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भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जीरो टॉलरेन्स की नीति

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देहरादून: सचिवालय सभागार में प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय कार्यों में पारदर्शिता एवं प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित Government e Market (GeM) के प्रोत्साहन हेतु 04 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक चल रहे राष्ट्रव्यापी मिशन का प्रदेश में शुभारम्भ कृषि मंत्री, उत्तराखण्ड श्री सुबोध उनियाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पारदर्शिता के मद्देनजर संचालित Paperless, Contactless एवंCashless योजना को प्रभावी एवं सशक्त बनाने के लिए उपस्थित विभागाध्यक्षों से अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जीरो टॉलरेन्स की नीति के तहत कार्य किया जा रहा है।
हमें पारदर्शिता एवं गुणवत्ता युक्त उत्पादों के लिए प्रतियोगिता का माहौल बनाना है, तथा भारत के प्रधानमंत्री भी सदैव इस बात के लिए चिन्तित है कि देश में पारदर्शिता एवं भ्रष्ट्राचार मुक्त वातावरण का निर्माण किया जाय, इसी के तहत भारत सरकार के साथ 27 दिसम्बर, 2017 को राज्य सरकार का GeM के लिए एमओयू हुआ। प्रोक्योरमेंट रूल, 2017 में भी जीईएम के लिए प्रावधान किया गया है। सरकार द्वारा कि जाने वाली खरीद फरोख्त भी जीईएम के माध्यम से की जाए तथा इसका अनुपालन भी किया जा रहा है किन्तु समुचित जानकारी के अभाव में प्रदेश में शत प्रतिशत अनुपालन नही हो पाया है।
GeM के अन्तर्गत इस कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को इसको भली भांति समझ कर अपने अपने विभाग में अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि प्रायः खरीद फरोख्त मे मीडियेटर के कारण उपभोक्ता को सीधा लाभ नहीं मिल पाता है किन्तु जीईएम के माध्यम से कम व्यय में अधिक से अधिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने प्रदेश में अब तक पंजीकृत 200 क्रय अधिकारी एवं 1000 सप्लायर को कम बताते हुए इसे और बढ़ाने के निर्देश दिए। तथा कार्यशाला के लिए संयोजक विभागों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने GeM की अवधारणा पारदर्शिता, सक्रियता एवं समय पर सेवा उपलब्ध कराने की क्षमता को बढ़ाने के लिए उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए। कृषि मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय में ई मार्केटिंग का कार्य पूर्व से चल रहा है जिसके लिए भारत सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को प्रशस्ति प्रमाण पत्र भी मिला है। उन्होंने आशा व्यक्त की प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों के उत्पादकों को भी जीईएम में अधिक से अधिक पंजीकृत कराने में मदद की जाए जिससे स्थानीय उत्पादकों को स्वस्थ बाजार मिलने से उनकी आर्थिकी बढ़ने के साथ-साथ पलायन भी दूर होगा। उन्होंने कहा कि ई पोर्टल मे उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागो को पुरूस्कृत करने के लिए वे मुख्यमंत्री से भी अनुरोध करेंगे।
