udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news ‘चिपको आन्दोलन’ ने दुनिया को पर्यावरण संरक्षण की राह दिखाईः राज्यपाल

‘चिपको आन्दोलन’ ने दुनिया को पर्यावरण संरक्षण की राह दिखाईः राज्यपाल

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इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी में उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के लिए आयोजित संवेदीकरण कार्यक्रम में न्यायपालिका के सदस्य राज्यपाल के साथ में
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी में उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के लिए आयोजित संवेदीकरण कार्यक्रम में न्यायपालिका के सदस्य राज्यपाल के साथ में

-‘वन एवं पर्यावरण’ मुद्दे पर उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के लिए संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित

देहरादून। राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल ने कहा कि पूरी दुनिया में उत्तराखण्ड ही वह राज्य है जिसने अनोखे व सफल ‘चिपको आन्दोलन’ द्वारा देश और दुनिया को पर्यावरण संरक्षण की राह दिखाई और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरक संदेश देने की पहल की।

राज्यपाल ने आज बुद्धबार को इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी देहरादून में अकादमी द्वारा आयोजित ‘वन एवं पर्यावरण’ मुद्दे पर उच्च न्यायपालिका के सदस्यों हेतु संवेदीकरण कार्यक्रम का बतौर मुख्य अतिथि उद्घाटन किया। समसामयिक महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तराखण्ड की कामयाब पहल का आज और महत्व बढ़ गया है जिसे हमें कायम रखना है।
आई.जी.एन.एफ.ए द्वारा आयोजित सेमिनार को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और बेहतर प्रयास बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विकास और पर्यावरण के बीच प्रकृति के अनुरूप संतुलन बनाना नितान्त आवश्यक है। पर्यावरण एवं विकास की दृष्टि से ऐसे सेमिनार बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के दृष्टिगत पर्यावरण संरक्षण के लिए वातावरण में बढ़ते कार्बनडाई ऑक्साइड को एब्जार्व करने की ओर ध्यान केन्द्रित किये जाने तथा इसी अनुपात में ‘फोटो सिन्थेसिस प्रोसेस’ को तेजी से विकसित करना भी आवश्यक है। इसके लिए इस क्षेत्र में निरन्तर अनुसन्धान होने चाहिए। कार्बन ट्रेडिंग पर कई सटीक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में इसके फायदे कम, नुकसान ज्यादा दिखाई दे रहे हैं जिस पर सभी विकसित देशांे को पुनर्विचार करना होगा।
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से ‘वन अधिकार अधिनियम 2006’ को अत्यन्त महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि विशेष रूप से जन-जातियों(ट्राइब्स)को केन्द्र में रख कर बनाया गया यह एक्ट यदि सही तरीके से अमल में लाया गया तो यह बहुत उपयोगी सिद्ध होगा। इसी क्रम में उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों के कई उदाहरण भी प्रस्तुत किए।

उन्होंने पुनः कहा कि उत्तराखण्ड ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशीलता व जागरूकता को ‘चिपको आन्दोलन’ के माध्यम से पूरे विश्व को संदेश दिया है। राज्यपाल ने इस बात पर बल दिया कि वन-पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीणों तथा वन पंचायतों को वनों के और नजदीक लाना होगा। जिनकी जीविका सम्बन्धी आर्थिक गतिविधियाँ वनों पर आधारित होंगी, उनमें वनों के संरक्षण व संवर्धन के प्रति जिम्मेदारी का भाव स्वाभाविक रूप से आयेगा जैसा कि प्राचीनकाल से होता आया है।

इस सेमिनार में देशभर के हायर ज्यूडिसियरी के 15 से 20 वर्ष के अनुभवी 25 सदस्य प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर आई.जी.एन.एफ.ए के निदेशक डॉ0 शशि कुमार, अपर निदेशक डॉ0 मोहित गेरा द्वारा सेमिनार के उद्देश्यों, आई.जी.एन.एफ.ए के इतिहास व गतिविधियों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। कोर्स को-ऑर्डिनेटर डॉ0 पी.विश्वकन्नन ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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