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भगवान् तुंगनाथ की शीतकाल में मार्कण्डेय मंदिर मक्कूमठ में पूजा होगी

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भगवान् तुंगनाथ अपने भक्तों के लिए अपने धाम से डोली में पहाडी पर अपने भक्तों के द्वारा अवरोह करते हुए
भगवान् तुंगनाथ अपने भक्तों के लिए अपने धाम से डोली में पहाडी पर अपने भक्तों के द्वारा अवरोह करते हुए

तृतीय केदार भगवान् तुंगनाथ के कपाट आज सोमवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गये। भगवान् तुंगनाथ की शीतकाल में मार्कण्डेय मंदिर मक्कूमठ में पूजा होगी।

आज प्रात: 8 बजे से मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी ने भगवान की आरती की और इसके बाद मूर्ति को मंदिर परिसर में विराजमान किया गया।आज शुभ मुहूर्त पर प्रात: 10.30 बजे भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद किए गये।

भगवान तुंगनाथ की डोली मंदिर की परिक्रमा के बाद अपने शीतकालीन गद्दी स्थल के लिए प्रस्थान कर पहले पड़ाव पर चोपता पहुंची। विदित हो कि इस वर्ष 11 मई को तृतीय केदार के कपाट खुले थे। बता दें कि तृतीय केदार में भगवान आशुतोष के बाहु भाग की पूजा होती है।
आपदा के बाद इस वर्ष धाम में 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। शीतकालीन गद्दी स्थल में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थी।

तुंगनाथ के बारे में कुछ रोचक तथ्य एवं वहां का माहात्म्य
1* तुंगनाथ पंचकेदारों में तृतीय केदार है जहां शिव जी की भुजाओं की पूजा होती है ।
2* इसको सत्य तारा पर्वत पर स्थित कहा जाता है क्योंकि सप्त ऋषियों एवं तारागणों ने यहां पर शिव पार्वती का तप कर ऊंचाई पर रहने का वरदान प्राप्त किया था ।
3*यह पृथ्वी का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिवालय है जो समुद्र तल से 3750 मीटर है ।इससे भी ऊपर 1:50 किमी की ऊंचाई पर चन्द्र शिला चोटी है जहां पर श्री राम ने ब्रह्म हत्या से मुक्ति के लिए तप किया था । इतनी ऊंचाई पर होने पर भी यह पंच केदारों में सबसे सुगम है ।
4* इस स्थल के प्राकृतिक सौन्दर्य की प्रशंसा करते हुए विदेशी गणमान्य व्यक्तियों ने भी यहां तक कहा कि जिसने तुंगनाथ के दर्शन नहीं किये उसका जीवन व्यर्थ है । यहां से बद्रीनाथ , पंचचूली , सप्तचूली , बंदर पूंछ , हाथी पर्वत और केदारनाथ आदि अनेक हिमालयों के दर्शन होते हैं ।
5 * यहां बिना पूंछ वाले चूहे भी पाये जाते हैं जिन्हें रुंडा कहते हैं ।
6* यहां गुलाबी बुरांस के अतिरिक्त सफेद बुरांस भी पाया जाता है ।
7 * यहां तक ऊखीमठ से 28 किमी चोपता मोटर मार्ग से व वहां से 4 किमी पैदल चढाई चढकर पहुंचा जा सकता है ।
8* यहां का पता – तुंगनाथ , पत्रालय – चोपता , तहसील – ऊखीमठ , जिला – रुद्रप्रयाग , उत्तराखण्ड ।
9 * स्कन्द पुराण केदार खण्ड अध्याय 49 चौवालीस श्लोकों के अनुसार तुंगनाथ का संक्षिप्त माहात्म्य – महादेव पार्वती से कहते हैं –

हे देवि ! तुंगनाथ शिवालिंग में जल की प्रति बूंद व अक्षतादि के प्रति कण के पुण्य से सहस्र वर्षों तक शिवलोक में वास होता है । यहां के माहात्म्य वर्णन करने की किसी में शक्ति नहीं है । एक बार धर्मदत्त नामक वेदान्त का पारगामी ब्राह्मण था । उसका कर्मशर्मा नामका पुत्र था जो बचपन से ही कुमार्ग गामी हुआ व उसकी पुत्री भी अति सुन्दरी होने पर भी व्यभिचारिणियों की संगत से स्वयं भी वैसी ही हो गई ।

धर्मदत्त बुरा समय पाकर मृत्यु को प्राप्त हुआ । कर्मशर्मा ने अपने पिता की सारी धनसम्पति कुकर्मों में खर्च कर डाली । जब उसके बन्धु बान्धवों ने उसे त्याग दिया तो वह परदेश चला गया । उसकी बहन भी वेश्याओं के संग से स्वयं व्यभिचारिणी बनकर किसी के साथ चली गई । देशान्तर में उसका यह कुकर्म प्रसिद्ध हुआ और दैवयोग से कालान्तर में कर्मशर्मा भी उस नगर में गया जहां यह रहती थी ।
फिर दोनों अज्ञानावृत होकर पति पत्नी की तरह व्यभिचार में रत रहे । कुछ समय बाद कर्मशर्मा को अर्द्ध रात्रि में निर्जन वन में बाघ ने मार दिया ।

यमदूत पाश लेकर उसके प्राणों को लेने आये इतने में एक क्षुधा पिपासा से पीडित कौआ प्रसन्न होकर उसका मांस लेने पहुंचा । दैवयोग से कर्मशर्मा की हड्डी का टुकडा चोंच में लेकर वह तुंगनाथ क्षेत्र में पहुंच गया । उस अस्थि खण्ड के मांस को खाकर उस कौए ने वह टुकडा उसी तुंगक्षेत्र में छोड दिया । अब तो हमारे क्षेत्र में कर्मशर्मा की अस्थि गिरते ही वह निष्पाप हो गया और मेरे गण नन्दी , भृंगी आदि उसे लेने पहुंचे । फिर वे उसे यमदूतों से मुक्त कराकर और साथ लेकर कैलास धाम उपस्थित हुए । अनेक सहस्र वर्ष पर्यन्त मेरे निकट वास करके वह समय पाकर धर्मात्मा राजा हुआ । इस प्रकार अस्थि पतन मात्र से ही पापी मुक्त हुआ ।

जो मनुष्य एक बार भी तुंगक्षेत्र का दर्शन करता है फिर उसकी मृत्यु कहीं भी हो उसको अवश्य सद्गति प्राप्त होती है ।
फिर आकाशगंगा का माहात्म्य बता कर शंकर भगवान् पार्वती से कहते हैं –

तुंगनाथस्य माहात्म्यं य: पठेच्छृणुयादपि ।
स: सर्वेषु च तीर्थेषु गतो भवति पार्वति ।। स्क . पु. , केदार खंड , अध्या.50; श्लोक .16।। जो व्यक्ति तुंगनाथ के माहात्म्य को पढेगा अथवा श्रवण करेगा , हे पार्वति ! उसे समस्त तीर्थों की यात्रा करने का फल मिलेगा ।
(फोटो- ‘पंचकेदार’ के सम्पादक श्री Laxman Negi जी तुंगनाथ धाम से)

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