udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news भू बैकुंठ धाम:बदरीनाथ के कपाट बंद, शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर में होगी

भू बैकुंठ धाम बदरीनाथ के कपाट बंद, शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर में होगी

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बदरीनाथ। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बुधवार दोपहर बाद 3.45 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
अब भगवान बदरीविशाल की शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर में होगी। कपाट बंदी उत्सव को यादगार बनाने के लिए बदरीनाथ मंदिर को फूलों से सजाया गया था। इस दौरान हजारों श्रद्धालु इस मौके के गवाह बने। कपाटबंद होने से पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए।
कपाटबंदी से पहले सुबह से ही भगवान बदरी विशाल की विशेष पूजाएं हुई। इस दौरान भगवान बदरी विशाल के आभूषण उतारे गए और उनका अभिषेक किया गया। इसके बाद उनका फूलों से श्रृंगार किया गया।
दोपहर करीब दो बजे के बाद लक्ष्मी मंदिर से माता लक्ष्मी की मूर्ति को रावल ईश्वर प्रसाद नंबूरी बदरीनाथ मंंदिर में लाए और गर्भ गृह में भगवान बदरीनाथ के साथ उन्हें विराजित किया। मंदिर के कपाटबंदी असवर को यादगार बनाने के लिए अलकनंदा नदी स्थित पुल से बदरीनाथ मंदिर तक फूलों के द्वार बनाए गए। वहीं, हजारों श्रद्धालुओं के जयकारों से बदरीनाथ गूंजायमान रहा। इसके बाद सांयकालीन आरती की गई। इसके बाद बदरीविशाल के फूलों का श्रृंगार उतारा गया और माणा की कन्याओं के द्वारा बनाए गए ऊन के कंबल में घृत लगाकर इस वस्त्र को बदरीविशाल को ओढ़ाकर उन्हें लक्ष्मीजी के साथ गर्भगृह में विराजित किया गया।
इसके बाद कुबेरजी और उद्धवजी की मूर्ति को मंदिर से बाहर निकाला गया और निर्धारित समय पर वेदपाठियों, मंदिर के हक हकूकधारियों की उपस्थिति में मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। कल उद्धवजी और कुबेर जी की डोली के साथ ही शंकराचार्यजी की गद्दी को रवाना किया जाएगा।
उद्धवजी और कुबेरजी की मूर्ति पांडुकेश्वर स्थित योगधाम बदरी मंदिर में स्थापित की जाएगी। यहीं की शीतकालीन पूजा आगामी छह माह तक होगी। वहीं शंकराचार्यजी की गद्दी को जोशीमठ स्थित नरसिंह मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

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