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बड़ा बदलाव : टीवी, फ्रीज, एसी और स्मार्टफोन जीरो कॉस्ट ईएमआई पर खरीद रहे कस्टमर्स

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नई दिल्ली । कुछ साल पहले तक कार और बाइक्स ही ईएमआई पर खरीदी जातीं थीं लेकिन नोटबंदी के बाद से इसमें बड़ा बदलाव हुआ है। अब लोग टीवी, फ्रीज, स्मार्टफोन और एसी जैसा सामान भी ईएमआई यानी मासिक किस्तों पर खरीद रहे हैं।

जीरो-कॉस्ट ईएमआई स्कीम कस्टमर्स को आकर्षित करने में सफल रही है। नोटबंदी से पहले तक कुल बिक्री में जीरो-कॉस्ट ईएमआई स्कीम का 25 फीसदी हिस्सा था, अब यह बढक़र 40 फीसदी हो गया है।

जीरो कॉस्ट ईएमआई पर कस्टमर्स की रुचि देखते हुए बड़ी कंपनियां भी इस सेगमेंट में पैर जमाने की तैयारी में हैं। आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक ग्रुप की कंपनियों के साथ होम क्रेडिट इंडिया और टीवीएस ग्रुप भी जीरो कॉस्ट ईएमआई सेगमेंट में उतरी हैं। इसका एक कारण यह भी है कि होम लोन और कार लोन मार्केट में अब गुंजाइश बहुत कम बची है।

प्रमुख ब्रैंड्स और रिटेलर्स ने बताया कि देश में जितने भी स्मार्टफोन बिकते हैं, उनमें से लगभग 25 प्रतिशत किस्त पर खरीदे जाते है। नोटबंदी से पहले यह आंकड़ा 10 प्रतिशत था। टीवी, फ्रिज जैसे वाइट गुड्स और स्मार्टफोन का बाजार अभी करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये का है। यह 10 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहा है।

गोदरेज अप्लायंसेज के बिजनस हेड कमल नंदी ने कहा कि नोटबंदी के बाद उपभोक्ताओं की आदतों में काफी बदलाव आया है। कैशलेस ट्रांजैक्शन्स में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, टियर-टू और टियर-थ्री बाजारों में संगठित खुदरा विक्रेताओं का विस्तार होने से फाइनैंस स्कीम की भूमिका बढ़ी है।

बताया जाता है कि आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से इन फाइनेसिंग स्कीम को चला रहे हैं। कारण है कि बैंकों को जीरो कॉस्ट वाली ईएमआई स्कीम चलाने की इजाजत नहीं है।

एचडीएफसी बैंक की सहायक कंपनी एचडीबी फाइनैंशल सर्विसेज और चेन्नै की टीवीएस ग्रुप पहले ही ड्यूरेबल्स और स्मार्टफोन फाइनैंसिंग के मार्केट में अपने पांव जमाने की कोशिश में लगे हैं। वित्तीय संस्थानों की ओर से इन वस्तुओं को खरीदने के लिए लोन मिलने से खपत को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। बजाज फाइनैंस इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी है।