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आरबीआई: सख्ती के चलते एटीएम का शटर गिरा रहे हैं पीसीए वाले बैंक

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मुंबई । आरबीआई की प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए) लिस्ट में डाले गए मुसीबतजदा पब्लिक सेक्टर बैंक धड़ाधड़ अपने एटीएम के शटर गिरा रहे हैं। रेग्युलेटरी ऑर्डर के चलते लागत घटाने की कवायद में इंडियन ओवरसीज बैंक से लेकर देना बैंक जैसे प्लेयर्स यह कदम उठा रहे हैं। इससे इन बैंकों के प्रतिस्पर्धियों को ज्यादा कैश विदड्रॉल पॉइंट्स मुहैया कराकर मार्केट शेयर बढ़ाने में मदद मिल रही है।

11 पब्लिक सेक्टर बैंक जो पीसीए लिस्ट में आए हैं, उनमें से सात ने अपने एटीएम की संख्या में खासी कमी की है। आरबीआई के डेटा के मुताबिक इनमें सेंट्रल बैंक, इलाहाबाद बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कॉरपोरेशन बैंक और यूको बैंक शामिल हैं।

एटीएम की संख्या में सबसे ज्यादा कटौती सितंबर 2015 में पीसीए में आए इंडियन ओवरसीज बैंक ने की है। बैंक ने अपने 15त्न एटीएम बंद कर दिए हैं जिससे उनकी संख्या अप्रैल 2017 के 3500 से घटकर इस साल अप्रैल में 3,000 रह गया। इस क्रम में यूसीओ बैंक और केनरा बैंक दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं जिन्होंने अपने 7.6त्न एटीएम बंद कर दिए हैं।

आरबीआई के डेटा के मुताबिक, पीसीए स्कीम के तहत उसकी निगरानी में आए बैंकों ने पिछले साल 1,635 एटीएम पॉइंट्स बंद किए थे। दिलचस्प बात यह है कि सरकारी बैंकों के इतने एटीएम बंद होने के बावजूद कैश विदड्रॉल 2018 में पिछले साल के मुकाबले 22त्न ज्यादा रहा था। कैश विदड्रॉल में बढ़ोतरी की वजह ग्रामीण भारत में आर्थिक गतिविधियों का तेज होना है।

दरअसल, एटीएम की संख्या पिछले साल के 2,07,813 से 107 बढक़र इस साल 2,07,920 हो गई है, जिससे यह मतलब निकाला जा सकता है कि पीसीए वाले बैंकों ने जो एटीएम बंद किए हैं, उसकी दूसरे बैंकों ने भरपाई कर दी है। एसबीआई के डेप्युटी एमडी नीरज व्यास ने कहा, एक एटीएम की कीमत लगभग ढाई लाख और उसकी ऑपरेशनल कॉस्ट 4.5-5 लाख होती है।

इसके ऊपर लगभग 20 लाख रुपये का कैश जोड़ लें जिस पर कोई रिटर्न नहीं मिलता। इसके अलावा कैश मैनेजमेंट और अपने और दूसरों के नेटवर्क पर कस्टमर्स को फ्री ट्रांजैक्शन ऑफर करना होता है। इन सबके चलते एटीएम बिजनस खास आकर्षक नहीं है।

बैंकिंग रेग्युलेटर ने 11 पब्लिक सेक्टर बैंकों की वित्तीय स्थिति बिगडऩे पर उन्हें पीसीए लिस्ट में डाल दिया है। इन बैंकों की हालत सुधारने के लिए आरबीआई ने इनकी लेंडिंग पर कुछ बंदिशें लगा दी हैं। इसके अलावा उन्हें कॉस्ट घटाने और कई लेवल पर गैरजरूरी हायरिंग को फ्रीज करने का ऑर्डर दिया गया है।

पीसीए वाली बंदिशों के चलते सरकारी बैंकों के मार्केट शेयर पर दबाव बना है। कमर्शल लेंडिंग मार्केट में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी मार्च 2016 के 32 लाख करोड़ रुपये से घटकर दिसंबर 2017 में 31.1 लाख करोड़ रह गई। इस दौरान प्राइवेट बैंकों की लेंडिंग 9.1 लाख करोड़ रुपये से बढक़र 10.9 लाख करोड़ रुपये जबकि एनबीएफसी का लोन पोर्टफोलियो 2.2 लाख करोड़ रुपये से बढक़र 3.9 लाख करोड़ रुपये हो गया।