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भारत के स्वर्ग पर पाकिस्तान का कब्जा ! झरने, फूलों की घाटियां हैं यहां !

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उदय दिनमान डेस्कः भारत के स्वर्ग पर पाकिस्तान का कब्जा ! झरने, फूलों की घाटियां हैं यहां ! सुनकर अजीब लग रहा होगा , लेकिन यह सत्य है और इस स्थान पर पाक अब इसे अपना प्रांत बनाने की जुगत में है। चूंकि ये विवादित इलाका है, लिहाजा अब तक इसकी स्थिति स्वायत्तशासी इलाके की थी.

 

आपको बता दें कि गिलगित-बाल्टिस्तान अब तक स्वायत्तशाली इलाका है. माना जाता है कि पाकिस्तान ने इस इलाके पर अवैध तौर कब्जा किया हुआ है. कश्मीर का हिस्सा होने के काऱण ये भारत का अंग है. लेकिन न केवल पाकिस्तान इस इलाके को दबाकर बैठा है बल्कि वो अब इसे अपना पांचवां प्रांत बनाना चाहता है. इसको लेकिन उसने संसद में एक नया कानून पास कराया है. भारत ने इसका विरोध किया है. ये जायज भी है.

 

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि  भारत हमेशा से इस इलाके को कश्मीर का अभिन्न हिस्सा मानते हुए अपना मानता रहा है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान जबरन कब्जे वाले इस क्षेत्र के किसी भी हिस्से के दर्जे में बदलाव नहीं कर सकता. उसके पास इसके लिए कोई कानूनी आधार नहीं है.भारत ने पाकिस्तान के तथाकथित गिलगित – बाल्टिस्तान आदेश, 2018 के खिलाफ सख्त विरोध जताया है. 1947 में हुए विलय के आधार पर पूरा जम्मू कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा है. ‘गिलगित – बाल्टिस्तान’ इलाका उसी राज्य में शामिल है. पाकिस्तान को इस इलाके को खाली करना ही होगा.

 

आपको बता दें कि ये पाक-अधिकृत कश्मीर के भीतर एक स्वायत्तशासी क्षेत्र है. इसे शुमाली इलाक़े के नाम से भी जाना जाता था. पाकिस्तान येन केन प्रकारेण इसकी स्वायत्त स्थिति खत्म करना चाहता है. इसीलिए वो गिलगित -बाल्टिस्तान आदेश, 2018 नाम का नया कानून लेकर आया है, जिससे इस इलाके पर पूरी तरह से नियंत्रण किया जा सके.

 

खबरों के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने 21 मई को एक आदेश जारी कर इलाके की स्थानीय परिषद के अहम अधिकारों को खत्म कर दिया है. इन अधिकारों से परिषद स्थानीय मामलों पर फैसला लेती थी. इस फैसले को सरकार की ओर से गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. खुद पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री के फैसले की निंदा की है.

प्रधानमंत्री अब्बासी के गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर दिए गए आदेश का इलाके की जनता में व्यापक विरोध हो रहा है. पेशावर इलाके में प्रदर्शनकारियों और पुलिस की भिड़ंत में कई लोगों के घायल होने की खबर है. सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए प्रदर्शनकारी जब गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली की ओर जा रहे थे, तभी उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. हवाई फायरिंग की. इस प्रदर्शन में सभी दलों के लोग शामिल थे. वे संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे थे.

जब भी पाकिस्तान चीन की गतिविधियों का यहां के लोग विरोध करते हैं तो सेना इसे कुचल देती है. चीन-पाकिस्तान गलियारे का विरोध करने वालों पर आतंकवाद रोधी कानून लगाया जाता है. बड़े पैमाने पर पाकिस्तान ने यहां स्थानीय लोगों पर दमनचक्र चला रखा है. हां, गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा पूरी तरह अवैध है. न केवल ब्रिटिश संसद इसे कश्मीर का हिस्सा मानती है बल्कि यूरोपीय यूनियन भी इसे कश्मीर का ही बताता है.

उल्लेखनीय है कि  ब्रिटेन की संसद ने कुछ समय पहले एक प्रस्ताव पारित कर गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे को अवैध बताया था. ब्रिटिश संसद में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू एवं कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है. जबकि पाकिस्तान इस क्षेत्र को विवादित कश्मीर के क्षेत्र से पृथक क्षेत्र मानता है. केवल यही नहीं पाकिस्तान ने 1963 में इस इलाके के एक छोटे हिस्से शक्स्गम घाटी को चीन को दे दिया.

