं है। इन्होंने इतने वर्षों तक इस आयोग के नाम पर करोड़ों रुपयों को क्यों बर्बाद किया। जनता तो स्पष्ट मत दे चुकी है। राज्य गठन के ठीक पूर्व गैरसैंण राजधानी के लिए 24 सितम्बर को महिला मंच द्वारा आहूत रैली जिसमें कांग्रेसी-भाजपाई नेता भी पहुँचे थे।

फिर 2 अक्टूबर 2000 को उत्तराखंड बंद करके भी जनता ने तो अपना पक्ष हमेशा ही गैरसैंण राजधानी के लिए स्पष्ट ही किया है। अलबत्ता दोनों पार्टियों की सरकारों के द्वारा जिस तरह की नीतियों को अपनाकर पहाड़ों को पलायन से खाली किया जाता रहा है, शायद उसी के बलबूते अब ये नेता और अफसर यह उम्मीद लगाऐ हैं कि देहरादून में ही राजधानी बनाकर इस सुंदर शहर को बर्बाद कर डालें और पहाड़ों को खाली कर सब कुछ पूँजीपतियों के हाथों में सौंप दें। जनता की इन्हें अगर परवाह होती तो वे ऐसा कभी न करते। गैरसैंण के प्रति पहाड़ की जनता की समवेदना व भावनाओं का मजाक उड़ाना प्रदेश सरकार को भारी पड़ेगा। जिस तरह विधानसभा सत्र के नाम पर जनता का करोड़ों-करोड़ रुपया पानी की तरह बहा कर प्रदेश की जनता को छला जा रहा है उसकी उत्तराखंड महिला मंच एवं स्वराज अभियान घोर निंदा करता है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.