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विधानसभा चुनाव का शोर,घोषणाओं की झड़ी के बीच चुनाव पर निशाना

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देहरादून। विधानसभा चुनाव का शोर मचना शुरू हो चुका है। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से घोषणाओं की झडि़यां लगाई जा रही हैं। हालांकि इससे पहले हजारों ऐसी घोषणाएं शासन स्तर पर लंबित पड़ी हैं, जिन्हें कि जरूरी बताते हुए पूर्व में मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा समय-समय पर बखान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा हालिया समय किए जा रहे घोषणाओं पर भाजपा ने हमलावर रूख अख्तियार किया हुआ है। विशेषकर कांगे्रस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और वरिष्ठ नेता डा$ हरक सिंह रावत हमले की कमान अपने हाथों में लिए दिख रहे हैं।

गैरसैंण में मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय खोले जाने की कांगे्रस की घोषणा पर भाजपा नेताओं ने उलटवार की तैयारी शुरू कर दी है। भाजपाई गलियारों में गैरसैंण में मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय खोले जाने को चुनावी स्टंट बताने की चर्चाएं चलने लगी हैं। हालिया समय सूबे के मुखिया प्रदेश विकास के लिए जरूरी मानते हुए घोषणा किए जा रहे हंै।

सरकार के इस फैसले ने भाजपा को हमलावर रूख अपनाने का मौका भी दे दिया है। उल्लेखनीय रहे कि गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने के लिए आंदोलनकारी मंच और क्षेत्रीय दल हमेशा ही राज्य सरकार पर हमलावर रूख अपनाते रहे हैं। कांगे्रस-भाजपा किसी दल की भी सरकार हो, सत्ताधारी दल पर हमेशा ही गैरसैंण की उपेक्षा करने का आरोप लगता रहा है। मौजूदा सरकार ने भले ही गैरसैंण को तवज्जो देते हुए विधानसभा सत्र का आयोजन करवाया हो, और फिलहाल वहां सीएम कैंप कार्यालय बनाने का भी एलान कर दिया हो। मगर विपक्षी हमेशा ही आरोप लगाते रहे हैं कि कांगे्रस सरकार स्थाई राजधानी मुद्दे के समाधान के लिए कभी आगे आते नहीं दिखी है। मौजूदा समय कांगे्रसी खेमे में भी गैरसैंण को लेकर अलग-अलग सुर में राग अलापते देखा जा रहा है।

उल्लेखनीय रहे कि गैरसैंण में विधानभवन निर्माण के लिए बहुगुणा कार्यकाल में कांगे्रस सरकार ने हरी झंडी दिखाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने धूमधाम के साथ आयोजित समारोह में गैरसैंण विधानसभा भवन के निर्माण कार्य का शिलान्यास रखा था। कांगे्रस पार्टी में उस समय हरीश-विजय की आपसी खटास चरम पर पहुंची हुई थी। हरीश रावत शिलान्यास कार्यक्रम में नहीं पहुंचे थे, जिसके की अलग-अलग सियासी मायने भी निकाले जाने लगे थे। हालांकि हरीश खेमे का आरोप था कि उन्हें निमंत्रण नहीं दिया गया था। मौजूदा परिस्थितियों में जिस तरह भाजपा नेता हरीश सरकार के खिलाफ हमलावर रूख अपनाए हुए हैं, उससे कांगे्रस में बैचेनी महसूस किया जाना लाजिमी भी है। हालांकि पर्यटन और साल 2013 के बाद से लगातार चारधाम यात्रा में श्रद्घालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा, वह कांगे्रस सरकार की खास उपलब्धियों में जोड़ा जा सकता है।
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