udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news चार मामलों में सोया रहा पुलिस प्रशासन, पांचवें में उठा बवाल 

चार मामलों में सोया रहा पुलिस प्रशासन, पांचवें में उठा बवाल 

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पुलिस का सूचना तंत्र हर मामले में दिखा फिसड्डी ,पहले ही होती कार्रवाई, नहीं उठता धुंआ 

रुद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि में हुईघटना से केदारघाटी शर्मशार हुई। यहां की शांत वादियों में जो सांप्रदायिक जहर घुला उसकी किसी को भी कल्पना नहीं थी, मगर विगत दिनों हुई कुछ घटनाओं से कुछ संकेत तो मिलने लगे थे कि अगस्त्यमुनि शहर कभी भी दंगों की आग में झुलस सकता है, लेकिन  शासन-प्रशासन का सूचना तंत्र इसे सूंघ नहीं पाया। यह शासन-प्रशासन की सबसे बड़ी विफलता है, जिसकी वजह से न केवल कई दुकानों में तोड़ फोड़ हुई, बल्कि कईयों को तो आग के हवाले कर दिया गया। इससे निःसंदेह कई परिवारों पर न केवल गम्भीर आर्थिक संकट भी आ गया होगा, बल्कि इन परिवारों में असुरक्षा की भावना भी घर कर गई होगी।
दरअसल, विगत पांच माह में हुई पांच घटनाओं ने लोगों को आक्रोशित करने का ही काम किया। पहली घटना बनियाड़ी में दूसरे समुदाय के नाई द्वारा एक बालक के साथ अश्लील हरकत का था, जिसमें स्थानीय लोगों ने उसे मारपीट कर पुलिस को सौंपा, मगर पीडि़त पक्ष से कोई भी आगे नहीं आया और आरोपी बरी हो गया। दूसरा मामला एक स्कूल का बताया जा रहा था, जहां पर दूसरे समुदाय के छात्र ने छात्रा से अश्लील हरकत की। यह मामला भी दबा दिया गया। तीसरी घटना में दूसरे समुदाय का एक छात्र लापता हुआ। घरवालों ने पुलिस को इतला किया, बाद में तीसरे दिन छात्र एक छात्रा के कमरे से बरामद हुआ।
इस मामले में भी पुलिस कुछ नहीं कर पाई। चौथा मामला तो अभी एक हफ्ता पहले का बताया जा रहा है जब एक छात्रा को एक टेलर की दुकान में काम करने वाले दूसरे समुदाय के कारीगरों ने अपने कमरे में रखा तथा उसे शराब पिलाकर उसके साथ गलत काम किया। आरोपित पकड़े भी गये, मगर इस बार भी पीडि़त पक्ष से कोई सामने नहीं आया और आरोपित बरी हो गये। इन सभी मामलों में समुदाय विशेष के युवकांे की संलिप्तता से स्थानीय लोगों में आक्रोश पनप रहा था, जिसे पुलिस प्रशासन भांप नहीं पाया। यहां तक कि पिछले हफ्ते की घटना के बाद से स्थानीय कुछ युवकों ने बैठक कर इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए समुदाय विशेष के सभी व्यापारियों को चेतावनी भी दी थी। इसके बाबजूद भी प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
गुरूवार रात की घटना से अंदाजा लग गया था कि इस बार कुछ न कुछ अनहोनी जरूर होगी। इसके बाबजूद भी पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं की। यहां तक कि शुक्रवार प्रातः जब बाजार बन्द होने लगा और जनता एवं छात्र छात्रायें सड़कों पर निकल आये फिर भी पुलिस प्रशासन नहीं जागा। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक खबर ने आग में घी का काम किया। सोशल मीडिया में खबर चली कि एक दस वर्षीय लड़की के साथ अगस्त्यमुनि में समुदाय विशेष के लोगों ने गैंगरेप किया गया।ं इससे लोगों में आक्रोश और भी फेल गया और गांवों से भी जनता अगस्त्यमुनि पहंुच गई।ं
हजारों की संख्या में अनियंत्रित भीड़ को नियन्त्रित करने के लिए गिनती के ही पुलिस कर्मी थे। जो तोड़फोड़ होने पर मूक दर्शक बने रहे। यहां तक कि जब भारी भीड़ थाने में पहुंची तो पुलिस को थाना बचाना मुश्किल हो गया। यह तो गनीमत रही कि भीड़ सीधे थाने में नहीं घुसी। अन्यथा आज थाना भी जल जाता। यह तो तय है कि आज की घटना ने इस शान्त माहौल में जो जहर घोला है उससे निजात पाने में बड़ा समय लगेगा। दो चार दिन बाद दुकाने भी खुल जायेंगी, लेकिन जो सद्भाव पहले था वह नहीं दिखेगा।
लोगों का सैलाब सड़कों पर उतरा, आक्रोशित भीड़ ने दुकानों को किया आग के हवाले
 सोशल मीडिया में वायरल हुई एक आधी सच्ची झूठी खबर ने अगस्त्यमुनि की शांत फिजाओं में सांप्रदायिक जहर घोल दिया। हजारों आक्रोशित छात्र छात्राओं, व्यापारियों एवं स्थानीय निवासियों का सैलाब सड़कों पर उतर आया। हजारों की संख्या में भीड़ ने अगस्त्यमुनि से बेड़ूबगड़ तक जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया।
