udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news बैड टच व गुड टच के बारे में बच्चों से करें खुलकर बाते!

बैड टच व गुड टच के बारे में बच्चों से करें खुलकर बाते!

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उदय दिनमान डेस्कः  बैड टच व गुड टच के बारे में बच्चों से करें खुलकर बाते! जब कोई आपका अपना ही आपकी भावनाओं के साथ खेल और अपने पवित्र रिस्ते को तार-तार कर दे तो आप क्या कहोंगे इसे ! कलयुग का प्रभाव या इंसानी रूप में भेडित्रये! आप खुद ही तय कीजिएगा। आज आपको एक ऐसी कहानी से रूबरू करवा रहे हैं, जिसे पढकर आप आपका भी रिस्तों से मन उब जाएगा।आपको हम सावधान कर रहे हैं अपने बच्चों को डाटे नहीं बल्कि प्यार से बाते करें नहीं तो कुछ अनर्थ हो जाएगा और आपके बच्चे का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। इसलिए सावधान और सर्तक रहे!

यह मामला हिमाचंल के कुल्लु का है। यहां एक बच्ची का उसके मामा ने ही शारीरिक शोषण कर दिया। छोटी बच्ची जो प्यार का गुड टच व बैड टच नहीं पहचान सकी और मां के भाई द्वारा ही यौन शोषण का शिकार होकर तीन महीने की गर्भवती हो गई। उसकी मां नहीं थी और पिता का पहले ही स्वर्गवास हो चुका था। बड़ी बहन के साथ मां के जन्मदाता यानि नाना के यहां रहने लगी। पहाड़ के ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी मासूम महज आठवीं कक्षा की छात्रा थी और नहीं जानती थी कि अच्छा और बुरा स्पर्श क्या होता है। उसे तो यह भी पता नहीं था कि म से मां… और म से मामा… में क्या समानता और अंतर है।

 

अनाथ होने का अभिशाप और मासूमियत ने बच्ची को समझदार होने से पहले ही जिंदगी का कड़वा सच समझा गई। छोटी बच्ची जो प्यार का गुड टच व बैड टच नहीं पहचान सकी और मां के भाई द्वारा ही यौन शोषण का शिकार होकर तीन महीने की गर्भवती हो गई। मामला वर्ष 2012 की सर्दियों का है, पर्यटन नगरी के साथ लगते एक गांव की लगभग 13 साल की बच्ची के शरीर में अनचाहे बदलाव आने लगे। उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो परिजनों ने डॉक्टरों को दिखाना चाहा।

 

उसी के साथ रह रही बड़ी बहन को कुछ शक हुआ तो उसने उसे संबल दिया और प्यार का स्पर्श पाकर बच्ची ने सारी कहानी कह दी कि किस तरह वह नाना के घर में अपनी ही छत के नीचे, अपने ही मामा की कुत्सित मानसिकता की शिकार हो गई।सारी बात सामने आई कि मामा कई महीने से हवस का शिकार बना रहा था। डरी-सहमी लड़की इसे किसी से बता भी न सकी। वह इतने दिन तक अकेले ही न केवल असहनीय तकलीफ सहती रही। अनभिज्ञता के कारण बच्ची होने के बावजूद नन्ही जान को गर्भ में धारण कर चुकी थी।

 

बहन के प्यार भरे स्पर्श से उसमें हिम्मत आई। लिहाजा बाद में उसका चिकित्सीय परीक्षण हुआ, मामला पुलिस तक गया और आरोपित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हुई। लेकिन यदि उस मासूम को पहले ही बैड टच व गुड टच… के बारे में पता होता तो शायद परिस्थिति कुछ और होती। आज वह बच्ची जिंदगी की कठोर हकीकत का सामना करते हुए अतीत को भुलाकर आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत है।

 

आज के तेजी से भागते समाज में बच्चों को अच्छे व बुरे स्पर्श के बारे में समझाने से पहले अभिभावकों का जागरूक होना होगा। माता-पिता पहले स्वयं समझें कि उनसे बढ़कर उनके बच्चों को दूसरा कोई सच्चा हितैषी नहीं हो सकता, उनकी सुरक्षा का स्वयं ख्याल रखें। पांच-छह साल से ही बढ़ते बच्चों, खासकर बच्चियों की दोस्त की तरह काउंसलिंग करें। उन्हें बताएं क्या सही है और क्या गलत। स्कूलों में भी बच्चों को इस संबंध में खुलकर बताना चाहिए ताकि किसी की जिंदगी बर्बाद न हो।

 

-पहली-दूसरी कक्षा तक पहुंचते बच्चों से डांट-डपटकर नहीं, बल्कि स्नेह भरा व्यवहार करके स्कूल व आसपास के माहौल के बारे में बातचीत करें।

-माताएं बच्चियों को दोस्त बनाएं और उन्हें हर अच्छे- बुरे स्पर्श का भेद बताएं।

-बच्चों के अभिभावक बनकर नहीं, उनके दोस्त बनकर पूछें कि वह पढ़ाई के अलावा और क्या-क्या करते हैं।

-उनके दोस्त कौन हैं, उनके साथ कैसा व्यवहार है और वह लोग आपके बेटे-बेटी के बारे में क्या सोचते हैं।

-बड़े हो रहे बच्चों से बात करने में झिझके नहीं, उनसे साफ पूछे कि कहीं कोई समस्या तो नहीं।

 

इस हादसे के बारे में पढकर आप खुद ही तय कीजिएगा कि आपको बपने बच्चों के साथ किस तरह का व्यवहार करना है। इस हादसे की कहानी पढने के बाद आपको सर्तक ीाी रहना होगा क्योंकि यह कलयुग है और कलयुग में किसी भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसलिए इस पोस्ट के बारे में आप जितना अच्छी तरह जान ले उतना ही आने वाले समय में आपके लिए फायदेमद और आप एक जागरूक नागरिक की तरह माने जाएंगे। इसलिए अंत में फिर से वाधान! और सर्तक रहे।