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चीन के कारण कर्ज के दलदल में फंस सकता है बांग्लादेश

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श्रीलंका । श्रीलंका का अनुमान है कि राष्ट्रीय ऋण 64.9 अरब डॉलर है, जिसमें से 8 अरब डॉलर चीन के पास हैं। चीन ने पिछले साल राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ढाका यात्रा के दौरान- सॉफ्ट लोन को कॉमर्शियल क्रेडिट में बदलने का प्रस्ताव बांग्लादेश के सामने रखा।

 

इससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि अब बांग्लादेश भी श्रीलंका की तरह कर्ज के दलदल में फंस सकता है। हालांकि बांग्लादेश इसका विरोध कर रहा है। वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट के जरिए चीन बाकि के एशियाई देशों, अफ्रीका और यूरोप से जुड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए लोन पैटर्न को बदलने की पहल का बांग्लादेश ने विरोध किया है।

 

चीन के लोन पर अधिक ब्याज से बांग्लादेश की हालत भी श्रीलंका की तरह हो जाएगी और यह कर्ज के दलदल में फंस सकता है। ढाका में चीनी दूतावास के इकोनॉमिक व कॉमर्शियल काउंसलर लि गुआंगजुन द्वारा हाल के चीन बांग्लादेश ज्वाइंट इकोनॉमिक काउंसिल की बैठक में चीन का यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया था।

 

हालांकि बाद में चीन ने बांग्लादेश से विरोध के बाद अपना रुख नरम किया। सॉफ्ट लोन को कॉमर्शियल क्रेडिट में बदलने का मतलब है कि बांग्लादेश को उस कर्ज राशि के लिए उच्चतम ब्याज का भुगतान करना होगा। इसके पहले चीन के वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जताई थी।

 

जिसमें संयुक्त राष्ट्र इकनॉमिक ऐंड सोशल कमिशन फॉर एशिया ऐंड पैसिफिक ने अपनी ओर से दक्षिण और मध्य एशिया के उन देशों के कर्ज में फंसने की चेतावनी दी गई है, जिनमें चीन की ओर से घोषित इनवेस्टमेंट की वैल्यू संबंधित देश की अर्थव्यवस्था के साइज की तुलना में अधिक है।

 

इसके अनुसार, अक्टूबर 2016 में चीन और बांग्लादेश के बीच समझौता बांग्लादेश के जीडीपी के लगभग 20 फीसद के बराबर है। राष्ट्रपति जी जिनपिंग के ढाका दौरे के दौरान गत वर्ष बांग्लादेश ने चीन के साथ करीब ढाई दर्जन प्रोजेक्ट के लिए 25 बिलियन डॉलर पर हस्ताक्षर किया था।