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बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के रिश्ते भी बारीकी से चेक कर रही हैं लोन देने वाले स्टार्टअप्स

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बेंगलुरु। पुणे की एक साल पुरानी मोबाइल बेस्ड फाइनैंशल टेक्नोलॉजी स्टार्टअप अर्लीसैलरी के को-फाउंडर अक्षय मेहरोत्रा अपनी एक स्टोरी शेयर करना चाहते हैं। यह कहानी बेंगलुरु की 27 साल की एक आईटी प्रफेशनल की है, जिनके महज 15,000 रुपये के लोन की ऑनलाइन ऐप्लिकेशन को अर्लीसैलरी ने ठुकरा दिया।

 

मेहरोत्रा बताते हैं, उनकी मंथली सैलरी 60,000 रुपये थी और हर तरह से लोन पाने लायक थीं, लेकिन हमने उनके बॉयफ्रेंड के चलते लोन खारिज कर दिया, जिसके साथ वह लिव इन रिलेशनशिप में थीं। मेहरोत्रा का स्टार्टअप स्टूडेंट्स और सैलरीड प्रफेशनल्स को छोटे लोन देता है।

अर्लीसैलरी को उसके बॉयफ्रेंड से क्या प्रॉब्लम थी? असल में लडक़े ने लडक़ी के आवेदन से तीन दिन पहले उतने ही लोन के लिए अप्लाई किया था। लडक़ा बेरोजगार था इसलिए ऐप्लिकेशन रिजेक्ट हुई थी। स्टार्टअप ने उनके रिलेशनशिप में होने की बात पता करने के लिए मशीन लर्निंग एल्गो के जरिए जीपीएस और सोशल मीडिया डेटा को यूज किया।

 

दोनों ने ऐप डाउनलोड करने के लिए सोशल मीडिया डेटा यूज करने की इजाजत दी थी। लडक़ी हर महीने बॉयफ्रेंड के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करती थी और वह लोन एप्लिकेशन के लिए जमा कराए गए बैंक स्टेटमेंट में दिख गए।

 

ऐसा सिर्फ यही लोग नहीं कर रहे हैं। 22 से 35 साल की उम्र के लोग बैंक लोन की लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए अर्लीसैलरी, जेस्टमनी और ईपेलेटर जैसी क्रेडिट कंपनियों से लोन ले रहे हैं। अर्लीसैलरी बॉरोअर की जरूरत के हिसाब से उसके सैलरी अकाउंट में रकम डालती है और डेली इंटरेस्ट के साथ लोन की रकम अपने आप निकाल लेती हैं।

 

दूसरी तरफ, जेस्टमनी और ईपेलेटर 500 से डेढ़ लाख रुपये तक उधार देती है। ये सभी कंपनियां फर्जी ऐप्लिकेशन से निपटने के लिए टैक्नॉलजी का इस्तेमाल करती हैं।

ये कंपनियां ऐप्लिकेंट्स के बैंक ई-स्टेटमेंट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हिस्ट्री वगैरह को स्टडी करके उसका वर्चुअल प्रोफाइल बनाती हैं। मेहरोत्रा बताते हैं, जैसे ही कस्टमर ऐप डाउनलोड करता है और टर्म्स कंडिशंस को ओके करता है, उसके डिवाइस डिटेल, कॉन्टैक्ट, फोटो जैसे डेटा का एक्सेस हमें मिल जाता है।

ईपेलेटर के को-फाउंडर उदय सौम्याजुला आइडेंटिफिकेशन के उदाहरण देते हुए बताते हैं, आपके ऑपरेटिंग सिस्टम पर टाइपिंग स्पीड से भी फ्रॉड का पता लगाने में मदद मिलती है।

 

अगर आप रिपीट कस्टमर हैं तो आपकी आइडेंटिटी पक्की करने के हमारे पास आपके सारे डेटा होंगे। अगर डिटेल भरने की आपकी टाइपिंग स्पीड और क्लिक्स के नंबर नॉर्मल नहीं होते और आपके व्यवहार में काफी फर्क नजर आता है तो सिस्टम अलर्ट जारी कर देता है।

इन कंपनियों का लोन अप्रूवल रेट 37 से 75 पर्सेंट के बीच है और इनका मशीन एल्गो एप्लिकेंट के लोन रिपेमेंट की क्षमता और चाहत का पता लगाने के लिए 800 से 5000 डेटा पॉइंट्स को रीड करता है। एप्लिकेंट वर्किंग है या नहीं यह जानने के लिए आमतौर पर लिंक्डइन प्रोफाइल चेक करते हैं और रिलेशनशिप स्टेटस से फेसबुक देखते हैं।