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40 दवा फैक्ट्रियों पर एनजीटी की कार्रवाई की तलवार

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देहरादून। बिना शोधन के यमुना में रासायनिक अपशिष्ट छोड़े जाने के मामले में देहरादून की 40 दवा फैक्ट्रियों पर एनजीटी की कार्रवाई की तलवार लटक गई है। एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड नई दिल्ली और राज्य प्रदूषण बोर्ड को संयुक्त निरीक्षण कर चार सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। इसके तहत प्रदूषण बोर्ड को इसी माह जांच पूरी कर एनजीटी को सौंपनी है।

 

एनजीटी के इस आदेश के अनुपालन में जांच के लिए राज्य प्रदूषण बोर्ड की ओर से क्षेत्रीय अधिकारी को नामित किया गया है। ऐसे में जांच के दौरान प्रदूषण की पुष्टि होने पर फैक्ट्रियों का संचालन बंद हो सकता है। फार्मा सिटी सेलाकुई देहरादून स्थित एक इंटरनेशनल स्कूल की ओर से क्षेत्र में स्थित दवा कंपनियों द्वारा बिना ट्रीटमेंट के रासायनिक अपशिष्ट को यमुना में छोड़े जाने के बाबत एनजीटी में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

 

बताया गया है कि मामले में राज्य प्रदूषण की ओर से दवा कंपनियों पर पूर्व में नदी से लिए गए सैंपल और इस संबंध में की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी गई, लेकिन एनजीटी जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। विगत 27 जुलाई को एनजीटी की ओर से मामले में सुनवाई करते हुए केंद्रीय और राज्य प्रदूषण बोर्ड को संयुक्त रूप से दवा फैक्ट्रियों की जांच कर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। जिसके तहत बोर्ड को इसी माह निरीक्षण प्रक्रिया पूरी कर जांच रिपोर्ट एनजीटी को सौंपनी होगी।

 

बोर्ड के पर्यावरण अभियंता डा. अंकुर कंसल ने बताया कि एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में निरीक्षण प्रक्रिया जल्द ही पूरी की जानी है। इसके लिए राज्य प्रदूषण बोर्ड की ओर से क्षेत्रीय अधिकारी एसएस राणा को समन्वयक नामित कर दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देहरादून मुख्यालय के सदस्य सचिव विनोद सिंघल ने बताया कि एनजीटी के आदेश के अनुपालन के तहत हमने क्षेत्रीय अधिकारी को निरीक्षण के लिए समन्वयक नामित किया है जो दिल्ली की टीम के साथ जांच पूरी कराएंगे। जांच के बाद रिपोर्ट एनजीटी को दे दी जाएगी।