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मृतकों की याद में बने स्मारक को विभाग ने तोड़ा

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गेट निर्माण के चार माह बाद विभाग ने की कार्रवाई
-मृतक आश्रितों और जनप्रतिनिधियों ने की निंदा, गेट निर्माण की मांग

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ त्रासदी में मारे गये मदमहेश्वर घाटी के लोगों की याद में बने स्मारक गेट को वन विभाग ने तोड़ दिया है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम में बने इस द्वार को तोड़ने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है, तो राजनैतिक दलों ने इसे निंदनीय बताते हुए मृतकों का अपमान बताया है। वहीं इस मामले पर ना तो जिला प्रशासन कुछ कहने को तैयार है और ना ही वन प्रभाग केदारनाथ इस मामले में साफ तौर पर कह रहा है। ऐसे में जनता इस प्रकरण को वन विभाग की तानाशाही मान रही है।
दरअसल, वर्ष 2013 की आपदा में मदमहेश्वर घाटी के कईं लोग मारे गये थे, जिसमें गौण्डार गांव के शिव चरण सिंह पंवार के दो पुत्र भी शामिल थे। क्षेत्रीय जनता व मृतकों के आश्रितों ने मदमहेश्वर धाम के देवदर्शनी स्थल पर एक 16 फिट ऊंचा व छः फिट लंबा स्मारक के रुप में गेट तैयार करवाया और बकायदा वन विभाग को लिखकर दिया कि यह गेट मृतकों की याद में निर्मित करवाया जा रहा है तथा इस पर पूरी तरह से विभाग का अधिपत्य होगा व इस सम्पति पर ग्रामीणों का कोई अधिकार नहीं होगा। शरुुआती दौर में तो विभाग ने इस दिशा में कोई भी कार्यवाही नहीं की, लेकिन जब गेट बनकर तैयार हो गया और इस पर रंग रोगन भी हो गया तो विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने गेट को पूरी तरह से ध्वस्त कर गिरा दिया। जो कि अब सवालों के घेरे में आ गया है कि आखिर जव मिर्माण स्थल से महज सौ मीटर की दूरी पर विभाग की चौकी है तो क्यूं विभाग ने बनते समय ही निर्माण कार्य को नहीं रुकवाया और अब जब मृतकों की याद मे गेट तैयार हो गया है तो क्यों मृतकों के आश्रितों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गयी। इससे तो साफ है कि विभाग यहां पर कायदे कानूनों को लेकर ग्रामीण जनता को नाजायज रुप से परेशान कर रहा है और कानून के नाम पर ग्रामीणों को उनके पुस्तैनी हक-हकूकों से वंचित रखने का प्रयास कर रहा है।
केदारनाथ की पूर्व विधायक शैलारानी रावत, यूथ कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य सुमन्त तिवाडी, केदारघाटी सृजनशील जनमंच के अध्यक्ष कुलदीप रावत ने इसे निंदनीय बताते हुए इस कार्यवाही को मृतकों का अपमान बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी मांग की कि जन भावनाओं के अनुरुप गेट का निर्माण कार्य किया जाना आवश्यक है। कहा कि गेट का निर्माण फिर से करवाया जाय और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही अमल में लायी जाय। वहीं डीएफओ केदारनाथ ने इस मसले पर कहा कि सेन्चुरी एक्ट के तहत यह कार्यवाही की गयी है और अभी तृतीय केदार तुंनाथ में बना गेट भी तोड़ा जायेगा। वहीं जिलाधिकारी डॉ राघव लंगर ने बताया कि मामले को लेकर जांच की जा रही है और किन परिस्थियों में गेट का निर्माण हुआ और फिर क्यों तोड़ा गया इसकी जांच की जायेगी। बता दें कि केदारनाथ धाम में भी गौरीकुण्ड से रामबाड़ा तक सैंचुरी क्षेत्र पड़ता है और यहां पर भी करीब सात किमी के क्षेत्र में तमाम गेट व निर्माण कार्य होते रहते हैं। साथ ही दर्जनों हैलीकॉप्टर सेवाएं भी प्रतिदिन सैंचुरी क्षेत्र के ऊपर से उड़ती रहती हैं, जो कि पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। अब ऐसे में मदमहेश्वर धाम में विभाग द्वारा यह कार्यवाही किया जाना कियी के भी गले नहीं उतर रही है।
केदारनाथ त्रासदी में मारे गये मदमहेश्वर घाटी के लोगों की याद में बने स्मारक गेट को तोडने का मामला तूल पकड़ने लगा है। मामले को लेकर जहां मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेकर जिलाधिकारी को पूरी पड़ताल करने के आदेश दे दिये हैं, वहीं स्थानीय जिला पंचायत सदस्य ने गेट निर्माण न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है और जिला पंचायत अध्यक्ष सदस्य के सर्मथन में खड़ी हो गयी हैं। जिला पंचायत सदस्य संगीता नेगी ने चेतावनी दी कि जनभावनाओं के अनुरुप विभाग ने धाम में गेट का निर्माण नहीं किया तो वह आमरण अनशन शुरु कर देंगी। जिसका जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा ने सर्मथन किया है।
गेट निर्माणकर्ता और आपदा पीडि़त शिवानंद पंवार ने बताया कि विभाग कायदे कानूनों को लेकर ग्रामीण जनता को नाजायज रुप से परेशान कर रहा है और कानून के नाम पर उनके पुस्तैनी हक-हकूकों से वंचित रखने का प्रयास किया जा रहा है। तत्कालीन डीएफओ ने स्थानीय भावनाओं को देखते हुए गेट निर्माण के लिए मौखिक स्वीकृति भी दी थी, मगर 28 सितम्बर को वन प्रभाग ने सैंचुरी एक्ट का हवाला देते हुए करीब चारा महीने बाद गेट को तोड़ दिया। जिससे आम जनता में काफी आक्रोश बना है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग पीडि़त परिवारों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की बात कहकर डराने का प्रयास कर रहा है।

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