udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news दून कम्युनिटी लिट्रेचर फैस्टिवल डीसीएलएफ 2017 के लिए प्रथम नाटकीय मंचन

दून कम्युनिटी लिट्रेचर फैस्टिवल डीसीएलएफ 2017 के लिए प्रथम नाटकीय मंचन

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देहरादून। राजपुर रोड स्थित डब्ल्यूआइसी इंडिया में दून कम्युनिटी लिट्रेचर फैस्टिवल डीसीएलएफ 2017 के लिए प्रथम नाटकीय मंचन का आयोजन किया गया। इसके अलावा शमसूर रहमान फारूकी द्वारा रचित द मिरर ऑपफ ब्यूटी पुस्तक की बुक रीडिंग कर उस पर चर्चा की गई। इसकी जानकारी डब्ल्यूआइसी इंडिया की प्रेजीडेंट नाजिया युसूफ इजुइद्दीन ने दी। शमसूर रहमान फारूकी भारतीय कवि व आधुनिक उर्दू के जाने माने आलोचकों और सिद्धांतकारों में से एक हैं। उन्होंने 1960 से लिखना प्रारंभ किया था, वह साहित्यिक पत्रिका शबखून के संपादक भी हैं, इसके अलावा पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में साउथ एशिया रिजनल स्टडीज सेन्टर में पार्ट टाइम प्रोफेसर भी थे। 1966 में उन्हें प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान देकर सम्मानित किया गया है। उर्दू साहित्य में योगदान के लिए “द मिरर ऑफ ब्यूटी अधिक प्रशंसनीय उपन्यास है।उनका कहना है कि इस पुस्तक की कहानी किशनगढ़ के पास एक गांव में एक रहस्यपूर्ण और प्रतिभाशाली चित्रकार के सौन्दर्य की कहानी है। पुस्तक मुगल साम्राज्य के सूर्यास्त पर आधारित है। इस पुस्तक की कहानी एक ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिाकारी की बेटी के आस-पास घूमती है। डब्ल्यूआइसी इंडिया की प्रेजीडेंट नाजिया युसूफ इजुइद्दीन ने बताया कि, 2016 में आयोजित लिट्रेचर पफैस्टिवल में उत्तराखंड सहित दिल्ली व अनेक राज्यों से देशभर के नामचीन साहित्यकार व पुस्तक प्रेमी एक मंच पर एकत्रित हुए थे, जिसमें कई स्कूल, कॉलेज व इंस्टीटयूट के छात्र-छात्रओं सहित 2500 लोगों से अधिक ने हिस्सा लिया था। डीसीएलएफ 2017 अपने दूसरे संस्करण में दूनवासियों को फिर विभिन्न क्षेत्रें के कवियों व लेखकों द्वारा अलग-अलग सत्रें में विभिन्न विषयों से रूबरू करवाएगा।उन्होंने द मिरर ऑपफ ब्यूटी पुस्तक के विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि, यह पुस्तक उन लोगों के लिए उपहार स्वरूप है, जिनका जीवन प्यार व आदर्श के साथ बीता है। इस पुस्तक के माध्यम से वह अपने जीवन की यादें ताजा कर सकते हैं। आसानी से बातों व भावनाओं को व्यक्त कर दिल तक पहुंचाने का कार्य इस कहानी ने बखूबी किया है।
उनका कहना है कि शमसूर ने इस पुस्तक के माध्यम से मरीचिका व सच्चाई को आकर्षक ढ़ंग से जोड़कर प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का संचालन जामिया मिलिया इस्लामिक युनिवर्सिटी नई दिल्ली के अंग्रजी साहित्य के प्रोफेसर डॉ. बरन पफारूकी द्वारा किया गया।

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