सचिव श्री अमित िंसह नेगी ने कहा कि सरकार को नागरिको के लिए Certain level of Governance   देनी पडती है जिसको देखते हुए उत्तराखण्ड सरकार द्वारा 2017 में नई अधिप्राप्ति नियमावली के नियम-7 में जीईएम से खरीदने का प्राविधान किया है तथा खरीद फरोख्त में पारदर्शिता एवं जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में ही जीईएम का इस्तेमाल कर लिया गया तथा समय-समय पर विभागध्यक्ष की इससे सम्बंधित सवालों को हल किया जाता है। राज्य ने Most Compliant buyer category में GeM top buyer 2018 पुरूस्कार प्राप्त किया है।
उन्होंने विभागाध्यक्ष/वित्त नियंत्रक व अन्य अधिकारियों से अपेक्षा कि वो जीईएम पोर्टल पर क्रय की बारीकियों को समझे तथा कठिनाईयों के निराकरण के बारे में सवाल पूछें व उनका समाधान भी करें। साथ ही स्थानीय व्यापारियों को जीईएम मे पंजीकृत करने हेतु प्रेरित करे। इसमें अधिक से अधिक व्यापारियों के पंजीकरण से एक स्वस्थ व बेहतर प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी।
हमारे व्यापारी बंधुओं को न सिर्फ प्रदेश के शासकीय खरीद में भागीदारी करने का मौका मिलेगा अपितु देश भर मे फैले हुए अन्य मंत्रालयों, विभागों, निगमों व सरकारी कम्पनियों में होने वाली अधिप्राप्ति प्रक्रिया में अपनी भागीदारी निभा सकते है, इससे अपनी आय बड़ा सकते हैं और प्रदेश के विकास में अपना योगदान दे सकते है। साथ ही प्रदेश के अधिक से अधिक उत्पादकों का पंजीकरण कराएं जिसमें स्थानीय उत्पादकों को बाहरी राज्यों में मांग बढ़े तथा उनकी आय भी बढ़े। उन्होंने विभागाध्यक्षों से कार्यालय में उपयोग मे आने वाली वस्तु एवं सेवाओं मे प्राथमिकता के साथ खरीदने के निर्देश दिये।
उन्होंने जनवरी, 2018 से अब तक की छोटी सी अवधि में प्रदेश सरकार ने हमने जीईएम एसपीवी की दिशा निर्देशानुसार विशेष प्रयास किये हैं। परिणामतः 200 से अधिक क्रेता कार्यालय व 1000 से अधिक विक्रेताओं को पंजीकृत किया है। 37 करोड़ रू0 से अधिक की अधिप्राप्ति जीईएम पोर्टल के माध्यम से की गई है। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समय में विक्रेताओं को भुगतान किया गया है।
भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री केशव चन्द्र ने उत्तराखण्ड में जीईएम की उपलब्धि को सराहा तथा बताया कि अगस्त 2016 से टेक्नोलॉजी के साथ-साथ भारत सरकार द्वारा एक नया फार्मूला लाया गया जिसकी अवधारणा Maximum Governance , सरकार के प्रोक्योरमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
ई मार्केट को प्रोक्योरमेंट रूल्स से जोडा गया है तथा प्रथम एवं द्वितीय जीईओ वर्जन में राज्य सरकार द्वारा बतायी जा रही समस्याओं का समाधान कर जीईएम-3 के वर्जन को जनवरी 2018 में लाया गया है। जिसमें प्रदेश में सुदूर क्षेत्र के वेन्डर्स को भी शामिल किया गया। जिसके द्वारा निष्क्रिय एवं फर्जी उत्पादकों को जीईएम से हटाया गया है तथा वास्तविक, जिम्मेदार उत्पादकों को ही पंजीकृत किया जा रहा है। उससे सही उत्पादकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि जीईएम मे बहुत सी सेवाए आ रही हैं। उत्तराखण्ड सरकार उनका लाभ उठा सकती है।
तकनीकी सत्र में जीईओ के डिप्टी सीईओ श्री एसके जैन ने जीईएम के तहत पंजीकरण, अधिकारियों को नामित करने एवं सामान मंगवाने आदि की बारीकियों के सम्बंध मे प्रस्तुति दिया। कार्यशाला का संचालन प्रदेश में जीईएम का कार्य देख रहे उप सचिव श्री मनमोहन मैनाली ने किया। इस अवसर पर अपर सचिव/विभागाध्यक्ष, तकनीकि शिक्षा श्री अहमद इकबाल, अपर सचिव वित्त श्री भूपेश तिवारी, वित्त नियंत्रक श्री दिनेश चन्द्र लोहानी सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष एवं वित्त नियंत्रक मौजूद थे।