udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news बर्फीली चुनौतियों को मात दे रही हैं आइटीबीपी की 35 हिम वीरांगनाएं

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उत्तरकाशी । समुद्रतल से 11614 फीट की ऊंचाई। भारत-चीन सीमा पर पसरे वीराने में धूसर पहाड़ जिंदगी से बेजार नजर आते हैं। नेलांग बार्डर पर हाड़ कंपा देने वाली हवा के बीच फौजी गतिविधियां ही जीवन का अहसास कराती हैं। उत्तरकाशी जिले में 70 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहली बार पहरा दे रहीं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की 35 हिम वीरांगनाओं को देख यह लगता ही नहीं कि इनमें से ज्यादातर ने ऐसी चुनौतियों का सामना पहले कभी नहीं किया।

कैंप के बाहर पहरे पर मुस्तैद खड़ीं कोडमा (झारखंड) की प्रेमलता कहती हैं कि ‘देश सेवा से बड़ा कोई जज्बा नहीं। फिर चाहे मौसम से लडऩा हो या दुश्मन से, जीत हमारी ही होगी।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर ट्रांस हिमालय में स्थित नेलांग घाटी में आइटीबीपी ने जून में पहली बार महिला कांस्टेबल को तैनाती दी। छह चौकियों में हिमवीरों के साथ सीमा की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहीं ये वीरांगनाएं पहली बार हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों से रू-ब-रू हो रही हैं। इन दिनों घाटी का तापमान दोपहर में 10 डिग्री सेल्सियस और रात में मानइस पांच डिग्री सेल्सियस है।
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आइटीबीपी के कमांडेंट केदार सिंह रावत कहते हैं कि ‘हमें इन वीरांगनाओं पर गर्व है। वे साहस और समर्पण के साथ दिन रात अपना कर्तव्य निभा रही हैं। नेलांग बॉर्डर पर तैनात प्रेमलता बताती हैं कि उनके पिता की कोलकाता में एक छोटी सी दुकान है और भाई दिव्यांग।

इंटर की पढ़ाई के दौरान उन्होंने टीवी पर सेना से जुड़ा एक कार्यक्रम देखा था। बस, तभी मन में ठान लिया कि सेना में जाकर देश सेवा करनी है। वर्ष 2011 में प्रेमलता आइटीबीपी में भर्ती हुईं और ट्रेङ्क्षनग के बाद जून 2016 में पहली पोस्टिंग नेलांग में मिली। वह बताती हैं कि परिवार से कभी कोई सेना में नहीं रहा, जिससे सेना के प्रति उनका आकर्षण और बढ़ गया।

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