udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news cmस्वास्थ्य बीमा कार्ड से 90 फीसदी मरीजों का इलाज बंद !

cmस्वास्थ्य बीमा कार्ड से 90 फीसदी मरीजों का इलाज बंद !

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हल्द्वानी। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) का लाभ आम जनता को मिलना मुश्किल हो रहा है। पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों की पड़ताल करने पर पता चला कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले करीब 90 फीसदी से अधिक मरीजों को एमएसबीवाई योजना का फायदा नहीं मिल पा रहा है। सिर्फ इमरजेंसी केस ही रजिस्टर्ड किए जा रहे हैं।

कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल सुशीला तिवारी में पूर्व में हर दिन औसतन 45 से 55 सामान्य और गंभीर मरीज एमएसबीवाई कार्ड से इलाज कराते थे। पर अब सामान्य मरीजों को जांच और दूसरे उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को ही एसटीएच में प्राथमिकता दी जा रही है। एसटीएच में 1200 से अधिक की ओपीडी औसतन रहती है। हल्द्वानी बेस अस्पताल की भी अब सिर्फ पांच से छह मरीजों को ही क्लेम हर दिन हो पा रहे हैं। इलाज भी इस शर्त पर मिलेगा, अगर कागज सीएमओ कार्यालय से पास कर दिए जाते हैं।

केस 1 हल्द्वानी फूलचौड़ क्षेत्र निवासी इलेक्ट्रीशियन उदय मेहता की पत्नी अनीता मेहता के पैर की हड्डी तीन साल पहले टूट गई थी। तब ऑपरेशन हुआ और उनके पैर में रॉड डाली गई। अब वह पत्नी के पैर में लगी रॉड को निकालने एसटीएच पहुंचे। डॉक्टर ने ऑपरेशन की डेट तय कर दी, कार्ड एक्टिव होने के बावजूद उन्हें एमएसबीवाई कार्ड के जरिए ऑपरेशन का फायदा नहीं दिया गया। इसके बाद उदय मेहता ने खुद के खर्च से 31 जनवरी को पत्नी के पैर का ऑपरेशन करवाया।

केस 2 ओखलकांडा के विरेंद्र बिष्ट पत्नी के पेट में रसौली की दिक्कत लेकर एसटीएच पहुंचे। डॉक्टर ने ऑपरेशन की बात कही। कुछ दिन बाद का अस्पताल में सर्जरी के लिए समय लेने की बात कही। जब उन्होंने अपने मुख्यमंत्री बीमा योजना के कार्ड की जांच करवाई तो पता चला कि कार्ड डिएक्टिव हो चुका है। अब उन्हें इलाज का खर्च करना होगा।

इनमें जांचों में नहीं मिल रहा बीमा फायदा:
मरीजों को एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, महंगी पैथोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री सहित कई तरह की जांच और ऑपरेशन में एमएसबीवाई कार्ड का फायदा नहीं मिल रहा है। इसके अलावा दूसरे शनिवार या किसी महत्वपूर्ण छुट्टी के दिनों में इलाज नहीं मिल रहा है। क्योंकि सीएमओ कार्यालय में भी छुट्टी रहती है। पूर्व में ऑनलाइन सिस्टम के कारण ऐसी दिक्कत नहीं थी। योजना का सारा काम एनएचएम कर्मियों के भरोसे चल रहा है।