udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news भड़ास4मीडिया : मौत का ऐलान, क्या यही है बेहतर विकल्प !  बंदी का ऐलान !

भड़ास4मीडिया : मौत का ऐलान, क्या यही है बेहतर विकल्प !  बंदी का ऐलान !

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दीपक आज़ाद-

चर्चित मीडिया केन्द्रित वेबसाइट भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह की हिम्मत अब अगर जवाब दे रही है और वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि  भड़ास के लिए अब मौत ही बेहतर विकल्प है तो यही सही! जी हां हम बात कर रहे हैचर्चित मीडिया केन्द्रित वेबसाइट भड़ास4मीडिया की।  एडिटर यशवंत सिंह ने ऐलान किया है कि 26 अगस्त से वेबसाइट का संचालन बंद कर दिया जाएगा।

पिछले एक दशक से मीडिया संस्थानों के न्यूज़ रूम के अंदर और बाहर पत्रकारों और उनके मालिकों के अच्छे-बुरे कर्मों को बेबाकी के साथ प्रकाशित करने वाले यशवंत सिंह आर्थिक संकट की वजह से भड़ास को बंद करने की बात पहले भी करते रहे हैं, लेकिन जैसे-तैसे यह वेबसाइट अब तक चलती आ रही है।

अब एक बार फिर यशवंत सिंह ने बकायदा 26 अगस्त का दिन मुर्करर करते हुए भड़ास को बंद करने का ऐलान किया है। यशवंत ने इसकी वजह आर्थिक संकट के साथ ही हिन्दी समाज और समझ को बताया है।

भड़ास की भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह वेबसाइट देश के ज्यादातर हिन्दी अखबारों व न्यूज़ चैनल के कार्यालयों में बैन कर दी गई है। संपादक की कुर्सी पर बैठकर सामंतों की तरह व्यवहार करने वाले मालिक-संपादकों को हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि कहीं उनके काले कारनामे लीक होकर भड़ास तक न पहुंच जाएं। संपादकों की अयाशी से लेकर दलाली तक की खबरों को भड़ास पर जगह मिलती रही है।

 

मीडिया के भीतर की सड़ाध को बाहर लाने में भड़ास का एक अहम रोल रहा है। यही वजह रही है कि भड़ास, भ्रष्ट व सत्ता की दलाली करने वाले पत्रकार व मीडिया मालिकों की आंख की किरकिरी बना रहता है। हालांकि भड़ास पर भी आरोप लगता रहा है कि वह एकतरफा रिपोर्टिंग के जरिये सनसनी की तरह खबरें प्रकाशित करता है और गाहे-बगाहे चिरकुट किस्म के धंधेबाजों को जरूरत से ज्यादा स्पेस देता है।

ऐसे वक्त में जब भारत में मीडिया का कारपोरेटीकरण तेजी से हो रहा हैे, और मीडिया संस्थाओं के न्यूज़ रूम में साजिशों, षडयंत्रों का सिलसिला पहले से और भयावह होता जा रहा है, तब भड़ास जैसी संस्थाओं का होना और भी बेहद जरूरी है।

 

ऐसे में भड़ास की बंदी का ऐलान हम सब जो भी उसके चाहने वाले हैं, के लिए एक बुरी खबर है। इस पर हम मातम ही मना सकते हैं! यशवंत की हिम्मत अब अगर जवाब दे रही है और वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि  भड़ास के लिए अब मौत ही बेहतर विकल्प है तो यही सही! नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं!

(दीपक आज़ाद वाॅचडाॅग के एडिटर हैं.)