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बदलती फिजा में कश्मीर में अमन की बयार

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श्रीनगर । जब्रवान की पहाडिय़ों के पीछे अभी सूरज नहीं निकला था। प्रसिद्ध डल झील किनारे जहां जिदंगी सूरज की किरणों के साथ ही सांस लेना शुरू करती है, लेकिन आज फिजा कुछ बदली हुई थी। बड़ी संख्या में बच्चे, बूढ़े व जवान एक खुशनुमा माहौल में खड़े थे।

 

कुछ ही देर में लहराती झंडी के साथ सीटी बजी और सब दौड पड़े। आज वे पुलिस की लाठियों से बचने के लिए नहीं, कश्मीर को आतंकवाद व अलगाववाद से बचाने के लिए दौड़ रहे थे। पांच हजार से अधिक शांति के मसीहा रविवार तडक़े प्रसिद्ध डल झील के किनारे जब्रवान की पहाडिय़ों के दामन में पुलिस गोल्फ कोर्स में जुटे थे।

 

पुलिस की ‘मैराथन रन फॉर पीस इन कश्मीर’ में शामिल होने के लिए हर किसी के चेहरे चमक रहे थे। दहशत कहीं नजर नहीं आ रही थीर्। हिंदोस्तान जिंदाबाद-हिंदोस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते युवा कश्मीर में अमन हो की दुआएं कर रहे थे। पुलिस, सेना और सीआरपीएफ जवानों के अलावा बड़ी संख्या में वह नौजवान भी थे जो कुछ समय पहले तक अक्सर पत्थरबाजी करते हुए श्रीनगर समेत वादी के विभिन्न हिस्सों में नजर आते थे। छोटेछोटे बच्चे भी दौडऩे पहुंचे थे।

 

मैराथन में भाग लेने वालों का हौसला बढ़ाने के लिए भी लोग डल किनारे पहुंच गए थे। अमन के लिए हर कोई आया: लोन- समाज कल्याण मंत्री सज्जाद गनी लोन ने मैराथन में जुटी भीड़ को देखकर कहा कि यहां अधिकांश लोगों को पता है कि वह यहां इनाम जीत नहीं पाएंगे, लेकिन वह यहां आए हैं, सिर्फ अमन बहाली के प्रति अपनी चाह दिखाने के लिए। ऐसे आयोजन लगातार होने चाहिए तभी तो अमन आएगा।

 

हम दिल से यहां आएं हैं
पत्थरबाजी में शामिल कुछ युवा जो अब काउंसिलिंग के बाद मुख्य धारा में लौट आए हैं, वे भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। मंजूर, आबिद, बासित अली ने कहा कि वे दिल से यहां आएं हैं। वे भी अमन चाहते हैं। हम भटक गए थे। पुलिस ने ही हमें राह दिखाई है। अलगाववादी कश्मीर में शांति नहीं चाहते।

 

न ही वे चाहते हैं यहां के बच्चे पढ़ लिख सकें। भीड़ को देख मुबस्सर की आंखों में आंसू आ गए। कहा, …या अल्लाह मुझे वो पहले वाला कश्मीर दे दे। राबिया नामक एक छात्रा ने कहा कि हम लोग यहां अमन की तलाश में हैं, यह दौड़ उसके लिए ही थी। मैं शायद न आती, लेकिन मुझे मेरी मां और पिता ने ही प्रेरित किया। देखो जब तुम इस दौड़ को कामयाब बनाओगी तो कश्मीर में अमन की कोशिशें मजबूत होंगी।

 

दौड़ में जवान व पत्थरबाज भी दिखे साथ-साथ
दौड़ में शामिल सीआरपीएफ जवान अमर सिंह ने कहा कि हम क्यों नहीं दौड़ में शामिल होते, आखिर हम यहां अमन के लिए ही तो हैं। यहां कई ऐसे लडक़े भी देखे जो अक्सर पथराव में शामिल होते थे, उन्हें यहां देख अच्छा लगा। कुछ तो मेरे साथ दौड़ रहे थे। वह कह रहे थे कि अमन जरूरी है ताकि न लाठी हो न पत्थर हो।