udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news बृहस्पति देव की यह चाल खोल रही है इनके बंद किस्मत के ताले !

बृहस्पति देव की यह चाल खोल रही है इनके बंद किस्मत के ताले !

Spread the love

बृहस्पति कन्या राशि को छोड़ तुला राशि में कर रहे हैं प्रवेश,बृहस्पति की यह चाल आपको करेगी मालामाल

उदय दिनमान डेस्कः बृहस्पति देव की यह चाल खोल रही है इनके बंद किस्मत के ताले ! मानो या ना मानो लेकिन यह सत्य है और अगर आपकी भी इन ये राशियां है तो आप भी अमीर बनने वाले है और आपकी बंद किस्मत के ताले खुलने वाले हैं ऐसा ज्योतिषशस्त्र कह रहा है। बता दे कि आज बृहस्पति कन्या राशि को छोड़ तुला राशि में प्रवेश करने वाले है. इसके साथ ही हम आपको ये भी बताएंगे कि आज गोचर में परिवर्तित बृहस्पति की यह चाल किन किन राशि के लोगो को मालामाल करेगी .यदि इन राशियों में से एक राशि आपकी है तो आने वाला समय आपके लिए खुशियां लेकर ही आएगा.

 

 मेष.. इस राशि के लोगो को पिता और भाग्य दोनों का साथ मिलेगा. इसके इलावा भाई बहनो के संबंध में मधुरता आएगी. गौरतलब है, कि इस राशि के लोगो के यात्रा के योग बन रहे है, जिसके चलते इनका व्यक्तित्व भी निखार कर सामने आएगा. इसके साथ ही इन्हे कम मेहनत से अधिक लाभ मिलेगा. हालांकि दाम्पत्य जीवन में थोड़ा उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है, ऐसे में हर गुरुवार पीली दाल किसी भी गाय को जरूर खिलाएं, इससे आपका दाम्पत्य जीवन सुखमय बन सकता है.

 

 मिथुन..  इस राशि के लोगो को अचानक कई प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे. इसके इलावा संतान पक्ष द्वारा शुभ समाचार मिलेंगे और भाग्य का साथ भी मिलेगा. ऐसे में यदि आप अपने पिता की सलाह लेकर उन्नति की राह पर चलेंगे तो आपको सफलता जरूर मिलेगी. इसके साथ ही धन प्राप्ति और वृद्धि संबंधी योग भी बन रहे है. बता दे कि भाई बहनो का सहयोग मिलेगा और व्यक्तित्व में काफी निखार आएगा. इसके इलावा आध्यात्मिक मामलो की तरफ आपकी रूचि बढ़ सकती है.

 

कर्क..  इस राशि के लोगो को भौतिक सुखो की प्राप्ति होगी. ऐसे में अगर आप नौकरी कर रहे है तो आपको उन्नति मिलेगी और नौकरी की तलाश कर रहे है, तो जल्द ही शुभ समाचार मिलेगा. इसके इलावा बीमारियों से और कर्ज से छुटकारा मिलेगा. इसके साथ ही फालतू खर्चे कम होंगे. अगर आप जल्दी अपने कार्य सम्पन्न करना चाहते है तो वीरवार को किसी भी वृद्ध ब्राह्मण को पीले वस्त्र दान करे.

 

 कन्या.. इस राशि के लोगो को परिवार और समाज में काफी मान सम्मान मिलेगा. इसके साथ ही इन्हे धन का लाभ होगा और इनकी वाणी में मधुरता का वास होगा. यदि आप कोर्ट कचहरी के किसी मामले में उलझे हुए है, तो इस बार सफलता जरूर मिलेगी. इसके इलावा स्वास्थ्य भी पुष्ट रहेगा और रुके हुए काम भी पूरे होंगे.

 

वृश्चिक.. इस राशि के लोगो के लिए धन प्राप्ति के योग बन रहे है. इसके साथ ही समाज और परिवार में प्रतिष्ठा बढ़ेगी. इसके इलावा अचानक लाभ होंगे और भौतिक सुखो में वृद्धि होगी. बता दे कि माता पिता का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा.काम में उन्नति मिलेगी, पर साथ ही फालतू खर्चे भी अधिक होंगे. जी हां घर परिवार के स्वास्थ्य को लेकर खर्च हो सकता है. ऐसे में यदि आप चाहते है कि घर वालो का स्वास्थ्य ठीक रहे तो पांच गुरुवार को पीतल की कटोरी में थोड़ी सी चने की दाल और गुड़ रख कर किसी मंदिर में दान दे या किसी वृद्ध ब्राह्मण को भी दान दे सकते है.

 

धनु..  इस राशि के लोगो को धन लाभ के काफी अच्छे योग देखने को मिलेंगे. इसके साथ ही भाई बहनो के रिश्तो में भी मधुरता देखने को मिलेगी और कम मेहनत में अधिक लाभ होगा. इसके साथ ही व्यापारिक यात्राओं में सफलता मिलेगी और दाम्पत्य जीवन भी खुशहाल रहेगा. इसके इलावा अगर आप स्टूडेंट है तो यह समय आपकी शिक्षा के लिए बहुत अच्छा है.