पुलिस की व्यवस्था चाक चौबंध न होने से अनियंत्रित भीड़ ने न केवल समुदाय विशेष की पन्द्रह से अधिक दुकानों में तोड़ फोड़ की, बल्कि आठ से अधिक दुकानों को आग के हवाले कर दिया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने थाने का घेराव कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की। प्रदर्शनकारी आरोपियों को उनके हवाले करने की मांग कर रही थी। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उन्हें रोका। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उन पर महिलाओं पर अश्लील फब्तियां कसने तथा महिला अस्तित्व विरूपण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है। पूरे मामले में रोचक तथ्य यह रहा कि जिन आरोपियों को सुमदाय विशेष का बताकर बबाल मचाया गया वे हिन्दू निकले।
घटना गुरूवार सांय की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि पीजी कॉलेज अगस्त्यमुनि में निर्माणाधीन छात्रावास में कार्य कर रहे मजदूरों द्वारा एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ की जा रही थी, जिसका कुछ छात्रों ने विरोध किया। छात्रों का आरोप था कि ये चार लोग थे। जिनमें से एक फरार हो गया। छात्रों ने तीनों आरोपियों के साथ मारपीट कर उन्हें पुलिस को सौंप दिया। थाने में जब तीनों से पूछताछ हुई तो उन्होंने अपना नाम मेहकार सिंह पूत्र शिवचरण सिंह ग्राम नवादा थाना गजरौला, जिला अमरोहा यूपी, सोनिक कुमार पुत्र रकम सिंह ग्राम रोहालकी, थाना खानपुर, जिला हरिद्वार तथा शिण्टू पुत्र समरपाल ग्राम शेरपुर, थाना धनौरा, जिला अमरोहा, यूपी बताया।
छात्रों का आरोप था कि तीनों ने चौथे युवक, जो दूसरे सम्प्रदाय का था को फरार करा दिया। इसी पर बहस होती रही। रात में ही किसी ने सोशल मीडिया पर अगस्त्यमुनि में समुदाय विशेष के युवकों द्वारा बालिका से गैंग रेप की खबर वायरल कर दी, जिसमें लड़की की उम्र दस वर्ष बताई गई, जिससे माहौल गर्मा गया। असल में पूरा मामला ही उलझा हुआ नजर आया। लड़की की उम्र एवं घटना की सत्यता पर संशय बना रहा। किसी को भी मामले की पूरी जानकारी नहीं थी, फिर भी शुक्रवार को प्रातः से ही आंदोलन की सुगबुगाहट हो गई।
पूरा बाजार स्वतः स्फूर्त बन्द हो गया। छात्रों ने कालेज से तथा व्यापारियों तथा बाजार से जुलूस प्रदर्शन प्रारम्भ कर दिया। जुलूस बेड़ुबगड़ होते हुए वापस थाने पर आकर रूका। इसी बीच अनियंत्रित भीड़ ने समुदाय विशेष की दुकानों को निशाना बनाकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। प्रदर्शकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारी आरोपियों को उनके हवाले करने की मांग कर रहे थे। थाने के सुरक्षा के लिए भारी पुलिस दल मौजूद था। थानाध्यक्ष सुबोध ममगाई ने प्रदर्शनकारियों से आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा, मगर कोई भी तैयार नहीं हुआ। इस दौरान थाने में बहस होती रही। इसी बीच किन्ही असामाजिक तत्वों द्वारा सुमदाय विशेष की दुकानों में आग लगा दी गई।। इससे अफरा तफरी मच गई। तब तक जनपद से भी अतिरिक्त पुलिस फोर्स आ चुका था।
एसडीएम सदर देवानन्द एवं सीओ रुद्रप्रयाग एसपी बुडोला ने भी घटना स्थल का दौरा किया, मगर तब तक असामाजिक तत्व आठ से अधिक दुकानों को आग के हवाले कर चुके थे। बाद में एसपी चमोली तृप्ति भट्ट ने भी घटनास्थल का दौरा कर थानाध्यक्ष से विस्तृत जानकारी लीं उन्होंने सभी लोगों से शान्ति बनाये रखने अपील की।
उधर, प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पिछले पांच माह में इस प्रकार की पांच घटनायें प्रकाश में आई हैं, जिसमें इसी समुदाय के लोगों का हाथ था। जिन्हें पकड़ा भी गया, लेकिन पुलिस ने उचित कार्यवाही न कर उन्हें छोड़ दिया। इसी से इनके हौसले बुलन्द हो गये हैं। यदि पहले ही उन्हें सजा मिल जाती तो आज इस तरह की घटना नहीं होती। प्रदर्शन करने वालों मे छात्र नेताओं के साथ ही अगस्त्यमुनि, विजयनगर, जवाहरनगर, चन्द्रापुरी आदि जगहों के व्यापारी शामिल थे।