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सपा में कलह

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ समाजवादी पार्टी की कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। इस पार्टी और मुलायम परिवार के विवाद रविवार को उस समय चरम पर पहुंचता नजर आया, जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव समेत चार मंत्रियों को कैबिनेट से बर्खाश्त कर दिया, जिसकी प्रतिक्रिया में अखिलेश का पक्ष ले रहे सपा के महासचिव प्रो. रामगोपाल पर गाज गिरी, जिसे मुलायम सिंह ने पार्टी से निकाल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने इस पूरे मामले को लेकर आज सोमवार को प्रदेश भर के पार्टी के पदाधिकारियों तथा वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है।
यूपी के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में रविवार को दिन बड़े घटनाक्रम के नाम रहा। जहां एक तरफ अखिलेश ने अपने चाचा समेत चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से निकाल दिया, वहीं कार्यकर्ताओं को अखिलेश के समर्थन में पत्र लिखने वाले पार्टी महासचिव को भी दोपहर बाद पार्टी से निकाल दिया गया। पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने सपा कार्यकर्ताओं के नाम पर एक चि_ी लिखी थी जिसमें कहा गया था, कि अखिलेश का विरोध करने वाले विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे, जहां अखिलेश वहां विजय। रथयात्रा विरोधियों के गले की फांस है। इस फांस को और तेज करने की जरूरत है।
इससे पहले मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाने के बाद शिवपाल सिंह यादव पार्टी कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने मीडिया से बात करते हुए राम गोपाल का नाम लिए बिना कहा कि सीबीआई के डर से वह सपा को कमजोर करने का षडय़ंत्र रच रहे हैं। राम गोपाल पर भाजपा से मिले होने का भी आरोप लगाया। शिवपाल ने कहा कि नेता जी (मुलायम सिंह यादव ) के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा और सरकार बनाएंगे। जब शिवपाल बोल रहे थे तो वहां भारी हंगामा शुरू हो गया जिसके बाद वो ठीक से कुछ बात नहीं कर पाए।
मुलायम पर अखिलेश को बर्खास्त करने का दबाव
इतना बड़ा कदम उठाए जाने के बाद परिवार की फूट सामने आ गई है। अब तक बेटे और भाई के बीच सामंजस्य बनाने की कोशिश कर चल रहे मुलायम सिंह यादव पर अब सबकी नजर है। कहा जा रहा है कि नेताजी पर अब दबाव है कि वो अपने बेटे को मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त करें। हालांकि यह फैसला इतना आसान नहीं होगा क्योंकि बड़ी संख्या में विधायक अखिलेश के समर्थन में हैं। बर्खास्तगी का यह फैसला अखिलेश यादव द्वारा रविवार को बुलाई गई बैठक के बाद लिया गया। बैठक के बाद राज्यपाल को मंत्रियों की बर्खास्तगी की सूचना दी गई है। जो मंत्री बर्खास्त हुए हैं उनमें शिवपाल यादव के अलावा शादाब फातिमा, मंत्री नारद राय, मंत्री ओमप्रकाश और गायत्री प्रजापति शामिल हैं। इन सब के अलावा सूचना है कि अमर सिंह की समर्थक रहीं जया प्रदा को भी फिल्म विकास परिषद से हटाने का फैसला लिया गया है।
अमर सिंह के समर्थको पर अखिलेश की गाज
अपने इस फैसले के बाद अखिलेश यादव ने पार्टी की टूट को लेकर साफ कहा कि मेरा पार्टी तोडऩे का कोई इरादा नहीं है। मुलायम सिंह मेरे नेता होने के साथ ही मेरे पिता भी हैं और मैं उनसे अलग नहीं हो सकता। मैं उनका उत्तराधिकारी हूं। अखिलेश ने सीधे तौर पर अमर सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि सारी आग अमर सिंह ने लगाई है। उनके सभी समर्थकों के खिलाफ कार्रवई होगी। सूत्रों के अनुसार अखिलेश ने अमर सिंह को दलाल भी कहा।
शिवपाल को नहीं बुलाया
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को होने वाली विधायकों की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष व विधायक शिवपाल यादव समेत तकरीबन तीन दर्जन विधायकों व कई मंत्रियों को आमंत्रित नहीं किया है। जिन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है, उन्हें शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है। बैठक में नहीं जाने पर शिवपाल ने कहा कि उन्हें बुलाया नहीं गया और इसके चलते वो शामिल नहीं हो रहे हैं।
यहां से बढ़ा ताजा विवाद
परिवार में चल रहे महासंग्राम के दौर में समाजवादी पार्टी ने पांच नवंबर को पार्टी का रजत जयंती समारोह मनाने का फैसला लिया था और इसके लिए सपा मुखिया मुलायम सिंह ने 24 अक्टूबर को विधायकों, सांसदों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसद, प्रत्याशियों समेत आठ सौ लोगों की बैठक बुलाने का फैसला लिया था। लेकिन इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने तीन नवंबर से विकास से विजय की ओर समाजवादी यात्रा का ऐलान कर दिया। फिर 23 अक्टबूर को विधान मंडल के दोनों सदनों के अधिकतर सदस्यों को आमंत्रित किया है। सपा में चल रहे इस महासंग्राम को लेकर भाजपा नेता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि अखिलेश जी आप बहुत पहले एक्सपोज हो चुके हैं। यह नाटक अब और नही चलेगा।
भाजपा से हाथ मिलाने का आरोप
कैबिनेट से बर्खास्त किए गए शिवपाल यादव ने सीधे तौर पर रामगोपाल यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि सीबीआई से बचने के लिए रामगोपाल ने बीजेपी से हाथ मिलाया है। मुख्यमंत्री द्वारा हुई अपनी बर्खास्तगी पर शिवपाल ने कहा कि बर्खास्तगी की चिंता नहीं है, हम चुनाव में जाएंगे। पिछला चुनाव नेताजी के नाम पर लड़ा था, इस बार भी उनके नेतृत्व में चुनाव में जाएंगे और जीतेंगे।
मंत्रियों को हटाना सीएम का अधिकार: आजम
शिवपाल की बर्खास्तगी को कैबिनेट मंत्री आजम खां ने मुख्यमंत्री का अधिकार बताते हुए कहा है कि यह उनका अधिकार है वह किसे रखेंगे और किसे नहीं उनकी पसंद और नपसंदगी का सवाल नहीं है। पार्टी में कलह की वजह अमर सिंह को बिना उनका नाम लिए बताया कि ऐसा दुखद दिन एक दिन जरूर आएगा, मैंने यह हमेशा महसूस किया है। समझदार और पार्टी के दूरदर्शी लोगों को भी इसका एहसास था।
अखिलेश बना सकते हैं नई पाटी
समाजवादी पार्टी में सुलह की नाकाम होती कोशिशों के बीच खबर आई है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी अलग पार्टी बनाने पर विचार कर सकते हैं। अखिलेश खेमे के सूत्रों ने दावा किया है अखिलेश सपा से बाहर जाने और नई पार्टी बनाने के बारे में सोच सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक अखिलेश के सपोर्टर और पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव हाल ही में दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिले थे, जिसके बाद से अलग पार्टी को लेकर अटकलें शुरू हुई हैं। अखिलेश की नई पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई हैं। माना जा रहा कि इस संगठन का नाम प्रोग्रेसिव समाजवादी पार्टी जबकि चुनाव चिन्ह मोटरसाइकल हो सकता है।

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