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 सेना के गुप्त द्वार!

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वैसे तो प्राइवेट कंपनियों को सेना के साजो-सामान बनाने के लिए अब तक बहुत जरूरी और कम-से-कम जानकारियां दी जाती रही हैं, लेकिन इस महीने की शुरुआत में 200 से ज्यादा रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों को सेना के अंदर तक पहुंच मिली। ब्लूमबर्ग में छपी खबर के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र की इन कंपनियों में छोटी-बड़ी देसी-विदेशी सभी कंपनियां शामिल थीं। अहमदनगर में आयोजित दो अलग-अलग समारोहों में इन कंपनियों के ये प्रतिनिधि टैंक के अंदर घुसे, सेना की साजो-सामान की जरूरतों की पड़ताल की और सेना के जवानों से बात की।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक देश भारत को रक्षा सामानों की मैन्युफैक्चरिंग का पावरहाउस बनाना चाहते हैं। इसके तहत अगले 10 सालों में सेना के आधुनिकीकरण पर 150 अरब डॉलर खर्च करने की योजना है। इसी आलोक में सैना से जुड़े रहस्यों से पहली बार इतना बड़े पैमाने पर पर्दा उठा है। सेना के साथ करीबी कामकाज से देसी कंपनियों की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी जिससे नौकरियां पैदा करने में मदद मिलेगी।
आर्मी की ओर से महत्वपूर्ण हथियारों और सैन्य साजो-सामान का दो-तिहाई ठेका साल 2007 से 2012 के बीच ही पूरा हो गया था। अब कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ठेके पूरे होने में देरी हो रही है जिसकी वजह से सेना के आधुनिकीकरण की योजना को आघात पहुंचा है और रक्षा तैयारियां प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट में खासकर विदेशों से आयात होनेवाले हथियारों पर निर्भरता के नुकसान का जिक्र किया गया है।
इसलिए, सरकार ने हथियारों मेक इन इंडिया के तहत सैन्य हथियारों के देश में निर्माण की दिशा में तेजी लाई है। इसके लिए कंपनियों के जिन प्रतिनिधियों को पहली बार सेना के रहस्यों से कुछ हद तक वाकिफ कराया गया, वे सभी भारतीय नागरिक हैं जिनकी जांच-पड़ताल के बाद सेना ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की अनुमति दी।

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