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भारत में गर्भवती महिलाओं की मौत के चौंकाने वाले आंकड़े

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जानलेवा भी हो सकता है प्रसवोŸार रक्तस्रावः डॉ. सुजाता संजय

टाल सकते हैं डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग से मौत का खतरा

हर पांच मिनट में एक भारतीय महिला की होती है मौत

देहरादून। संजय ऑर्थोपीडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेन्टर द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित 100 वीमेन्स अचीवर्स ऑफ इंडिया डॉ. सुजाता द्वारा प्रसवोŸार रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) कारण, बचाव एवं उपचार के बारे में व्याख्यान दिया।
डॉ. सुजाता संजय ने (पोस्टपार्टम हेमरेज) पी.पी.एच. के बारे में बताते हुए कहा कि अगर किसी गर्भवती महिला में नार्मल डिलीवरी में 500 (मिली) और सिजेरियन डिलीवरी के दौरान 1000 मिली से अधिक ब्लड निकलता है, तो इसे (पोस्टपार्टम हेमरेज) पी.पी.एच. कहा जाता है। प्राथमिक रक्तस्राव प्रसव के 24 घंटे के भीतर और माध्यमिक प्रसव के 4-6 दिनों के बाद हो सकता है।
प्रसव के दौरान सामान्य मात्रा में रक्तस्राव होना सामान्य है, परंतु जब यही रक्तस्राव अत्यधिक मात्रा में होने लगे और उपचार के बाद भी कोई लाभ न हो तो इससे मां की जान को खतरा हो सकता है। डिलीवरी के दौरान महिलाओं की इससे सबसे ज्यादा मौत होती हैं। बच्चे के जन्म के समय होने वाली मृत्यु में पोस्टपार्टम हेमरेज तीसरे नम्बर पर है।
डॉ. सुजाता संजय ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.आ.े) का अनुमान है कि प्रति वर्ष 5,29,000 माताओं की मौतें हो जाती है, जिसमें से 1,36,000 या 25.7ः मौतें भारत में होती हैं (गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली समस्याओं से हर पांच मिनट में एक भारतीय महिला की मौत हो जाती है)। वास्तव में दो-तिहाई मौतें प्रसव के बाद होती हैं, जिसके लिए पोस्टपार्टम हैमरेज यानी प्रसव के बाद ज्यादा खून बह जाना मुख्य समस्या होती है।
सेमीनार के दौरान डॉ. सुजाता संजय ने बताया कि पोस्टपार्टम हेमरेज (अत्यधिक रक्तस्राव) के कुछ कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण, नाल के बाहर आ जाने पर गर्भाशय का अपनी सामान्य स्थिति में न आ पाना (सिकुड़ न पाना) होता है। रक्तस्राव के अन्य कारणों में एनीमिया, मर्ल्टीपल प्रेग्नेंसी, गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ रक्तचाप एवं गर्भावस्था के संक्रमण होते हैं।
पोस्टपार्टम हेमरेज के दौरान की जाने वाली जाँच और उपचार के बारे में डॉ. सुजाता संजय ने बताया कि प्रसव कराने वाली (मिडवाइफ) या डॉक्टर को गर्भाशय को मालिश करना चाहिए ताकि वह संकुचित हो सके। यदि रक्तस्राव बहुत ज्यादा हो रहा हो तो संकुचन को प्रेरित करने के लिए हॉर्मोन ऑक्सीटोसिन भी दिया जा सकता है। डॉक्टर के द्वारा अत्यधिक रक्तस्राव के कारण का पता लगाने के लिए पेल्विक टेस्ट एवं एनीमिया या किसी संक्रमण का पता लगाने के लिए रक्त का टेस्ट कराना चाहिए।
यदि काफी ज्यादा रक्तस्राव हो गया हो तो रक्त चढ़वाने की भी जरूरत पड़ सकती है। यदि रक्तस्राव प्रसव के एक या दो हफ्तों के बाद शुरू हो तो, यह गर्भाशय में गर्भनाल के अवशेष की वजह से हो सकता है जो डिलीवरी के बाद गर्भाशय में रह गया हो। इस स्थिति में गर्भनाल के अवशेष को सर्जरी के द्वारा निकाला जा सकता है। यदि प्रसव के बाद, अस्पताल से घर आने के बाद किसी प्रकार का रक्तस्राव हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यदि महिला को गांठ या थक्के जैसा स्राव हो और घरेलू उपचार से तुरंत राहत न मिले तो भी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
डॉ. सुजाता संजय ने प्रसवोŸार रक्तस्राव की रोकथाम की नई दवाओं व आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी। प्रसव के दौरान सावधानी बरतने तथा आधुनिक दवाओं व तकनीकों के इस्तेमाल से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि सरल तरीके से कंडोम व कैथेटर से बैलून टेंपोनेड बनाकर महिलाओं की जान बचाई जा सकती है। फिर इसको ड्रिप की मदद से फूलाकर गर्भाशय से होने वाले रक्तस्राव को रोका जा सकता है।
प्र्रसवोŸार रक्तस्राव के चलते खून की कमी से पीडि़त महिलाओं के इलाज के लिए खून की कमी में आयरन के महत्व के बारे में भी जानकारी दी। डॉ. सुजाता संजय ने बताया कि इस व्याख्यान का उद्देश्य प्रसवोŸार होने वाली मृत्यु दर को कम करना है जिसके लिए मीडवाईफ, नर्से और अन्य पेरामेडिकल स्टॉफ को प्रशिक्षित करना अति आवश्यक है
ताकि वो इन परिस्थितियों में संयम खोये बिना अपनी और आपसी सूझबूझ से माँ और बच्चे की जान को बचा सके और जननी मृत्यु दर को कम करने में सहयोग दे सके। ताकि सही इलाज से इसको तत्काल नियंत्रित कर मृत्यु दर में कमी लाई जा सकें। उनके अनुसार स्वास्थ माँ ही स्वस्थ परिवार एवं स्वस्थ समाज का निर्वाह कर सकती है।