udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news यमुनोत्री में सुखदेव बिगाड़ सकते हैं प्रीतम-केदार के समीकरण

यमुनोत्री में सुखदेव बिगाड़ सकते हैं प्रीतम-केदार के समीकरण

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युवाओं का साथ, मिलनसार स्वभाव, और राजनैतिक पृष्ठभूमि है सुखदेव की ताकत

यमुनोत्री-
यमुनोत्री-

उत्तरकाशी । कांग्रेस ने 2017 विधानसभा चुनाव का चुनावी श्रीगणेश धर्मनगरी हरिद्वार से कर दिया था। हरीश रावत के चेहरे पर कांग्रेस मिशन-50 को लेकर चुनावी मैदान में कूदने की पूरी तैयारी कर चुकी है। इसके पहले चरण के तहत प्रदेश भर की 70 विधानसभा सीट से चुनाव लडने को इच्छुक दावेदारों ने ताल ठोकनी शुरू कर दी है। आलम ये है कि रोज नए दावेदारों के सामने आने से सींटिग विधायकों का समीकरण भी गडबडाने लगा है।

मैदानी विधानसभाओं के साथ ही पहाड़ी विधानसभाओं में भी इस बार सीटिंग विधायकों के सामने लोहे के चने चबाने जैसी स्थिती हो रखी है। विरोधी खेमे से ज्यादा उन्हें टिकट की दौड़ में शामिल अपनी ही पार्टी के नेताओं से कड़ी टक्कर मिल रही है। उत्तरकाशी जनपद की यमुनोत्री विधानसभा भी इस उठापटक से अछूती नहीं है। उत्तरकाशी जनपद के अंतर्गत आने वाली यमुनोत्री विधानसभा की गिनती वर्तमान दौर में पहाड़ की सबसे हॉट सीटों में हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है वर्तमान सरकार में पीडीएफ कोटे से शहरी विकास मंत्री सहित कई भारी भरकम मंत्रालयों का दायित्व संभाल रहे प्रीतम पंवार का इस सीट से विधायक होना।
साल 2012 में उत्तराखंड क्रांति दल के टिकट पर प्रीतम पंवार यहां से विधायक चुन कर आये। कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए प्रीतम की जरूरत थी। प्रीतम ने भी देर न करते हुए सरकार को समर्थन दिया। किस्मत के धनी प्रीतम कांग्रेस सरकार में शहरी विकास मंत्री बन गए। जनता को लगा कि अब यमुनोत्री में विकास की गंगा बहेगी। प्रीतम पंवार भी दावा करते हैं कि उन्होंने जनता से जो वादे किए थे वो सभी उन्होने पूरे कर दिए हैं। लेकिन बावजूद इसके इस बार यमुनोत्री से उनकी राह आसान नहीं है। प्रीतम पंवार विधायक बनने के बाद आपने क्षेत्र में कम ही चहल कदमी कर पाए। प्रीतम भले ही विकास के दावे कर रहे हों लेकिन यमुनोत्री की जनता जबाब मांग रही है कि आखिर विधायक ने अपने चहेतों को विधायक निधि देने के बाद क्षेत्र के लिए क्या किया। जो विकास के वादे किए थे वो कहां हैं।
दूसरा यमुनोत्री से पूर्व विधायक और पिछली बार चुनाव प्रीतम से चुनाव हारे केदार सिंह रावत वर्तमान में भी कांग्रेस से टिकट के मजबूत दावेदार हैं। केदार रावत के भाई चकबन्दी प्रणेता स्वर्गीय राजेंद्र सिंह रावत यमुनाघाटी ही नहीं बल्कि पूरे जिले में जाने माने नेता थे और केदार रावत ने उनके नाम का भरपूर फायदा उठाया और जनता ने उन्हें विधायक के रूप में स्वीकारा भी। लेकिन जनता के बीच संवाद कायम करने में केदार असफल रहे । विधायक बनने पर केदार ने यमुनाघाटी में उपस्थिति देना बंद कर दी या यूं कहें कि कम कर दी साथ ही केदार रावत के भतीजे और स्वर्गीय राजेंद्र सिंह रावत के पुत्र अरबिंद रावत भी निर्दलीय राजनीती में गहरी पैठ रखते है क्यों की इनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी रही हैं लेकिन अरबिंद का और केदार सिंह रावत का पारिवारीक मतभेद जग जाहिर है।

