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book-गढ़वाली भाषा के संरक्षण में जुटे डॉ. वीरेन्द्र बर्त्वाल की पुस्तक गढ़वाली भाषा प्रकृति और समृद्धि का विमोचन

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देहरादून। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार डॉ. वीरेन्द्र बर्त्वाल की पुस्तक गढ़वाली भाषा प्रकृति और समृद्धि का विमोचन सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, बाइपास रोड, देहरादून में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रू प्रो. केबी सुब्बारायडू (प्राचार्य राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर, देवप्रयाग ) थे। उन्होंने वीरेन्द्र बर्त्वाल के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए उनकी यह पुस्तक प्रेरणादायक सिद्ध होगी। विलुप्त होती गढ़वाली के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे ही साहित्यकारों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक जमाने में गढ़वाल राज्य की राजभाषा रही गढ़वाली के संरक्षण की नितांत आवश्यकता है।

डा. बर्त्वाल ने कहा कि इस पुस्तक में गढ़वाली का अध्ययन व्याकरणिक आधारपर किया गया है। यह पुस्तक गढ़वाली सीखने के इच्छुक लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। विशिष्ट अतिथि आशा मनोरमा डोबरियाल शर्मा ने पुस्तक में निहित सामग्री की प्रशंसा की। भाजपा नेता रवींद्र जुगरान ने कहा कि स्थानीय भाषा को बचाने के लिए जो प्रयास सरकार को करना चाहिए था, उसे आज सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल औरय कुछ साहित्यकार कर रहे हैं।

इस मौके पर सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य अलका राणा, परमानंद सकलानी, रघुवीर बिष्ट, चंद्रदत्त सुयाल, योगेश भट्ट, गिरिराज उनियाल, विजय उनियाल, दीपक कैंतुरा, भानु नेगी, उत्तम असवाल, डॉ. सरिता कैंतुरा मलिक, डॉ. जयश्री थपलियाल आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सोशल बलूनी स्कूल के अध्यापक कुलदीप कुंवर ने किया।

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