udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news बड़ा खुलासा : जीवित हैं 23 साल से लापता 11वें पंचेन लामा !

बड़ा खुलासा : जीवित हैं 23 साल से लापता 11वें पंचेन लामा !

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धर्मशाला। तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने 11वें पंचेन लामा को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. दिल्ली से चार दिवसीय दौरे से लौटने के दौरान गगल एयरपोर्ट में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दलाईलामा ने कहा कि 11वें पंचेन लामा जीवित हैं और वह अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं. दलाईलामा ने यह दावा उन्हें विश्वसनीय सूत्र से मिली जानकारी के बाद किया है. धर्मगुरु ने यह खुलासा 11वें पंचेन लामा की 29वें जन्मदिवस की वर्षगांठ पर किया है.

 

लापता होने के 23 साल बाद खुलासा
पिछले करीब 23 वर्षों से तिब्बत से लापता हुए 11वें पंचेन लामा के बारे में धर्मगुरू दलाईलामा का यह खुलासा कर उस बहस को भी विराम दे दिया है, जिसमें यह कयास लगाए जाते रहे हैं कि चीन द्वारा बंदी बनाए गए 11वें पंचेन लामा शायद जीवित हैं भी या नहीं.
धर्मगुरु दलाईलामा के दावे से एक बात तो साफ हो गई है कि पंचेन लामा के जीवित होने की खबर से धर्मगुरु के साथ-साथ तिब्बत के अलावा अन्य देशों में रह रहे तिब्बती समुदाय के लोग खुश होंगे.

 

धर्मगुरु ने कहा कि 11वें पंचेन लामा चोयकी नीमा जीवित हैं और वह उन्हें उम्मीद है कि वह एक गुणी शिक्षक के सान्धिय में अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ समय पूर्व उनके द्वारा अगले दलाईलामा के अवतार के रूप में घोषित किए गए 11वें पंचेन लामा गेधुन चोकी नीमा के बारे में अभी तक कोई जानकारी नही थी.

 

वहीं, दलाईलामा ने आगे कहा कि तिब्बती परंपंरा के मुताबिक कोई भी लामा एक से अधिक बार प्रकट हो सकता है. उन्होंने एक उदारहण देते हुए कहा कि करीब एक सदी पूर्व खिनत्सी वांगपो नामक लामा पांच बार प्रकट हुए थे. हांलाकि, दलाईलामा की गद्दी पर कोई भी लामा एक बार ही बैठ सकता है.

 

6 साल की उम्र में 1995 से लापता हुए थे पंचेन
गौर हो कि 11वें पंचेन लामा गेदुन चोयकी नीमा को चीन द्वारा 17 मई, 1995 को अपहरण कर लिया गया था. इसके बाद से उनका कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी. 14 मई, 1995 को तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा ने गेधुन चोयकी नीमा को 11वें पंचेन लामा के रुप में मान्यता दी थी.

 

इसके तीन दिन के बाद ही 17 मई, 1995 से छह वर्षीय गेधुन व उनके परिजन रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब हैं. 28 मई 1996 तक तो यह भी पता नहीं चल सका कि गेधुन व उसके परिजनों का किसने अपहरण किया, लेकिन जब इस मामले को संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के अधिकारों के लिए गठित कमेटी ने उठाया तो पता चला कि चीन ने उसे बंदी बनाया हुआ है.