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भारतीय मुद्रा: नोटबंदी के 950 करोड़ रुपये नेपाल के पास !

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नेपाल व भूटान जैसे देशों में भारतीय मुद्रा का काफी चलन , नेपाल भारत का बड़ा व्यापारिक भागीदार !

दिल्ली: भारतीय मुद्रा: नोटबंदी के 950 करोड़ रुपये नेपाल के पास ! भारत इस धनराशि को अगर नेपाल से वापस नहीं लेता है तो यह नेपाल के लिए भारी नुकसान वाला सौदा हो जाएगा। नेपाल के पास पड़े हैं नोटबंदी के 950 करोड़ रुपये, मोदी से की जाएगी दरख्वास्त नेपाल व भूटान जैसे देशों में भारतीय मुद्रा का काफी चलन है. नेपाल भारत का बड़ा व्यापारिक भागीदार है.

उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के बाद कालाधन को सफेद करने वालों ने नेपाल और भूटान जैसे देशों में अपने पैसो को सफेद किया। क्योंकि इन देशों में भारतीय मुद्रा का काफी चलन है और इसी का फायदा उठाते हुए काले कारोवारियों ने इसे यहा सफेद किया, लेकिन अब जबकि पुराने नोट बिलकुल बंद हो चुके है ऐसे में नेपाल के पास पड़ी पुरानी कैरेंसी का क्या होगा। फिलहाल नेपाल के प्रधानमंत्री का भारत दौरा है और वहां के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने यह बात रखेंगे।

आपको बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली इस सप्‍ताह भारत दौरे पर आ रहे हैं. इस यात्रा में वे भारत के सामने एक दिलचस्‍प मांग रखेंगे. यह मांग बंद हो चुके पुराने नोटों से जुड़ी हुई है. नेपाल के पास बंद हो चुके 500 और 1000 रुपये के रूप में करोड़ों रुपये पड़े हैं और यह अब किसी काम के नहीं हैं.

 

यह रकम 950 करोड़ रुपये के करीब है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को जब नोटबंदी का ऐलान किया था उस समय यह नोट असंगठित क्षेत्रों और निजी लोगों के पास पड़े थे. दोनों देशों की सरकारों के बीच इन बंद हो चुके नोटों को बदलने को लेकर अभी तक सहमति नहीं बनी है.

 

नोटबंदी के ऐलान से नेपाल और भूटान जैसे देश हैरान रह गए थे. इन दोनों देशों में भारतीय मुद्रा काफी प्रचलित है. ओली ने मंगलवार को नेपाली संसद को बताया, ‘भारतीय नोटबंदी से नेपाली लोगों को काफी नुकसान हुआ है. भारतीय नेताओं से मुलाकात के दौरान मैं यह मुद्दा उठाऊंगा और मामला सुलझाने को कहूंगा.’

 

भारत नेपाल को सबसे बड़ा व्‍यापारिक साझेदार है और रोजमर्रा की चीजों का सबसे बड़ा सप्‍लायर है. नेपाली लोग बड़ी संख्‍या में रुपये का इस्‍तेमाल करते हैं और बचत को इसी मुद्रा के रूप में रखते हैं ओली शुक्रवार को अपने भारत दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ-साथ कई अन्य अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे.

 

सेंट्रल नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल मार्च में हुई एक मीटिंग के दौरान रिज़र्व बैंक इस बात पर सहमत हुआ था कि हर नेपाली 4500 रुपये तक के पुरानी नोटों को बदल सकता है. लेकिन एनआरबी के डिप्टी गवर्नर चिंतामणि शिवकोटि ने कहा कि उन्हें अभी तक इस संदर्भ में कुछ भी नहीं बताया गया है.

 

भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिज़र्व बैंक नेपाल या अन्य किसी देश में उस समय नोट बदलने की स्थिति में नहीं था क्योंकि उस समय नोटबंदी के दौरान इस तरह का कोई भी नियम नहीं बनाया गया था. अब संघ सरकार ही इस मामले में कोई फैसला ले सकती है.