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नवरात्रि:इस बार नौ नहीं दस दिन की है

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kalimath
नवरात्रि, 18 साल बाद महासंयोगकलश स्थापना मुहूर्तनवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
01 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 20 मिनट से लेकर 07 बजकर 30 तक का समय कलश स्थापना के लिए विशेष शुभ है। नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है।

कलश स्थापना विधिधर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश के मुख में विष्णुजी का निवास, कंठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह्मा स्थित हैं और कलश के मध्य में दैवीय मातृशक्तियां निवास करती हैं।
पूजन सामग्री-1-जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र।
2-जौ बोने के लिए शुद्ध साफ की हुई मिटटी।
3-पात्र में बोने के लिए जौ।
4-कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल
5-मोली।6-इत्र।
7-साबुत सुपारी।
8-दूर्वा।
9-कलश में रखने के लिए कुछ सिक्के।
10-पंचरत्न।
11-अशोक या आम के 5 पत्ते।
12-कलश ढकने के लिए मिटट् का दीया।
13-ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल।
14-पानी वाला नारियल।15-नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपडा।

जौ बोना चाहिए कलश के चारों ओर गीली मिट्टी लगाकर उसमें जौ बोना चाहिए। जौ चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे न दबे। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब कलश के कंठ पर मोली बाँध दें तत्पश्चात कलश में शुद्ध जल, गंगाजल कंठ तक भर दें। कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें। कलश में थोडा सा इत्र दाल दें। कलश में पंचरत्न डालें। कलश में कुछ सिक्के डाल दें। कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें। अब कलश का मुख मिट्टी/स्टील की कटोरी से बंद कर देंऔर उस कटोरी में चावल भर दें।

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