सर्वविदित है कि पाकिस्तान ने 1947 से गिलगित-बाल्टिस्तान समेत पीओके पर अवैध कब्जा कर रखा है. 1947 में विभाजन के समय यह क्षेत्र जम्मू एवं कश्मीर की तरह न तो भारत का हिस्सा था और न ही पाकिस्तान का. 1935 में ब्रिटेन ने इस हिस्से को गिलगित एजेंसी को 60 साल के लिए लीज पर दिया था, लेकिन इस लीज को एक अगस्त 1947 को रद्द करके क्षेत्र को जम्मू एवं कश्मीर के महाराजा हरि सिंह को लौटा दिया गया. महाराजा हरि सिंह ने अपना राज्य गिलगित और बल्तिस्तान तक बढ़ाया था. ये सारे इलाके जम्मू-कश्मीर के तहत ही आते थे.

31 अक्टूबर 1947 को कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने जब विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए तब इस इलाके का भारत में विलय हो गया लेकिन हरि सिंह के इस कदम के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने विद्रोह कर दिया. उसने दो नवंबर 1947 को गिलगित-बाल्टिस्तान की आजादी का ऐलान कर दिया. 21 दिनों तक इसकी यही स्थिति बनी रही. 21 दिन बाद पाकिस्तान इस क्षेत्र में दाखिल हुआ. इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया.

अप्रैल 1949 तक गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का हिस्सा माना जाता रहा, लेकिन 28 अप्रैल 1949 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की सरकार के साथ एक समझौता हुआ, जिसके तहत गिलगित के मामलों को सीधे पाकिस्तान की संघीय सरकार को दे दिया गया. लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया. विरोध करने वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के ही लोग थे, जिन्हें पाकिस्तान का नियंत्रण मंजूर नहीं था. तभी ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने 23 मार्च को ब्रिटिश संसद में पेश प्रस्ताव कर कहा कि पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान पर अवैध कब्जा कर रखा है. यह क्षेत्र उसका है ही नहीं.

इस प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया है कि पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्तिस्तान के लोगों को उनके फंडामेंटल राइट्स और राइट ऑफ फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन से महरूम कर रखा है. इस प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत वहां किसी भी कंस्ट्रक्शन को विवादित एरिया में हस्तक्षेप समझा जाएगा

 

इसकी सीमाएं पश्चिम में खैबर-पख़्तूनख्वा से, उत्तर में अफ़ग़ानिस्तान के वाख़ान गलियारे से, उत्तरपूर्व में चीन के शिन्जियांग प्रान्त से, दक्षिण में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और और दक्षिणपूर्व में भारतीय जम्मू व कश्मीर राज्य से लगती हैं. गिलगित-बल्तिस्तान का कुल क्षेत्रफल 72,971 वर्ग किमी है. अनुमानित जनसंख्या करीब दस लाख है. इसका प्रशासनिक केन्द्र गिलगित शहर है, जिसकी जनसंख्या लगभग ढाई लाख है.

सितम्बर 2009 में पाकिस्तान के साथ एक समझौते के तहत चीन गिलगित-बल्तिस्तान में एक बड़ी ऊर्जा परियोजना लगा रहा है. भारत ने इस परियोजना का विरोध किया है.गिलगित एक बहुत सुंदर इलाका हैस्थान वाला क्षेत्र है. ये कराकोरम की छोटी बड़ी पहाड़ियों से घिरा है. यहां सिंधु नदी भारत के लद्दाख से निकलती हुई बाल्टिस्तान और गिलगित होकर बहती है. गिलगित-बाल्टिस्तान में ही बालटॉरो नाम का एक मशहूर ग्लेशियर भी है. कराकोरम क्षेत्र में ही हिंदूकुश और तिरिच मीर नाम के वाले दो ऊंचे पर्वत भी हैं.

 

गिलगित घाटी में सुंदर झरनों, फूलों की सुंदर घाटियां भी हैं.पाकिस्तान इस इलाके में चीन के साथ जो भी कंस्ट्रक्शन कर रहा है, वो दरअसल स्वायत्तशासी क्षेत्र में है और नियमों का उल्लंघन कर इस बनाया जा रहा है.इस इलाके में चीन के 24 हजार सैनिकों की तैनाती भी बड़ा वॉयलेशन है.पाकिस्तान चीन को खुश करना चाहता है.चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर इसी इलाके से गुजरने वाला है.

चूंकि ये विवादित इलाका है, इसलिए चीन चाहता है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के तैयार होने के पहले इसके तमाम कानूनी पहलू पूरे कर लिए जाएं. यह इलाका पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से लगा हुआ है. भौगोलिक स्थिति की वजह से ये इलाका भारत के लिए सामरिक दृष्टि से खासी अहम है.