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सचमुच रणजीत रावत ने पुण्य का काम किया

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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इंडियन यंग साइंसटिस्ट को दिए 5 लाख..!

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(मनोज इष्टवाल)
कुछ कार्य ऐसे जरुर होते हैं जो किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व कि निखार देते हैं. जबकि सत्ता पक्ष के हर व्यक्ति पर अंगुली उठती ही रहती है. प्रदेश के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत द्वारा हाल ही में एक ऐसा कार्य किया गया जिसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है क्योंकि उन्हीं की बदौलत प्रदेश का एक विद्यार्थी वैज्ञानिक बन पाया है और वह भी अनूठा बैज्ञानिक..! जिस युग में हम हैं उसे मशीन युग कहें मोबाइल युग कहें या फिर तरह तरह के अविष्कारों से जुड़ा ऐसा युग जो बारूद के ढेर पर है.
चमोली गढ़वाल के साधारण परिवार में जन्मा प्रतिभावान छात्र अभिलाष सेमवाल जब इंजिनीयरिंग की पढ़ाई करने देहरादून पहुंचा और उसने अपने सपनों को साकार करने के लिए अनूठे प्रयोग करने शुरू किये तब सब हतप्रभ रह गए. अभिलाष ने एक ऐसा अनूठा प्रयोग कर दिखाया जिसने उन्हें प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया टीम में शामिल कर दिया. बीटेक के इस छात्र ने मथोलोजी ऑफ़ बम डिटेक्टर चिप एक्टिवेशन के नाम से एक ऐसी चिप विकसित की जो मोबाइल बम का मोबाइल के ईएमआई नम्बर से पता कर लेगी और उसे फटने से पहले ही नाकाम कर देगी.
अभिलाष इस तकनीक को विकसित करने वालों में पांचवां ऐसा छात्र रहा है. उनकी इस तकनीक का इस्तेमाल आईआईटी खडकपुर कर रहा है.
अभिलाष सेमवाल ने बताया कि ग्राफिक एरा हिल युनिवेर्सिटी देहरादून से उन्हें इंडियन यंग साइंटिस्ट के रूप में इंटरप्रेंयूरशिप के लिए आईआईटी खडकपुर भेजा गया. जहाँ ग्लोबल इंटरप्रेंयूरशिप समिट में उन्होंने अपनी भागीदारी निभाई. और यहीं उन्होंने मोबाइल बम लोकेटर एंड डिटेक्टर पर अपनी परफोर्मेंश दी.
अभिलाष एक ऐसा रोबोट भी तैयार कर चुके हैं जो मिटटी के नीचे लगभग 10 फिट तक दबे इंसान को ढूंढ सकता है. वे कहते हैं अक्सर भूकंप या आपदा में ऐसी घटनाएं प्राय: हो जाया करती हैं या फिर कोई भी आतंकी मिटटी के नीचे घात लगाकर आक्रमण कर सकता है. यह रोबोट न सिर्फ उसकी सूचना देगा बल्कि उसे बाहर भी निकाल देगा.
पूर्व में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने इन्हें गुजरात बुलावा भेजा था यही नहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी इन्हें बुला चुके हैं. प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा इन्हें लगातार प्रयोग करते रहने के लिए पूर्व में 5 लाख की राशि दी जा चुकी है और आगे भी उन्हें आश्वासन दिया है कि प्रदेश सरकार कभी पीछे नहीं हटेगी.
वहीँ अभिलाष सेमवाल प्रदेश के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत का गुणगान करते नहीं थकते. वे कहते हैं कि मुझे ऐसा शख्स जिंदगी में पहली बार मिला जिन्होंने न मेरे लिए लाखों रुपये रातों रात जुटाए बल्कि मेरा जहाज का टिकट तक करवाया. वरना मेरा सारा कैरियर चौपट हो जाता. भला मैं रणजीत रावत जैसे व्यक्ति को जिंदगी में कैसे भूल सकता हूँ. अभिलाष बताते हैं कि उन्होंने रणजीत रावत के लाखों रुपये की सहायता से ही दो डिवाइस सफलता पूर्वक बनाई और उसे पेटेंट भी करवाया. उन्हें दक्षिण अफ्रीका के ग्लोबल समिट में इस कार्य के लिए विश्व भर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ.
मुझे लगता है पहाड़ के इस बेटे पर हमें जितना नाज है उस से भी कई अधिक उस पहाड़ी पर होना चाहिए जिसने अभिलाष की काबिलियत को तोला नहीं बल्कि क्रियान्वयन करने के लिए बेहिचक 5 से 7 लाख रुपये दे दिए. रणजीत रावत आपको सलूट..!

