udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के सामने रखी महाविद्यालय की समस्याएं

एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के सामने रखी महाविद्यालय की समस्याएं

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डोईवाला- शहीद दुर्गामल्ल राजकीय महाविद्यालय डोईवाला में आयोजित शौर्य दिवार के अनावरण कार्यक्रम में सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द्र अग्रवाल और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद डोईवाला इकाई के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री को महाविद्यालीय समस्याओं के सम्बन्ध में ज्ञापन दिया। अभाविप कार्यकर्ताओं का कहना था कि डोईवाला काॅलेज प्रदेश की राजधानी के निकट का महाविद्यालय है।
डोईवाला क्षेत्र के लगभग 36 इण्टर काॅलेज के साथ-साथ ऋषिकेश, हरिद्वार व देहरादून तक के छात्र अध्ययन करने आ रहें हैं। संसाधनों के अभाव में भी डोईवाला महाविद्यालय के छात्र लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहें हैं। महाविद्यालय व छात्रों की कुछ मूलभूत समस्यायें हैं जिसका  अविलम्ब समाधान आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने अभाविप कार्यकर्ताओं की प्रत्येक माँग को पूरा करने के लिए कहा।
ज्ञापन देने वालों में अभाविप के पूर्व जिला संयोजक अंकित तिवारी, गढवाला सम्भाग छात्रा प्रमुख संगीता, प्रदेश सदस्य आकाश थापा, पूर्व विश्वविद्यालय प्रतिनिधि नितेश कृषाली , सह जिला छात्रा प्रमुख नीलम ,पूजा लोधी रश्मि, दीलिप , विनय, रीता, श्रूति, अंजलि, गौरव , अजय, जगमोहन, विकास, प्रदीप, पंकज, प्रशान्त सिंह, दीपक, प्रवीन, पुजा, विनय सिंह पटवाल, आशीष शर्मा , अमन, केशव, कविराज, सुधांशु सेमवाल, सुरेखा, निशान्त मिश्रा, आरती, गुंजन, एकता, अंजली आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।
राजकीय महाविद्यालय डोईवाला की कुछ प्रमुख समस्याऐं
 फर्नीचर की आवश्कयता
 भवन निर्माण – वाणिज्य संकाय तथा विज्ञान संकाय में (भौतिक विज्ञान व गणित) स्नातकोत्तर कला संकाय ( हिन्दी, अग्रेंजी, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, भूगोल, इतिहास एवं राजनीतिशास्त्र) हेतु भवन निर्माण की आवश्यकता है। महाविद्यालय भवन में बरामदों को पार्टिशन कर स्नातकोत्तर की कक्षाएं किसी प्रकार से संचालित की जा रही है जिसमें बहुत परेशानी हो रही है। वाणिज्य संकाय अस्थायी टिन शैड में चल रहा है तथा भौतिक विज्ञान की कक्षाऐं तथा प्रयोगशाला न होने के कारण विद्यार्थी अस्थाई टिन शैड में ही पठन-पाठन तथा प्रायोगिक कार्य कर रहे है।
आॅडिटोरियम एवं पुस्तकालय – आॅडिटोरियम नहीं होने के कारण विद्यार्थियों के सांस्कृतिक व अन्य समारोह ठीक से नहीं हो पाते तथा पुस्तकालय भवन न होने के कारण रसायन विज्ञान के कक्षा कक्ष को पुस्तकालय के रुप में प्रयुक्त किया जा रहा है।
 पुस्तकें – पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की नवीनतम् पाठ्यक्रम (सेमेस्टर प्रणाली ) के अनुसार पुस्तकों की आवश्यकता है। इन पुस्तकों की कमी के कारण छात्र-छात्राऐं कठिनाई का अनुभव कर रहे हैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु भी पुस्तकों की पुस्तकालय में कमी है।
 गति अवरोधक/जेब्रा क्रासिंग – महाविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के सम्मुख राष्ट्रीय राजमार्ग पर गति अवरोधक/जेब्रा क्रासिंग के निर्माण की अत्यंत आवश्यकता है। इस संबंध में अनेक बार राष्ट्रीय राजमार्ग निगम को लिखा गया किन्तु उनके द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। अत्यधिक वाहनों की आवाजाही के कारण अनेक छात्र-छात्राऐं दुर्घटना का शिकार भी हुऐ हैं।
 बैल मंडी भवन का उपयोग – महाविद्यालय के निकट स्थित बैल मंडी विगत कई वर्षों से बंद है। बैल मंडी को अन्यत्र स्थापित कर उक्त परिसर को महाविद्यालय परिसर में सम्मिलित करने की आवश्यकता है। इससे महाविद्यालय के कक्षा-कक्षों की कमी दूर हो जाएगी।
 महाविद्यालय को भूमि आवंटन – महाविद्यालय परिसर एवं वन विभाग के बीच मिस्सरवाला की ग्राम समाज की भूमि महाविद्यालय को आवंटित कर भविष्य में महाविद्यालय के विकास की सम्भावनाओं में वृद्वि की जा सकती है। यह भूमि सड़क/रास्ते से जुड़ी न होने के कारण किसी अन्य के उपयोग में भी नहीं लाई जा सकती है इसकी उपयोगिता केवल महाविद्यालय के लिए ही है।
 शिक्षकों की नियुक्ति – महाविद्यालय में वर्तमान में ड्राइंग एवं पेंटिंग विषय में पद होते हुए भी प्राध्यापक नहीं है प्रायोगिक विषय होने के कारण छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन में कठिनाई हो रही है। इसके अतिरिक्त स्नातक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली होने के कारण हिन्दी एवं अंग्रेजी विषय अनिवार्य रुप से सभी छात्र-छात्राओं को पढ़ाए जा रहे हैं और प्राध्यापको के नए पद सृजित नहीं किए गये हैं।
 स्नातकोत्तर वर्ग  में एम0एस0सी, एम0 काॅम कक्षाओं का संचालन –  महाविद्यालय में सत्र 2010-2011 से स्नातक स्तर पर विज्ञान एवं वाणिज्य वर्ग की कक्षाएं प्रारम्भ की जा चुकी है और सत्र 2011-12 से कला संकाय में स्नातकोत्तर कक्षाएं भी हिन्दी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल विषय में संचालित की जा रही हैं।
वर्ष 2014-2015 से इतिहास एवं समाजशास्त्र विषयों में भी स्नातकोत्तर कक्षाएं आरम्भ हो गयी है। परन्तु आज भी विज्ञान और वाणिज्य संकाय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद छात्र-छात्राऐं स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा के लिए देहरादून या अन्य महाविद्यालयों में निर्भर रहते हैं, कुछ छात्र-छात्राऐं इस कारण प्रवेश से वंचित रह जाते हैं।