udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news अगर कम दी सैलरी तो लगेगा 50 हजार का जुर्माना

अगर कम दी सैलरी तो लगेगा 50 हजार का जुर्माना

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नई दिल्ली । सरकार ने लेबर बिल लोकसभा में पेश किया। इसके जरिए असंगठित क्षेत्र में सभी श्रेणियों के 40 करोड़ से ज्यादा श्रमिकों के न्यूनतम मजदूरी तय करने का काम केंद्रीय स्तर पर किया जाएगा। इसका खास प्रावधान यह है कि किसी मजदूर को तनख्वाह कम दी गई तो उसके मालिक पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। पांच साल के दौरान ऐसा फिर किया तो 1 लाख जुर्माना या 3 माह की कैद या दोनों सजाएं एक साथ देने का प्रावधान भी है।

 

हालांकि विपक्ष ने इस बात पर विरोध जताया कि सरकार ने अल्प सूचना पर बिल पेश कर दिया। उधर, श्रम मंत्री का कहना था कि अभी बिल पेश किया गया है, इस पर चर्चा बाद में होगी। न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा हर पांच साल में विभिन्न मानकों को ध्यान में रखकर की जाएगी।

 

इनका निर्धारण एक पैनल करेगा, जिसमें नियोक्ता, श्रमिकों के प्रतिनिधियों के अलावा स्वतंत्र लोग भी शामिल होंगे। समय पर देनी होगी पगार दिहाड़ी श्रमिकों को शिफ्ट समाप्त होने पर, साप्ताहिक श्रमिकों को सप्ताह के आखिरी कार्य दिवस तथा पाक्षिक श्रमिकों को कार्यदिवस समाप्ति के बाद दूसरे दिन भुगतान करना होगा। मासिक आधार वालों को अगले माह की सात तारीख तक वेतन देना होगा। श्रमिकों हटाने या बर्खास्त करने या उसके इस्तीफा देने पर पगार दो कार्यदिवस के भीतर देनी होगी।

 

चार कानूनों का विलय
श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने बताया कि नए बिल में 1936, 1948, 1965 व 1976 के एक्ट का विलय कर दिया जाएगा। इसमें जो प्रावधान हैं, उनसे किसी भी श्रमिक के अधिकारों का हनन नहीं हो पाएगा। नियोक्ता के लिए ये राहतनियोक्ता के लिए नए बिल में राहत की केवल एक बात है कि वह श्रमिक की मजदूरी तभी काट सकता है जब वह ड्यूटी से गैरहाजिर रहा हो या फिर उसकी वजह से कोई नुकसान हुआ हो। घर व अन्य सहूलियतें देने की एवज में भी तनख्वाह काटने का अधिकार नियोक्ता को है।