जिसका खामियाजा केदार को पिछले चुनाव में भुगतना पड़ा। इस बार केदार सिंह रावत की हरदा से दूरी और हरक से नजदीकी बहुत बड़ा फरक देने वाली है क्यों कि अभी तक हरदा ने केदार पर यमुनोत्री सीट पर हाथ नहीं रखा है। जिस आधार पर कैडर वोटो में असर पड़ सकता है।
इस विधान सभा की खासियत ये है कि गंगा और यमुनाघाटी की की जनता ही निर्धारण करती है कौन किस क्षेत्र का है। आशय यदी प्रत्यासी यमुनाघाटी से ज्यादा हों तो क्रॉस बोटिंग असर ज्यादा होता है । और यदि प्रत्यासी की पकड़ गांगा घाटी में ज्यादा हो तो उसकी जीत निश्चित होती है क्यों की छेत्रवाद की लहर यमुनोत्री सीट पर ज्यादा देखने को मिलती है ।
अब बात इस सीट से प्रीतम और केदार के समीकरण बिगाड़ रहे कांग्रेस के युवा तुर्क नेता सुखदेव रावत की। सुखदेव राज्य गठन के साथ ही समाजसेवा और राजनीति में सक्रिय हैं। प्रधान संगठन का अध्यक्ष और पूर्व में पंचायत प्रतिनिधी होने के नाते पंचायतों की राजनीति में सुखदेव रावत की मजबूत पकड़ है। जिसका लाभ कांग्रेस को पिछले चुनावों में मिलता रहा है। यमुनोत्री विधानसभा के वर्तमान समीकरण को देखते हुए सुखदेव रावत यहां से कांग्रेस के टिकट के मजबूत दावेदारों में से एक हैं। इसका सबसे बड़ा कारण पंचायत राजनीति के साथ ही युवाओं में सुखदेव की अन्य प्रत्याशियों के मुकाबले मजबूत पैठ। सुखदेव यमुनोत्री में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। और युवाओं को साथ लेकर पैदल गांव-गांव की पगडंडियों को नाप रहे हैं।

यमुनोत्री से दावेदारी कर रहे कांग्रेस के युवा तेज तर्रार नेता सुखदेव रावत भी मानते हैं कि गांव-गांव तक विकास का जो खाका खिंचना चाहिए था वो खिंच नहीं पाया। स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है, शिक्षा, बिजली, पानी के क्षेत्र में काम होना बाकी है। सीएम हरीश रावत ने यमुनोत्री विधानसभा के लिए बड़ी संख्या में घोषणाएं की पर विधायक जी उनको धरातल पर उतारने में नाकाम साबित रहे हैं। अगर पार्टी और जनता उन्हें मौका देती है तो वह यमुनोत्री को आदर्श विधानसभा बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगे।
हॉट सीट यमुनोत्री पर मुकाबला भी इस बार हॉट होनी की उम्मीद है। यमुनोत्री सीट से लड़ने वाले दावेदारों की एक लम्बी चोड़ी फौज सामने आ गई है। जो वर्तमान विधायक प्रीतम पंवार को खुली चुनौती दे रहे हैं। चर्चाएं गर्म हैं कि यमुनोत्री के माहौल को देखते हुए प्रीतम इस बार टिहरी विधानसभा की धनोल्टी विधानसभा से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। अब देखना होगा इस बार यमुनोत्री विधानसभा के चुनावी दंगल में कौन-कौन से रणबाकुंरे नजर आते हैं।

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