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आपदा के साढ़े चार साल: ना मिला रोजगार ना बनी दुकाने !

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पीएम मोदी को भेजा ज्ञापन ,रोजगार देने के साथ ही प्राधिकरण में बदलाव की भी मांग

रुद्र्रप्रयाग। केदारनाथ आपदा से ध्वस्त यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड की कोई सुध नहीं ली गई है। आपदा के दौरान गौरीकुंड अस्सी प्रतिशत बाढ़ में बह गया, जिससे तीस परिवार बेरोजगार हो गये। प्रभावित लोगों के सामने रोजगार का संकट आपदा के साढ़े चार साल बाद भी बना हुआ है। सरकार की ओर से सोनप्रयाग और केदारनाथ में दुकाने बनाकर दी गई, लेकिन गौरीकुंड के प्रभावितों की कोई भी सहायता नहीं की गई है।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजे ज्ञापन में आपदा से प्रभावित एवं पूर्व प्रधान गौरीकंुड मायाराम गोस्वामी ने कहा कि केदारनाथ की आपदा से सबसे ज्यादा नुकसान गौरीकुंड को हुआ। यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होने से हजारों की संख्या में तीर्थयात्री यहां रूका करते थे, मगर आपदा के बाद से गौरीकुंड की कोई सुध नहीं ली गई है।

 

प्रभावित परिवार आज भी सरकार के सामने रोजगार की मांग कर रहे हैं। श्री गोस्वामी ने कहा कि गौरीकुंड में मां गौरामाई का मंदिर होने के साथ ही गर्मकंुड भी है। ऐसे में यात्री यहां पर कुछ देर विश्राम करने के बाद केदारनाथ को प्रस्थान करते हैं। आपदा से गौरीकंुड अस्सी प्रतिशत बाढ़ की चपेट में आ गया और तीस परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया।

 

गौरीकुंड गांव के लोग यात्रा पर ही निर्भर हैं और परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, लिखाई का खर्चा यात्रा के दौरान काम करने से ही चलता है। छः माह तक व्यवसाय करने के बाद सालभर की आमदनी जुटाते हैं, लेकिन आपदा के बाद से सरकार ने गौरीकुंड की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसे में प्रभावितों को देहरादून, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में नौकरी के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रभावितों कोे रोजगार का भरोसा दिलाया, मगर उस पर अमल नहीं किया और वर्तमान सरकार ने केदारनाथ विकास प्राधिकरण का गठन कर प्रभावितों के साथ अन्याय किया है। प्राधिकरण के चलते दो माह का रोजगार करना भी मुश्किल हो गया है।

 

श्री गोस्वामी ने कहा कि प्राधिकरण के नियम काफी जटिल हैं, जिन्हें पूरा करना मुश्किल है। मई एवं जून माह का रोजगार करना अब प्रभावितों को मुश्किल हो जायेगा। उन्होंने पीएम मोदी से रोजगार के साथ ही प्राधिकरण के नियम में बदलाव करने की मांग की। ज्ञापन की प्रतिलिपि केदारनाथ विधायक मनोज रावत को भी सौंपी गई है।