 

 कुम्भ.. इस राशि को भाग्य का साथ मिलेगा और कार्यो में सफलता भी मिलेगी. इनके अपने पिता के साथ संबंध भी काफी मधुर रहेंगे. इसके इलावा इनका स्वास्थ्य भी मजबूत रहेगा और व्यक्तित्व में निखार देखने को भी मिलेगा. धन लाभ के साथ साथ इनको परिवार और समाज में खूब प्रतिष्ठा भी मिलेगी. यहाँ तक कि अगर जमीन जायदाद से संबंधित आपका कोई काम रुका हुआ है, तो वो भी पूरा हो जाएगा और संतान सुख की प्राप्ति भी होगी. इसके साथ ही मेहनत करके आप शिक्षा में सफलता हासिल कर सकते है.

बृहस्पति गृहपुरोहित भी

बृहस्पति का अनेक जगह उल्लेख मिलता है। ये एक तपस्वी ऋषि थे। इन्हें ‘तीक्ष्णशृंग’ भी कहा गया है। धनुष बाण और सोने का परशु इनके हथियार थे और ताम्र रंग के घोड़े इनके रथ में जोते जाते थे। बृहस्पति का अत्यंत पराक्रमी बताया जाता है। इन्द्र को पराजित कर इन्होंने उनसे गायों को छुड़ाया था। युद्ध में अजय होने के कारण योद्धा लोग इनकी प्रार्थना करते थे। ये अत्यंत परोपकारी थे जो शुद्धाचारणवाले व्यक्ति को संकटों से छुड़ाते थे। इन्हें गृहपुरोहित भी कहा गया है, इनके बिना यज्ञयाग सफल नहीं होते।

 

वेदोत्तर साहित्य में बृहस्पति को देवताओं का पुरोहित माना गया है। ये अंगिरा ऋषि की सुरूपा नाम की पत्नी से पैदा हुए थे। तारा और शुभा इनकी दो पत्नियाँ थीं। एक बार सोम (चंद्रमा) तारा को उठा ले गया। इस पर बृहस्पति और सोम में युद्ध ठन गया। अंत में ब्रह्मा के हस्तक्षेप करने पर सोम ने बृहस्पति की पत्नी को लौटाया। तारा ने बुध को जन्म दिया जो चंद्रवंशी राजाओं के पूर्वज कहलाये।

 

महाभारत के अनुसार बृहस्पति के संवर्त और उतथ्य नाम के दो भाई थे। संवर्त के साथ बृहस्पति का हमेशा झगड़ा रहता था। पद्मपुराण के अनुसार देवों और दानवों के युद्ध में जब देव पराजित हो गए और दानव देवों को कष्ट देने लगे तो बृहस्पति ने शुक्राचार्य का रूप धारणकर दानवों का मर्दन किया और नास्तिक मत का प्रचार कर उन्हें धर्मभ्रष्ट किया। बृहस्पति ने धर्मशास्त्र, नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र और वास्तुशास्त्र पर ग्रंथ लिखे। आजकल ८० श्लोक प्रमाण उनकी एक स्मृति (बृहस्पति स्मृति) उपलब्ध है।

 

बृहस्पति को देवताओं के गुरु की पदवी

बृहस्पति को देवताओं के गुरु की पदवी प्रदान की गई है। ये स्वर्ण मुकुट तथा गले में सुंदर माला धारण किये रहते हैं। ये पीले वस्त्र पहने हुए कमल आसन पर आसीन रहते हैं तथा चार हाथों वाले हैं। इनके चार हाथों में स्वर्ण निर्मित दण्ड, रुद्राक्ष माला, पात्र और वरदमुद्रा शोभा पाती है। प्राचीन ऋग्वेद में बताया गया है कि बृहस्पति बहुत सुंदर हैं। ये सोने से बने महल में निवास करते है।

 

इनका वाहन स्वर्ण निर्मित रथ है, जो सूर्य के समान दीप्तिमान है एवं जिसमें सभी सुख सुविधाएं संपन्न हैं। उस रथ में वायु वेग वाले पीतवर्णी आठ घोड़े तत्पर रहते हैं।देवगुरु बृहस्पति की तीन पत्नियाँ हैं जिनमें से ज्येष्ठ पत्नी का नाम शुभा और कनिष्ठ का तारा या तारका तथा तीसरी का नाम ममता है।

 

शुभा से इनके सात कन्याएं उत्पन्न हुईं हैं, जिनके नाम इस प्रकार से हैं – भानुमती, राका, अर्चिष्मती, महामती, महिष्मती, सिनीवाली और हविष्मती। इसके उपरांत तारका से सात पुत्र और एक कन्या उत्पन्न हुईं। उनकी तीसरी पत्नी से भारद्वाज और कच नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए। बृहस्पति के अधिदेवता इंद्र और प्रत्यधि देवता ब्रह्मा हैं।

 

महाभारत के आदिपर्व में उल्लेख के अनुसार, बृहस्पति महर्षि अंगिरा के पुत्र तथा देवताओं के पुरोहित हैं। ये अपने प्रकृष्ट ज्ञान से देवताओं को उनका यज्ञ भाग या हवि प्राप्त करा देते हैं। असुर एवं दैत्य यज्ञ में विघ्न डालकर देवताओं को क्षीण कर हराने का प्रयास करते रहते हैं। इसी का उपाय देवगुरु बृहस्पति रक्षोघ्र मंत्रों का प्रयोग कर देवताओं का पोषण एवं रक्षण करने में करते हैं तथा दैत्यों से देवताओं की रक्षा करते हैं।