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी दिए 5 लाख..!
(मनोज इष्टवाल)
कुछ कार्य ऐसे जरुर होते हैं जो किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व कि निखार देते हैं. जबकि सत्ता पक्ष के हर व्यक्ति पर अंगुली उठती ही रहती है. प्रदेश के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत द्वारा हाल ही में एक ऐसा कार्य किया गया जिसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है क्योंकि उन्हीं की बदौलत प्रदेश का एक विद्यार्थी वैज्ञानिक बन पाया है और वह भी अनूठा बैज्ञानिक..! जिस युग में हम हैं उसे मशीन युग कहें मोबाइल युग कहें या फिर तरह तरह के अविष्कारों से जुड़ा ऐसा युग जो बारूद के ढेर पर है.
चमोली गढ़वाल के साधारण परिवार में जन्मा प्रतिभावान छात्र अभिलाष सेमवाल जब इंजिनीयरिंग की पढ़ाई करने देहरादून पहुंचा और उसने अपने सपनों को साकार करने के लिए अनूठे प्रयोग करने शुरू किये तब सब हतप्रभ रह गए. अभिलाष ने एक ऐसा अनूठा प्रयोग कर दिखाया जिसने उन्हें प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया टीम में शामिल कर दिया. बीटेक के इस छात्र ने मथोलोजी ऑफ़ बम डिटेक्टर चिप एक्टिवेशन के नाम से एक ऐसी चिप विकसित की जो मोबाइल बम का मोबाइल के ईएमआई नम्बर से पता कर लेगी और उसे फटने से पहले ही नाकाम कर देगी.
अभिलाष इस तकनीक को विकसित करने वालों में पांचवां ऐसा छात्र रहा है. उनकी इस तकनीक का इस्तेमाल आईआईटी खडकपुर कर रहा है.
अभिलाष सेमवाल ने बताया कि ग्राफिक एरा हिल युनिवेर्सिटी देहरादून से उन्हें इंडियन यंग साइंटिस्ट के रूप में इंटरप्रेंयूरशिप के लिए आईआईटी खडकपुर भेजा गया. जहाँ ग्लोबल इंटरप्रेंयूरशिप समिट में उन्होंने अपनी भागीदारी निभाई. और यहीं उन्होंने मोबाइल बम लोकेटर एंड डिटेक्टर पर अपनी परफोर्मेंश दी.
अभिलाष एक ऐसा रोबोट भी तैयार कर चुके हैं जो मिटटी के नीचे लगभग 10 फिट तक दबे इंसान को ढूंढ सकता है. वे कहते हैं अक्सर भूकंप या आपदा में ऐसी घटनाएं प्राय: हो जाया करती हैं या फिर कोई भी आतंकी मिटटी के नीचे घात लगाकर आक्रमण कर सकता है. यह रोबोट न सिर्फ उसकी सूचना देगा बल्कि उसे बाहर भी निकाल देगा.
पूर्व में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने इन्हें गुजरात बुलावा भेजा था यही नहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी इन्हें बुला चुके हैं. प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा इन्हें लगातार प्रयोग करते रहने के लिए पूर्व में 5 लाख की राशि दी जा चुकी है और आगे भी उन्हें आश्वासन दिया है कि प्रदेश सरकार कभी पीछे नहीं हटेगी.
वहीँ अभिलाष सेमवाल प्रदेश के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत का गुणगान करते नहीं थकते. वे कहते हैं कि मुझे ऐसा शख्स जिंदगी में पहली बार मिला जिन्होंने न मेरे लिए लाखों रुपये रातों रात जुटाए बल्कि मेरा जहाज का टिकट तक करवाया. वरना मेरा सारा कैरियर चौपट हो जाता. भला मैं रणजीत रावत जैसे व्यक्ति को जिंदगी में कैसे भूल सकता हूँ. अभिलाष बताते हैं कि उन्होंने रणजीत रावत के लाखों रुपये की सहायता से ही दो डिवाइस सफलता पूर्वक बनाई और उसे पेटेंट भी करवाया. उन्हें दक्षिण अफ्रीका के ग्लोबल समिट में इस कार्य के लिए विश्व भर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ.
मुझे लगता है पहाड़ के इस बेटे पर हमें जितना नाज है उस से भी कई अधिक उस पहाड़ी पर होना चाहिए जिसने अभिलाष की काबिलियत को तोला नहीं बल्कि क्रियान्वयन करने के लिए बेहिचक 5 से 7 लाख रुपये दे दिए. रणजीत रावत आपको सलूट..!

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