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रिक्त सीट को लेकर खलबली

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राजधानी से राजेंद्र भंडारी व नवप्रभात को मंत्री बनाए जाने की आ रही चर्चाओं ने पिरान कलियर विधायक हाजी फुरकान अहमद व भगवानपुर विधायक ममता राकेश खैमे में खलबली मचा दी है। दरअसल दोनों ही विधायक मंत्री पद के दावेदार हैं और इसके पीछे उनका पुख्ता आधार भी है। हाजी फुरकान अहमद कांग्रेस में अकेले इकलौते मुस्लिम विधायक है। जबकि ममता राकेश के पति सुरेंद्र राकेश के निधन के कारण ही एक मंत्री पद रिक्त चल रहा है। इसीलिए इस पद पर उनकी दावेदारी स्वाभाविक है। लेकिन नहीं लग रहा है कि हरिद्वार जनपद के इन दोनों विधायकों को रावत सरकार में मंत्री पद मिलेगा। हालांकि हरिद्वार जनपद से कोई विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री नहीं है। जैसा कि कांग्रेस गढ़वाल व कुमायूं क्षेत्र का सत्ता संतुलन बनाए जाने के साथ ही क्षत्रिय ब्राह्मण का संतुलन फीट कर रही है। ऐसे में हरिद्वार जनपद का कोई ना कोई विधायक मंत्री बनना जरूरी है। तभी पहाड़ व मैदान का क्षेत्रीय संतुलन सत्ता में बैठ सकेगा। पाली से चाहे हरिद्वार जनपद के कांग्रेस विधायकों की नाकामी माने या फिर प्रदेश कांग्रेस सरकार द्वारा मैदानी क्षेत्र के सत्ता में उपेक्षा कहें। लेकिन न तो हाजी फुरकान अहमद को मंत्री बनाए जाने पर विचार हुआ है और न ही ममता राकेश के बारे में इस ओर कुछ सोचा गया है।
प्रदेश सरकार में एक मंत्री बनाए जाने की अटकलें तभी से शुरु हो गई थी जब ममता राकेश उपचुनाव जीती। लेकिन तब कांग्रेस के हरिद्वार जनपद में चार विधायक थे और जिसमें खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की दावेदारी अन्य सब पर भारी पड़ रही थी। क्योंकि वह लगातार से तीन बार के विधायक थे । जिस कारण कांग्रेस हाईकमान भी उन्हें मंत्रिपद देने का इच्छुक था। लेकिन उस समय हाजी फुरकान ने इकलौता मुस्लिम विधायक होने पर मंत्री पद के लिए अड़े रहे। कांग्रेस हाईकमान को बहाना विधायकों में मंत्री पद को लेकर खींचतान होने का मिल गया। मार्च का राजनीतिक घटनाक्रम हुआ तो डा. हरक सिंह रावत मंत्री पद से हटाए गए। प्रदेश सरकार में एक की जगह दो मंत्री पद खाली हो गए तब ऐसी संभावनाएं प्रबल रूप से जताई जा रही थी कि जल्द ही मंत्री पद पर नियुक्ति हो जाएगी। जिसमें एक पर्वतीय क्षेत्र का दूसरा मैदानी क्षेत्र का विधायक मंत्री बनेगा। लेकिन पर्वतीय क्षेत्र के विधायकों ने प्रदेश व केंद्रीय कांग्रेस हाईकमान में अपनी मंत्री पद के लिए लामबंदी व पैरवी जारी रखी। लेकिन हरिद्वार जनपद के दोनों विधायक इस बार दौड़ करना भूल गए। वह मान बैठे की मुख्यमंत्री हरीश रावत वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की ²ष्टि से उन्हें खुद बुलाकर मंत्रीपद सौपेंगे, पर उन्हें कांग्रेस की आंतरिक सियासत का यह आभास कतई नहीं था कि यहां पर मंत्रिपद मिलना इतना आसान नहीं है जितना कि वह सोच बैठे हैं। कांग्रेस में तो भविष्य की राजनीति पर कम और वर्तमान सियासी समीकरण पर अधिक ध्यान पहले से ही रखा जाता है। विरोधी चाहे जो कहे और भगवानपुर विधायक ममता राकेश को उनके समर्थक चाहे जितनी बड़ी सियासतकार माने लेकिन यह काबिलियत तो दिवंगत नेता सुरेंद्र राकेश में ही थी। जिन्होंने तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों में कांग्रेस सरकार के गठन के दौरान मंत्री पद हासिल किया। उनके द्वारा मंत्री पद तब हासिल किया गया था जब कांग्रेस दिग्गज नेता हरीश रावत व उनकी टीम के सभी लोग सुरेंद्र राकेश के धुर विरोधी थे। उनके द्वारा सुरेंद्र राकेश को मंत्री बनाए जाने का हर स्तर पर विरोध किया गया था। अंत तक उन्हें मंत्री बनने से रोकने की कोशिश तक की गई थी, लेकिन वह मंत्री बने। सियासतकारों का कहना है कि हरिद्वार जनपद में या तो मदन कौशिक के पास वह राजनीतिक हुनर है जिसके जरिए वह है सियासी मुकाम हासिल कर सकते हैं। दूसरे सुरेंद्र राकेश एक ऐसे नेता रहे। जिन्होंने तमाम विपरीत परिस्थितियों में सियासी मुकाम हासिल किया और आगे बढऩे का हौसला भी उनमें मरते दम तक बना रहा। ममता राकेश तो अपने दिवंगत पति सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद खाली हुआ मंत्रिपद प्राप्त करने के लिए प्रभावी आवाज भी नहीं उठा पा रही हैं।

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