udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news भेड़ पालन सुधारेगा पलायन का दंश झेल रहे पहाड़ी क्षेत्रों की आर्थिकी

भेड़ पालन सुधारेगा पलायन का दंश झेल रहे पहाड़ी क्षेत्रों की आर्थिकी

Spread the love

हल्द्वानी। प्रदेश में भेड़ पालन के जरिये ऊन उत्पादन बढ़ाने के लिए उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड आठ जिलों में केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड की मदद से योजनाओं को संचालित करेगा। जिसके तहत भेड़ों के स्वास्थ्य व ऊन विपणन के लिए कार्यक्रम संपादित किए जाएंगे। साथ ही नस्ल सुधार को भेड़ पालकों को उन्नत नस्ल की पांच भेड़ मुफ्त दी जाएंगी।

पलायन का दंश झेल रहे उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में भेड़ पालन को रोजगार का एक बड़ा जरिया बनाने के लिए अब बोर्ड ने कवायद शुरू कर दी है। पहली बार प्रदेश के 18 से 59 वर्ष के भेड़-बकरी पालकों के लिए बीमा योजना शुरू की गई है। जिसमें प्रतिवर्ष बीमा प्रीमियम की बीस प्रतिशत धनराशि बोर्ड देगा।

भेड़ पालकों को केवल अस्सी रुपये अंशदान देना होगा। सिर्फ पशुपालक ही नहीं बल्कि बोर्ड पचास भेड़-बकरियों का बीमा भी करेगा। केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड की भेड़ एवं ऊन सुधार योजना के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, देहरादून, चमोली बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ में बोर्ड अधिकारी स्वयं योजना की मॉनीटरिंग करेंगे।

दोगुनी होगी किसानों की आय उत्तराखंड में भेड़-बकरियों की संख्या तकरीबन 18 लाख है। अब मिशन 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन को भी जोड़ा गया है। इसलिए 2022 तक इनकी संख्या को बढ़ाकर 25 लाख करने की योजना है। बकरी पालन के जरिये जहां नॉन वेज खाने के शौकीनों की मांग पूरी होगी। वही, भेड़ पालन से ऊन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी डॉ. अशोक बिष्ट ने बताया कि बोर्ड का पूरा फोकस अब प्रदेश में भेड़ पालन के जरिये ऊन उत्पादन को बढ़ाना है। इसके लिए ऊन की गुणवत्ता के हिसाब से समर्थन मूल्य भी घोषित किया गया है।